'आधिपत्यवाद चीन के डीएनए में नहीं', राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स के विस्तार का आह्वान किया
XI Jinping in BRICS: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह ब्रिक्स के विस्तार का आह्वान करते हुए, ज्यादा न्यायसंगत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का निर्माण करने का आह्वान किया है, और इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा है, कि "वर्चस्ववाद चीन के डीएनए में नहीं है"।
ये पहली बार है, जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन के ऊपर लगते अधिपत्यवाद के आरोपों पर जवाब किसी वैश्विक मंच पर दिया है। मंगलवार को दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत में अपनी ओर से दिए गए भाषण में शी जिनपिंग ने कहा, कि चीन की महान शक्ति प्रतिस्पर्धा में शामिल होने या "ब्लॉक टकराव" पैदा करने की कोई इच्छा नहीं है।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिपत्यवाद से इनकार उस ब्रिक्स सम्मेलन में किया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल हो रहे हैं और भारत का आधिकारिक रूख अभी तक ब्रिक्स के विस्तार के पक्ष में नहीं रहा है। वहीं, भारत चीन के अधिपत्यवाद को रोकने के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ QUAD का सदस्य है, जिसका मकसद ही इंडो-पैसिफिक में चीन के विस्तार को काउंटर करना है।
शी जिनपिंग ने ब्रिक्स शिखर सम्मलेन में क्या कहा?
ब्रिक्स शिखर सम्मलेन के व्यापार मंच में शी जिनपिंग की टिप्पणियों को चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेन्ताओ ने रखा है और कहा, कि शी जिनपिंग ने ब्रिक्स व्यापार मंच पर कहा, कि "चीन इतिहास के सही पक्ष पर मजबूती से खड़ा है और मानता है, कि आम हित के लिए एक उचित उद्देश्य को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।"
शी जिनपिंग ने कहा, कि ब्रिक्स "चाहे जितना भी प्रतिरोध हो" आगे बढ़ता रहेगा।
हालांकि, अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है, कि आखिर खुद शी जिनपिंग इस कार्यक्रम में क्यों शामिल नहीं हुए, जबकि इसमें दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा और भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भाग लिया था।
उन्होंने कहा, कि "फिलहाल, दुनिया में, हमारे समय में और इतिहास में ऐसे बदलाव हो रहे हैं, जैसे पहले कभी नहीं हुए, जो मानंव समाज को एक महत्वपूर्ण मोड़ पर ला रहे हैं।"
शी जिनपिंग ने दक्षिण अफ्रीका में पहले, शिखर सम्मेलन के मेजबान राष्ट्रपति रामफोसा से मुलाकात की और अपने समकक्ष को बताया, कि उनके देश "नए ऐतिहासिक शुरुआती बिंदु" पर खड़े हैं।
चीन और रूस, दोनों पर संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारी प्रतिबंध लगाया है, लिहाजा शी जिनपिंग का कहना है, कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और मामलों पर पश्चिमी प्रभुत्व का मुकाबला करने के लिए ब्रिक्स का विस्तार करने के इच्छुक हैं।
ब्रिक्स के विस्तार पर क्या होगी बात?
सऊदी अरब, इंडोनेशिया, ईरान, अर्जेंटीना और मिस्र उन देशों में से हैं, जिन्होंने इस ब्लॉक में शामिल होने में भारी दिलचस्पी दिखाई है। वर्तमान में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स का हिस्सा हैं, जो दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के 25 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है ।
हालांकि, चीन जहां ब्रिक्स ब्लॉक का विस्तार चाहता है और इसमें जहां रूस और दक्षिण अफ्रीका उसका समर्थन कर रहे हैं, वहीं भारत और ब्राजील अभी तक ब्रिक्स के विस्तार को लेकर सहमत नहीं हुए हैं।
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने ब्रिक्स के विस्तार को लेकर अलग नजरिया रखते हुए कहा है, कि ब्रिक्स ब्लॉक को 'अमेरिका, जी7 या फिर जी20 का काउंटरपार्ट' नहीं बनना चाहिए।
लूला ने एक सोशल मीडिया ब्रॉडकास्ट के दौरान कहा, कि "हम सिर्फ खुद को व्यवस्थित करना चाहते हैं।"
डॉलर को काउंटर किया जाएगा?
सदस्यता बढ़ाने के अलावा, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए व्यापार और वित्तीय लेनदेन में स्थानीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने के तरीकों पर भी चर्चा की जाएगी।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, जो व्यक्तिगत रूप से शिखर सम्मेलन में भाग नहीं ले रहे हैं, उन्होंने एक पूर्व-रिकॉर्ड किए गए बयान में कहा, कि ब्रिक्स ब्लॉक के आर्थिक समय का डी-डॉलरीकरण "अपरिवर्तनीय" है और गति पकड़ रहा है।
यूक्रेन पर मॉस्को के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के जवाब में लगाए गए व्यापक पश्चिमी प्रतिबंधों से रूस की अर्थव्यवस्था पस्त हो गई है।
हालांकि, अभी तक साफ नहीं हो पाया है, कि क्या ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान क्या किसी नये मुद्रा की घोषणा की जाएगी या नहीं।












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