दुनिया की सबसे छोटी बच्ची: पैदा हुई थी तो सेब जितना था वजन, 13 महीने बाद अस्पताल से घर पहुंची
सिंगापुर, 9 अगस्त: सिंगापुर के एक अस्पताल में एक मां ने वक्त से चार महीने पहले ही बेटी को जन्म दिया था। लेकिन, अच्छी खबर ये है कि वह बच्ची अब स्वस्थ है और एक साल से भी ज्यादा वक्त अस्पताल में गुजारने के बाद घर जा पाई है। 14 महीने पहले जब वह पैदा हुई थी, तब उसका वजन सिर्फ एक सेब के बराबर था। नर्स हैरान थीं, डॉक्टरों को यकीन नहीं हो पा रहा था। लेकिन, कोविड-19 के बावजूद उस मासूम ने जिंदगी के लिए जो जज्बा दिखाया, उसने अस्पताल के पूरे स्टाफ को उसे हर हाल में सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया। इसे कुदरत का करिश्मा कहा जाए या मेडिकल साइंस का चमत्कार, लेकिन हककीत ये है कि अब बच्ची तंदुरुस्त है और उसका वजन भी सही हो चुका है।

जन्म के वक्त सिर्फ 212 ग्राम की थी बेबी शुआन
एक मासूम बच्ची पैदा होने के 13 महीने बाद अस्पताल से अपने घर वापस जा पाई। उसे दुनिया की सबसे छोटी बच्ची माना जा रहा है। क्वेक यू शुआन जब पैदा हुई थी, तब उसका वजन सिर्फ 212 ग्राम था, यानी एक सेब के बराबर। उसका जन्म पिछले साल 9 जून को सिंगापुर के नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में हुआ था। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक वह समय से 4 महीने पहले ही पैदा हो गई थी। यानी जब पैदा हुई थी, तब महज 25 सप्ताह की थी। दुनिया में इतने कम उम्र के बच्चों के जीवित रहने का रिकॉर्ड शायद नहीं है। बेबी शुआन ने जन्म लिया था तो वह सिर्फ 24 सेंटी मीटर लंबी थी।
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जन्म के बाद 13 महीने अस्पताल में रही
जन्म के वक्त यह मासूम इतनी छोटी सी थी कि जब उसे अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में ले जाया गया तो ड्यूटी नर्स को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो पा रहा था। नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल की नर्स झांग सूहे ने दि स्ट्रेट टाइम्स से कहा है, 'मैं चौंकी तो मैंने प्रोफेसर से बात की (उसी विभाग के डॉक्टर से) और पूछा कि क्या वह ये विश्वास करेंगे।' वो बोली कि 'मैं 22 साल से नर्स हूं, मैंने इतना छोटा नवजात बच्चा नहीं देखा है।' जाहिर है कि बेबी शुआन की जान बचाना मेडिकल साइंस के लिए चुनौती थी। वह 13 महीने तक अस्पताल के गहन चिकित्सा यूनिट में रही और हफ्तों तक वेंटिलेटर पर रखा गया। (पहली दोनों तस्वीर सौजन्य: नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल फेसबुक)

डॉक्टरों की सोच से भी कम वजन था
बेबी क्वेक यू अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसका वजन भी 6.3 किलो हो चुका है। उसे पिछले महीने ही अस्पताल से छुट्टी दी गई है और माना जा रहा है कि समय से पहले जन्म लेने वाले इतने कम उम्र के बच्चों में जिंदा बचने का यह एक रिकॉर्ड है। इसीलिए उसे दुनिया की सबसे छोटी बेबी कहा जा रहा है। जब यह छोटी सी बच्ची स्वस्थ होकर पहली बार अपने घर गई तब उसकी डिलिवरी में शामिल रहे डॉक्टरों ने उसके जन्म के दौरान की परिस्थितियों के बारे में बताया। नेशनल यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के नवजात विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर एनजी ने संवाददाताओं से कहा है कि शुआन के बारे में उन्होंने जो सोचा था, वह उससे भी कहीं कम वजन की पैदा हुई। वो बोले, 'हमें उम्मीद थी कि उसका वजन 400, 500 या 600 ग्राम होगा, लेकिन वह सिर्फ 212 ग्राम की निकली।'

टुकड़ों में काटकर पहनाए जाते थे डायपर
समय से 4 महीने पहले पैदा हुई बच्ची को जिंदा रखना डॉक्टरों के बहुत ही मुश्किल था। उसकी स्किन इतनी नाजुक थी कि डॉक्टर उसकी जांच नहीं कर पाते थे, उसका शरीर इतना छोटा था कि डॉक्टरों को उसके लायक ब्रीदिंग ट्यूब की तलाश मुश्किल हो गई थी और उसके केयरटेकर के लिए चुनौती डायपर को लेकर थी, जिसे काटकर पहनाना होता था, जिससे कि वह उसे फिट हो सके। एक डॉक्टर ने कहा, 'वह इतनी छोटी थी कि दवा का हिसाब भी दशमलव अंक में लगानी पड़ती थी'

माता-पिता को मिली है खास ट्रेनिंग
अस्पताल की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 'सभी बाधाओं के विपरीत, जन्म के वक्त मौजूद स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलों के बावजूद उसने अपने आसपास के लोगों को अपनी दृढ़ता और विकास से प्रेरित किया है, जो कि उसे एक असाधारण कोविड-19 बेबी बनाता है- तमाम उथल-पुथल के बीच उम्मीद की किरण।' चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। उसके माता-पिता को खास ट्रेनिंग दी गई है, जिससे कि वह घर पर भी मेडिकल उपकरणों का इस्तेमाल कर सकें, जो कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने का बाद भी इस केस में जरूरत पड़ सकती है।

2018 में अमेरिका में पैदा हुई थी 245 ग्राम की बच्ची
यूनिवर्सिटी ऑफ इओवा की टिनियेस्ट बेबीज रजिस्ट्री के मुताबिक इससे पहले जन्म के समय सबसे हल्के बच्चे का जन्म 2018 में अमेरिका में हुआ था। वह भी एक बच्ची थी, जिसका वजन जन्म के वक्त महज 245 ग्राम था। (अंतिम चारों तस्वीरें- प्रतीकात्मक)












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