Yunus on Pakistan: पाकिस्तान को मोहम्मद युनुस का झटका, बांग्लादेश ने कहा- 1971 के नरसंहार के लिए मांगें माफी
Yunus on Pakistan: अगर आप से पूछा जाए कि बांग्लादेश (Bangladesh) के पाकिस्तान (Pakistan) के साथ कैसे संबंध तो आप इसका जवाब 'इट्स कॉम्प्लीकेटेड' (It's Complicated) के रूप में दे सकते हैं। शेख हसीना (Sheikh Hasina) के जाने और मोहम्मद युनुस (Muhammad Yunus) के सत्ता में आने के बाद से ही पाकिस्तान और बांग्लादेश एक थाली में खाना खा रहे थे। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि कुछ तो गड़बड़ है।
पाकिस्तान से बांग्लादेश ने की माफी की मांग
दरअसल, पाकिस्तान के साथ हाल ही में हुई बातचीच में मोहम्मद युनुस ने अपने सुर बदल लिए हैं। उन्होंने पाकिस्तान से कई मांगें रखी हैं, जिनमें 1971 के मुक्ति संग्राम से लेकर अब तक की अनसुलझी ऐतिहासिक शिकायतें शामिल हैं। इन चर्चाओं में सबसे आगे बांग्लादेश की ये मांग है कि 1971 के संघर्ष के दौरान किए गए नरसंहार के लिए पाकिस्तान औपचारिक रूप से बांग्लादेश माफ़ी मांगे और अपनी गलती को स्वीकार करे। ढाका में दोनों देशों के विदेश सचिवों के बीच यह बैठक लंबे अंतराल के बाद हुई, जो संभावित कूटनीतिक सफलताओं या चुनौतियों या फिर आगामी असफलताओं के लिए मंच तैयार करता है।

सिर्फ माफी नहीं, हर्जाना भी दे पाक: बांग्लादेश
माफी से इतर बांग्लादेश ने वित्तीय दावा भी पेश किया है, जिसमें 1971 से पहले की संपत्तियों के अपने वैध हिस्से के रूप में पाकिस्तान से 4.3 बिलियन डॉलर (तकरीबन 36 लाख करोड़ रूपए) की मांग की गई है। बांग्लादेश की यह मांग जायज है, लेकिन दोनों देशों के ताजा-ताजा बने संबंधों में विवाद का कारण बन सकती है। बांग्लादेश की ये मांग ऐतिहासिक विवाद के उन पहलों को उजागर करती है जिनमें इतिहास में हुआ आर्थिक नुकसान भी शामिल है। बांग्लादेश के विदेश सचिव जसीमुद्दीन ने द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की संभावना को इन गंभीर बयानों और रास्तों से गुजार दिया है।
इतिहास के पन्नों से समझें नाराजगी...
1947 में मतभेद के बीज तब बोए गए जब भारत के विभाजन के कारण पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान का दुनिया के नक्शे पर आए, जिसका पूर्वी भाग आज का बांग्लादेश है। पूर्वी पाकिस्तान में स्वतंत्रता की मांग को पाकिस्तानी सेना ने क्रूरता के साथ कुचला था ये बात सभी जानते हैं। खासकर 1970 और 1971 में इसका सबसे वीभत्स रूप दुनिया के सामने आया, जिससे बांग्लादेश में आज भी आक्रोश बना हुआ है। इतने साल गुजरने के दौरान भी बांग्लादेश पर किए गए अत्याचार एक दर्दनाक मुद्दा रहे हैं, जिसके लिए बांग्लादेश लगातार पाकिस्तान से माफ़ी की मांग करता रहा है।
बांग्लादेश ने निकाली पूरी भड़ास
बांग्लादेश के विदेश सचिव जसीमुद्दीन ने पाकिस्तानी डेलिगेट्स के सामने पेश किए अनसुलझे मुद्दों की सूची के बारे में विस्तार से बताया। इनमें न केवल 1971 के नरसंहार के लिए मांगी गई माफ़ी शामिल है, बल्कि आज भी गुपचुप तरीके से पाकिस्तानी जेलों में बंद हुए नागरिकों की वापसी और विभाजन के दौरान जिन संपत्तियों का बंटवारा न हो सका उनके उचित बंटवारे की बात कही। इसके अलावा बांग्लादेश ने 1970 के चक्रवात के पीड़ितों के लिए ढाका को दी गई विदेशी सहायता के हस्तांतरण को भी इसमें शामिल किया। बांग्लादेश के अंदर भरी इस कसक ने बांग्लादेश के ऐतिहासिक विवाद के सभी पहलुओं को न सिर्फ बाहर लाया बल्कि उनके समाधान की भी मांग कर दी है।
पाकिस्तान से बोलते नहीं बना!
इतनी बड़ी दुविधा के बाद पाकिस्तान की विदेश सचिव अमना बलूच ने ढाका में बातचीत पर कुछ भी स्पष्ट नहीं कहा। वहीं जब उनसे माफी को लेकर सवाल किया तो बलूच इससे बचते नजर आए। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार की बांग्लादेश की आगामी यात्रा को लेकर उत्सुकता अब असमंजस में बदल सकती है। अब देखना ये है कि माफी मांगने पर पाकिस्तान क्या रुख अपनाता है।
माफी मांगी तो फंसे, नहीं मांगी तो भी फंसे!
बांग्लादेश द्वारा रखी गई मांगें, खास तौर पर माफ़ी मांगने की मांग, पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक चुनौती है। 1971 के अत्याचारों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से पाकिस्तान के लिए एक नई मुसीबत बन सकती है। मौजूदा सरकार बुरी तरह से घिर सकती है। और यदि माफी नहीं मांगी गई तो हाल ही में बने बांग्लादेश-पाकिस्तान के संबंध ठंडे बस्ते में भी जा सकते हैं। फिलहाल यह स्थिति पाकिस्तान को एक नाजुक अवस्था में डाल रही है, जहां उसे ऐतिहासिक शिकायतों पर बात करने और अपनी साख बनाए रखने के बीच में से किसी एक को चुनना होगा।
अतीत का आज पर क्या असर?
1971 के मुक्ति संग्राम और उसके बाद बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक जुड़ाव समकालीन रिश्तों पर ऐतिहासिक घटनाओं के असर को दिखाता है। लेकिन देखना होगा कि पाकिस्तान युनुस के आगे झुटता है या नहीं।
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