World Top 10 Military Budgets: हथियारों पर पानी की तरह पैसा बहा रहे ये 10 देश, देखें भारत कौन से पायदान पर?
World Top 10 Military Budgets: स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताज़ा रिपोर्ट ने दुनिया के बदलते सुरक्षा हालातों को उजागर किया है। साल 2025 में वैश्विक सैन्य खर्च 2,887 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो दुनिया भर में बढ़ती असुरक्षा को दर्शाता है।
दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान अमेरिका के खर्च में मामूली कमी आई है, जबकि यूरोप और एशिया के देशों ने अपने हथियारों पर होने वाले खर्च को तेजी से बढ़ाया है। भारत इस लिस्ट में पांचवें स्थान पर बना हुआ है, जो अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए आधुनिक तकनीकों पर निवेश बढ़ा रहा है।

Global Military Expenditure: अमेरिका अब भी नंबर वन
भले ही 2025 में यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य मदद में देरी के कारण अमेरिका का रक्षा बजट थोड़ा घटकर 954 अरब डॉलर रह गया हो, लेकिन वह अब भी दुनिया में सबसे ज्यादा खर्च करने वाला देश है। रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरावट बहुत कम समय के लिए है। आने वाले सालों (2026-27) में अमेरिका का सैन्य बजट 1.5 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर को छू सकता है, क्योंकि वैश्विक तनाव को देखते हुए अमेरिकी कांग्रेस ने भारी बजट को मंजूरी दी है।
भारत की सैन्य ताकत और खर्च
भारत 92.1 अरब डॉलर के रक्षा बजट के साथ दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है। भारत ने अपने बजट में करीब 8.9% की बढ़ोतरी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के साथ मई 2025 में हुए संघर्ष और चीन के साथ जारी तनाव की वजह से भारत ने लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और ड्रोन तकनीकों पर निवेश बढ़ाया है। भारत अपनी रक्षा प्रणालियों को आधुनिक बनाने के लिए स्वदेशी और विदेशी दोनों तकनीकों पर भारी पैसा खर्च कर रहा है।
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यूरोप में बढ़ता युद्ध का साया
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने पूरे यूरोप को अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है। 2025 में यूरोप के सैन्य खर्च में 14% की भारी बढ़ोतरी देखी गई, जो शीत युद्ध के बाद सबसे बड़ी वृद्धि है। रूस अपनी सेना पर 190 अरब डॉलर खर्च कर तीसरे स्थान पर है, जबकि यूक्रेन 84 अरब डॉलर के साथ सातवें नंबर पर है। नाटो देशों ने भी अपनी सुरक्षा के लिए अब बजट बढ़ाना शुरू कर दिया है।
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चीन और पाकिस्तान का गठबंधन
चीन 336 अरब डॉलर के अनुमानित खर्च के साथ दूसरे स्थान पर है, जो एशिया में सबसे अधिक है। चीन न केवल खुद को मजबूत कर रहा है, बल्कि पाकिस्तान की सैन्य जरूरतों को भी पूरा कर रहा है। पाकिस्तान ने भी अपने खर्च में 11% की वृद्धि की है और वह चीन से नए विमान और मिसाइलें खरीद रहा है। एशिया के अन्य देश जैसे जापान और सऊदी अरब भी अपनी सुरक्षा चिंताओं के कारण रक्षा बजट में पीछे नहीं हैं।












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