इस देश में चरम पर पहुंची महंगाई, मुद्रा की वैल्यू हुई जीरो, सोने के सिक्के ढालकर खरीदेगा दूसरे देशों से सामान
जिम्बाब्वे में अर्थव्यवस्था की हालत लगातार खराब होती जा रही है। देश में मुद्रास्फीति चरम पर है और यह लगभग 200 प्रतिशत को छूने को है।
हरारे, 05 जुलाईः जिम्बाब्वे में अर्थव्यवस्था की हालत लगातार खराब होती जा रही है। देश में मुद्रास्फीति चरम पर है और यह लगभग 200 प्रतिशत को छूने को है । महंगाई कम होने का नाम नहीं ले रही है। विदेशी मुद्रा का संकट पैदा हो गया है जिस कारण यह देश अन्य देशों से सामान नहीं खरीद पा रहा है। इस बाधा को पार करने के लिए जिम्बाब्वे के केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह इस महीने सोने के सिक्कों को मूल्य के भंडार के रूप में बेचना शुरू करने जा रहा है।

25 जुलाई से बेचेगा सोने के सिक्के
केंद्रीय बैंक के गवर्नर जॉन मंगुड्या ने सोमवार को एक बयान में कहा कि 25 जुलाई से स्थानीय मुद्रा, अमेरिकी डॉलर और अन्य विदेशी मुद्राओं में सोने की मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमत और उत्पादन लागत के आधार पर सोने के सिक्के बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। केंद्रीय बैंक ने कहा कि "मोसी-ओ-तुन्या" सिक्का, जिसका नाम विक्टोरिया फॉल्स के नाम पर रखा गया है, को नकदी में बदला जा सकता है और स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार किया जा सकता है।

सिक्के में होगा एक ट्रॉय औंस सोना
सोने के सिक्के में एक ट्रॉय औंस सोना होगा और इसे फिडेलिटी गोल्ड रिफाइनरी, ऑरेक्स और स्थानीय बैंकों द्वारा बेचा जाएगा। बतादें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों द्वारा मुद्रास्फीति और युद्धों से बचाव के लिए सोने के सिक्कों का उपयोग किया जाता है। पिछले हफ्ते, जिम्बाब्वे ने अपनी नीतिगत दर को 80% से दोगुना कर 200% कर दिया और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच वर्षों के लिए अमेरिकी डॉलर को कानूनी निविदा बनाने की योजना की रूपरेखा तैयार की।

मुद्रास्फीति का लंबा रहा है इतिहास
जिम्बाब्वे में बेहद उच्च मुद्रास्फीति का एक लंबा इतिहास रहा है। जिम्बाब्वे उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां हाइपरइंफ्लेशन सच हो चुका है। नवंबर 2008 में देश की मुद्रास्फीति दर महीने-दर-महीने 79.6 बिलियन प्रतिशत पर पहुंच गई थी। तब जिम्बाब्वे में महंगाई इस कदर बेकाबू हो गई थी कि वहां के सेंट्रल बैंक को 100 लाख करोड़ डॉलर का बैंकनोट जारी करना पड़ गया था। जिम्बाब्वे को अधिक पैसे छापने के लिए भी जाना जाता है, लेकिन ये फिर भी अपनी बढ़ती कीमतों को काबू में करने में विफल रहा है।

रॉबर्ट मुगाबे की दिला रहा याद
2019 में जिम्बाब्वे ने एक दशक के डॉलराइजेशन के बाद अपनी पुरानी मुद्रा वापस ला दी, लेकिन इसने फिर से तेजी से अपना मूल्य खो दिया। इस दक्षिणी अफ्रीकी देश में बढ़ती मुद्रास्फीति, पहले से ही कमी से जूझ रही आबादी पर दबाव बना रही है और वर्षों पहले अनुभवी नेता रॉबर्ट मुगाबे के लगभग चार दशक के शासन के तहत आर्थिक अराजकता की यादों को उभार रही है। यहां बीते महीने जून में देश की साल-दर-साल महंगाई दर 192 फीसदी बताई गई थी।
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