Jabalpur News: 'पिंडदान में बदले कन्यादान के अरमान', मुस्लिम बनी अनामिका केस, जबलपुर में 'लव जिहाद' का आरोप

Jabalpur News: मध्य प्रदेश के जबलपुर में मुस्लिम युवक से हिन्दू लड़की द्वारा शादी के बाद सामने आए मामले में परिजनों ने लड़की को मृत मान लिया फिर नर्मदा तट पर मृत्यु भोज, पिंडदान समेत कई क्रियाएं सम्पन्न की।

Jabalpur News: दुनिया में कौन मां-बाप होंगे जो अपनी लाड़ली के लिए कोई अरमान न संजोते होंगे। बढ़ती उम्र के साथ हसरतों की मीनार भी खड़ी हो जाती है। भरोसा होता है कि बेटी मां-बाप के रिश्ते की डोर की अहमियत समझेगी। लेकिन जब यह सब एक पल में टूट जाए तो फिर क्या?

कुछ ऐसी ही स्थिति से जब मध्य प्रदेश जबलपुर के सरकारी शिक्षक चन्द्रिका प्रसाद दुबे और उनका परिवार गुजरा तो उन्होंने ऐसा फैसला लिया, जो हर किसी का दिल आसानी से नहीं समझ सकता। जिस पर बीतती हैं, वही जानता हैं।

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पढ़-लिखकर बढ़ी हुई लाड़ली अनामिका ने जब बिना बताए गैर धर्म में मुस्लिम युवक से शादी की, फिर धर्म परिवर्तन करा लिया तो घर वालों के दिल में अनामिका के लिए कोई जगह नहीं बची। लाख समझाइश, लेकिन नतीजा सिफर रहा। फिर बेटी के जीते जी उसे मृत घोषित का कठोर कदम उठाया।

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समाज के लोगों ने बताया साहसिक कदम
नर्मदा घाट पर जबलपुर में अनामिका को मृत मानकर उसका पिंडदान मृत्यु भोज आयोजित किया । समाज के लोगों ने भी दुबे के इस कदम को सिर आंखो पर लिया। कहा कि शास्त्रों में भले ही इस परंपरा की मान्यता न हो, लेकिन धार्मिक और सामाजिक प्रतिष्ठा पर जब आंच आएगी तो समाज इसे मान्यता देगा।

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मृत व्यक्ति की तरह नर्मदा घाट पर अनामिका की तस्वीर और उस पर माला चढ़ाकर अंतिम सभी क्रियाएं संपन्न हुई। परिवार, सामाज के कुछ लोगों के साथ हिन्दूवादी संगठन के कार्यकर्त्ता भी इसमें शरीक हुए। आंखों के सामने 'जीते जी' बेटी को जन्म देनी वाली मां ने जिस बेटी को मृत माना उसके दिल की कसक भी सुनाई दी।

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कन्यादान की जगह पिंडदान!
मां अन्नपूर्ण दुबे ने कहां कि उनकी तीन बेटियों में अनामिका सबसे छोटी बेटी थी। सबसे लाड़ली थी, बड़े सपनों का घर तैयार था। लेकिन गैर मजहब में शादी कर उसने पूरी इज्जत मिट्टी में मिला दी। आज परिवार, किसी को मुंह दिखाने लायक भी नहीं हैं। ऐसे में तो अनामिका जैसी औलाद का ना होना अच्छा हैं।

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अनामिका हमेशा के लिए मर चुकी
मुस्लिम युवक मोहम्मद अयाज से शादी कर अनामिका, उजमा फातिमा हो गई। अपनी भांजी को लेकर मामा नरेंद्र तिवारी भी आहत हैं। उन्होंने कहा कि अनामिका ने जीते जी अपने बूढ़े मां-बाप के अरमानों को ही नहीं, बल्कि उनकी सांसों को भी हमेशा के लिए मार दिया हैं। ऐसे में उससे किस बात पर रिश्ता बना रहने दिया जाए। आज की तारीख के बाद वह सभी के लिए मर चुकी हैं।

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बदकिस्मती नहीं तो फिर क्या?
पिता चन्द्रिका प्रसाद दुबे जो खुद एमए की पढ़ाई करने के बाद सरकारी शिक्षक बने और दूसरे मां-बाप के बच्चों को नेक रास्ते पर चलने की सीख देते आए, उनके दिल से एक ही बात निकली कि जब अपना सिक्का ही खोटा, तो भला दूसरे को क्या दोष दें। लेकिन ब्रेनवाश कर गैर मजहब के व्यक्ति द्वारा किसी दूसरे धर्म समाज के खिलाफ ऐसी साजिश करने वालों को सजा होना चाहिए।

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प्रेत की मुक्ति के लिए होता है पिंडदान
नर्मदा तट पर मृत्यु बाद त्रयोदशी संस्कार के वक्त होने वाली कई क्रियाएं कराने वाले पंडित संजू बाजपेयी ने कहा है कि हिन्दू धर्म में श्रद्धा ही श्राद्ध हैं। कहा भी गया है कि जब-जब धर्म की हानि हो, तो उस पीढ़ा को हरने भगवान आते हैं। मृत्यु बाद संबंधित व्यक्ति को प्रेत माना जाता है, जिसकी मुक्ति के लिए ऐसे कर्म होते है।

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हिन्दूवादी संगठन बोले कि यह अनुकरणीय उदहारण
जिस अनामिका को मृत माना गया, उसका शोक संदेश कार्ड भी प्रिंट कराया गया था। जिसमें पुत्री की जगह कुपुत्री और स्वर्गलोक की जगह नरकगामी शब्द का उपयोग किया गया। मृत्युभोज और पिंडदान क्रिया कर्म के दौरान हिन्दू धर्म सेना और बजरंग दल के कार्यकर्त्ता भी पहुंचे. धर्म सेना नेता योगेश अग्रवाल बोले कि मां-बाप के सपनों का जो औलाद इस तरह से खून करे, उनका ऐसा ही हस्र होना चाहिए। दुबे परिवार द्वारा उठाया गया यह कदम पूरे हिन्दू समाज के लिए प्रेरणा हैं।

सामने नहीं आ रही उजमा फातिमा
दुबे परिवार और हिंदूवादी संगठनों ने मोहम्मद अयाज पर लव जिहाद, गैर क़ानूनी ढंग से धर्मांतरण समेत कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। वहीं मीडिया के सामने अभी अनामिका से बनी उजमा फातिमा और अयाज एक बार भी नहीं आए। न ही उनकी ओर से कोई अधिकृत बयान सामने आया हैं। दुबे परिवार ने अनामिका के मामले को पूरे समाज का मामला माना हैं। उन्होंने घोषणा की है कि वे इस मामले में सुप्रीम कोर्ट तक क़ानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

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