स्पेस से आए ‘जीवन के पत्थर’ का एक कण पाने लाइन में क्यों लगे दुनिया के देश? दुर्लभ वैज्ञानिक प्रयोग

हायाबुसा-2 नाम के एक अंतरिक्ष यान के जरिए दिसंबर 2020 में सी-प्रकार के एक क्षुद्रग्रह रयुगु से इस पत्थर के टुकड़े के नमूने को लाया गया था और फिर जापानी शोधकर्ताओं ने पत्थर के उस सैंपल पर रिसर्च किया था

नई दिल्ली, जून 19: अंतरिक्ष के एक पत्थर से गेहूं के एक टुकड़े बराबर हिस्सा प्राप्त करने के लिए दुनिया के कई देश कतार में खड़े हैं। अंतरिक्ष के उस पत्थर को लेकर दुनियाभर से 40 वैज्ञानिक प्रस्तावों को स्वीकार किया गया है और हर कोई उस पत्थर के एक टुकड़े को हासिल करने की कोशिश कर रहा है और अभी तक 9 देशों को उस टुकड़े के लिए चुना गया है, क्योंकि अंतरिक्ष से आया वो पत्थर कोई मामूली पत्थर नहीं है, बल्कि उसे 'जीवन का पत्थर' कहा जा रहा है।

पत्थर के हैं 74 नमूने

पत्थर के हैं 74 नमूने

रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरिक्ष से आए उस पत्थर के गेहूं के दाने के बराबर 74 टुकड़े हैं और उनसभी को मिलाकर उनका वजन 230 मिलिग्राम होता है। लिहाजा, आप आसानी से समझ सकते हैं, कि वो पत्थर कितना ज्यादा रहस्यमयी और कितनी खासियतों से भरा है, कि उसे हासिल करने के लिए 9 देश मुंहमांगी कीमत देने को तैयार हैं।

दिसंबर 2020 में आया था पत्थर

दिसंबर 2020 में आया था पत्थर

हायाबुसा-2 नाम के एक अंतरिक्ष यान के जरिए दिसंबर 2020 में सी-प्रकार के एक क्षुद्रग्रह रयुगु से इस पत्थर के टुकड़े के नमूने को लाया गया था और फिर जापानी शोधकर्ताओं ने पत्थर के उस सैंपल पर रिसर्च किया था और उसकी पहचान 20 अमीनो एसिड के तौर पर की थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, अमीनो एसिड अणु होते हैं, जो प्रोटीन बनाने के लिए कैमिकल बाउंड बनाते हैं और इन्हें जीवन का निर्माण खंड माना जाता हैं। ये अणु जीवित प्राणियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं क्योंकि वे भोजन को पचाने, शरीर के विकास, शरीर के ऊतकों की मरम्मत और कई अन्य शारीरिक कार्यों को करने में मदद करते हैं। इनका उपयोग शरीर द्वारा ऊर्जा के स्रोत के रूप में भी किया जा सकता है। इसीलिए इस पत्थर को 'जीवन पत्थर' कहा जाता है।

क्षुद्रग्रह में पाए गये अमीनो एसिड

क्षुद्रग्रह में पाए गये अमीनो एसिड

ये अमीनो एसिड पहले पृथ्वी पर गिरने वाले क्षुद्रग्रहों में पाए गए हैं। हालांकि, वे मुश्किल से काफी कम मात्रा में थे, क्योंकि वे पृथ्वी के वायुमंडल के माध्यम से प्रवेश के दौरान जल गए थे और जलने के बाद प्लाज्मा का निर्माण किया था। इनमें से 20 प्रमुख अवयवों की खोज सौर मंडल के निर्माण से इन अवशेषों में कार्बनिक पदार्थों की उपस्थिति की पुष्टि करती है।

अनाज के बराबर नमूने पर बनी सहमति

अनाज के बराबर नमूने पर बनी सहमति

इस पत्थर पर रिसर्च करने के बाद, अनुसंधान टीमों को 22 अप्रैल 2022 तक एक योजनाबद्ध विश्लेषण के लिए नमूने से अनाज के टुकड़े के बराबर नमूनों के निर्माण करने और वैज्ञानिक प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया था। रयुगु नमूना अनुसंधान ओपन कॉल कमेटी ने 12 देशों के सबमिशन पर चर्चा की और 40 प्रस्तावों का चयन किया, जिसे फिर 13 जून 2022 को हायाबुसा2 नमूना आवंटन समिति द्वारा अनुमोदित किया गया।

जापान ने किया है रिसर्च

जापान ने किया है रिसर्च

जापान टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जापान के शिक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने अमीनो एसिड की खोज का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि खोजे गए अमीनो एसिड अत्यंत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे ब्रह्मांड की उत्पत्ति और अंततः जीवन को समझने में मदद करेंगे। JAXA द्वारा टोक्यो विश्वविद्यालय और हिरोशिमा विश्वविद्यालय के सहयोग से लॉन्च किया गया, हायाबुसा 2 ने नमूनों को बाहरी हवा या यहां तक कि धूप में उजागर किए बिना वितरित किया था।

इंसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण रिसर्च

विशेष रूप से, नमूनों पर पिछले अध्ययनों के परिणामस्वरूप पानी और कार्बनिक पदार्थों की खोज हुई है, जिससे यह शोध का और भी अधिक आशाजनक विषय बन गया है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष चट्टानों पर अमीनो एसिड पाया है। 2009 में, नासा ने एजेंसी के स्टारडस्ट अंतरिक्ष यान द्वारा घर लाए गए धूमकेतु वाइल्ड 2 के नमूनों पर अमीनो एसिड की उपस्थिति का पता लगाने की घोषणा की थी। डॉ कार्ल पिल्चर, जो नासा एस्ट्रोबायोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक हैं और जिन्होंने इस शोध में मदद की है, उन्होंने एक बयान में कहा कि, 'धूमकेतु में ग्लाइसिन (अमीनो एसिड का प्रकार) की खोज इस विचार का समर्थन करती है कि जीवन के मूलभूत निर्माण खंड अंतरिक्ष में प्रचलित हैं, और इस तर्क को मजबूत करते हैं कि ब्रह्मांड में जीवन दुर्लभ के बजाय सामान्य हो सकता है'।

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