जबलपुर में PM आवास के 800 करोड़ के प्रोजेक्ट दीमक के हवाले, जिम्मेदार बेपरवाह

800 crore project of PM housing in Jabalpur handed over to termites मप्र के महाकौशल अंचल के मुख्यालय जबलपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले मकानों के इंतजार में गरीबों की आंखें पथरा गई है

जबलपुर, 20 मई: हर गरीब का सपना होता है कि उसे अपना घर मिल जाए। इन सपनों को साकार करने का काम देश की सरकार भी रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर गरीब के घर का सपना पूरा करने की कवायद तेजी से चल रही है। लेकिन सरकार की कोशिशों और गरीबों के सपनों को पलीता लगाने का काम कर रहे हैं जिम्मेदार अधिकारी....मप्र के महाकौशल अंचल के मुख्यालय जबलपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले मकानों के इंतजार में गरीबों की आंखें पथरा गई है और अब उम्मीद भी नहीं है कि उनका यह सपना साकार हो पाएगा।

कल तक लक्ष्मी सिंह के भी बड़े अरमान थे और उन्होंने सुनहरा सपना देखा था, कि जो अपने परिवार के साथ पिछले कई दशकों से एक छोटे से कच्चे मकान में रह रही हैं। उन्हें घर की पक्की छत मिलेगी और दूसरों की तरह उनका भी अच्छा घर होगा। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2017 में जबलपुर की चारों दिशाओं में छह बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए गए, जहां गरीबों को फ्लैट बनाकर दिए जाने थे। लक्ष्मी ने मोहनिया प्रोजेक्ट में एक फ्लैट के लिए आवेदन दे दिया। 4 साल से ज्यादा बीत चुके, लेकिन अब तक लक्ष्मी सिंह अपने फ्लैट में नहीं पहुंच पाई हैं... कुछ ऐसा ही कहानी विजय हजारी की है, जो खुशनसीब थे जिन्हें मोहनिया में ईडब्ल्यूएस फ्लैट तो मिल गया। लेकिन आज भी वह किराए के मकान में रह रहे हैं। वजह यह है कि जहां इन्हें फ्लैट दिया गया है, वहां ना तो पीने का पानी उपलब्ध है और ना बिजली..ऐसे हालातों में विजय अपने परिवार के साथ आज भी किराए के मकान में रहने को मजबूर है । एक बड़ी समस्या के सामने यह है ईडब्ल्यूएस फ्लैट खरीदने के लिए जो लोन लिया था, उसकी किस्त भी भर नहीं पड़ रही है और मकान का किराया भी देना पड़ रहा है इन समस्याओं से निजात पाने के लिए ऐसे सैकड़ों हितग्राही दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है।

अब आपको आंकड़ों के जरिए बताते हैं कि कैसे करीब 800 करोड़ों रुपए के इस प्रोजेक्ट को दीमक लग रही है प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जबलपुर के मोहनिया, कूदवारी, तेवर, परसवाड़ा और तिलहरी में अपार्टमेंट बनाने की योजना 2017 में शुरू कर दी गई थी इस योजना के तहत हर अपार्टमेंट में ईडब्ल्यूएस, एलआईजी और एमआईजी साइज के फ्लैट बनने हैं।

  • मोहनिया में 116 करोड़ रुपए की लगात से 1632 फ्लैट
  • कुदवारी में 94 करोड़ 71 लाख रुपए की लागत से 1152 फ्लैट
  • तेवर 100 करोड़ रुपए में 1152
  • परसवाड़ा A में 150 करोड़ रुपए में 1728 और परसवाड़ा B में 133 करोड़ रुपए में 1584 फ्लैट
  • इसी तरह तिलहरी में 101 करोड़ रुपए की लागत से 1152 फ्लैट बनाने हैं.

कुल मिलाकर कहा जाए तो इस प्रोजेक्ट के तहत 8400 फ्लैट बनाए जाने हैं लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है पिछले 5 सालों में भी केवल मोहनिया में 96 फ्लैट तो कुदवारी में 48 फ्लैट ही बनकर तैयार हो पाए हैं। इसके अलावा बाकी किसी प्रोजेक्ट में एक भी फ्लैट तक बनकर तैयार नहीं हो पाया है। ज्यादा हैरानी की बात तो यह है कि पिछले 5 सालों में अब तक महज 513 फ्लैटों की बुकिंग हो पाई है यानि 6% से भी कम फ्लैटबुक हो पाए हैं। अब जिम्मेदार अधिकारी इसके पीछे कोरोना का रोना रो रहे हैं।


अब सवाल ये है कि ये प्रोजेक्ट कब तक पूरे हो पाएंगे ? महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। स्वाभाविक बात है कि लागत पर असर पड़ेगा। यानि आने वाले वक्त में गरीबों के लिए यह घर खरीदना बेहद मुश्किल हो जाएगा। सरकार सब्सिडी जरूर दे रही है लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अगर योजना का लाभ गरीब जनता तक नहीं पहुंचा पाए... तो सरकार के करोड़ों रुपयों में तो पानी फिरेगा ही। गरीबों के सपनों का आशियाना भी हक़ीक़त कभी तब्दील नही हो पाएगा।

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