अफ्रीका: घुसपैठिए मच्छर बढ़ा सकते हैं मलेरिया का प्रकोप

हाल ही में आई एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक अफ्रीका में मच्छरों की कहर मचाने वाली यह प्रजाति आमतौर पर भारत और फारस की खाड़ी के आसपास पाई जाती है. इन मच्छरों को वैज्ञानिक रूप से एनोफिलीज स्टेफंसी के नाम से जाना जाता है. इस तरह के मच्छर दस साल पहले जिबूती में पाए गए थे. तब से ये मच्छर सूडान, सोमालिया, नाइजीरिया और यमन तक फैल चुके हैं.
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जिबूती में हाल ही में मलेरिया के मामले बढ़ने के पीछे इन मच्छरों के होने का संदेह है, जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अफ्रीका में इन्हें और फैलने से रोकने के प्रयास तेज कर दिए हैं.
मलेरिया पर शोध करने वाले वैज्ञानिक फिट्सम तदेसे ने अमेरिकन सोसायटी ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन की एक बैठक में अपना शोध पेश करते हुए कहा कि न केवल जिबूती, बल्कि इस साल इथियोपिया में भी मलेरिया महामारी के पीछे इन घुसपैठिए मच्छरों का हाथ था.
इस साल जनवरी में स्वास्थ्य अधिकारियों ने इथियोपिया के शहर डायर डावा में मलेरिया में तेज वृद्धि की सूचना दी. उसके बाद राजधानी अदीस अबाबा में स्थापित आर्मुएर हैनसेन रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अपना शोध शुरू किया. उन्होंने मलेरिया के 200 से अधिक मामलों को ट्रैक किया, आस-पास के मच्छरों के प्रजनन स्थलों की जांच की और मलेरिया का कारण बनने वाले मच्छरों का विश्लेषण किया.
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अध्ययन में पाया गया कि मलेरिया अफ्रीका में देशी मच्छरों से नहीं बल्कि विदेशी मच्छरों से फैलता है. उन्हें कोई ऐसे मच्छर नहीं मिले जो आमतौर पर अफ्रीका में मलेरिया फैलाते हैं. इसके बजाय उन्हें विदेशी मच्छरों की भारी संख्या मिली.
इंपीरियल कॉलेज लंदन में संक्रामक रोग के प्रोफेसर थॉमस चर्चर ने निष्कर्षों को 'भयावह' बताया है. उन्होंने कहा कि अफ्रीकी मूल के मच्छर आमतौर पर कम आबादी वाले ग्रामीण इलाकों में मलेरिया फैलाते हैं, जबकि घुसपैठिए मच्छर बड़े शहरों में आबादी को निशाना बनाते हैं. साथ ही ये गैर देशी मच्छर छोटे तालाबों में तेजी से प्रजनन करते हैं.
शोधकर्ताओं का कहना है कि अफ्रीका में इस प्रकार के मच्छरों के लिए जलवायु और परिस्थितियां अनुकूल हैं, जो उन्हें और अधिक खतरनाक बनाती हैं. प्रोफेसर चर्चर कहते हैं, "अगर ये मच्छर अफ्रीका में पैर जमा लेते हैं तो यह एक असाधारण रूप से खराब विकास हो सकता है."
अफ्रीका में मच्छरों को रोकने के लिए मच्छरदानी और इनडोर स्प्रे जैसे उपायों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ये सभी उपाय इन नए घुसपैठिए मच्छरों के खिलाफ बेकार साबित होंगे क्योंकि ये घर के बाहर लोगों को काटते हैं.
एए/सीके (एपी)
Source: DW
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