WHO चीफ बोले- कोरोना की जांच में रॉ डेटा की कमी, चीन करे सहयोग
जिनेवा, 15 जुलाई: कोरोना वायरस की उत्पत्ति कब और कहां हुई, इसको लेकर अभी तक वैज्ञानिकों को कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। बस सभी अंदाजा लगा रहे कि चीन के वुहान शहर में स्थित शी फूड मार्केट में पहला मामला पाया गया। लंबे वक्त से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की टीम इस मामले में जांच कर रही है, लेकिन उसके हाथ भी कुछ नहीं लगा। इस बीच WHO प्रमुख ट्रेडोस अधनोम घेब्रेयसस ने चीन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफतौर पर कहा कि रॉ डेटा की कमी की वजह से जांच बाधित हो रही है। ऐसे में चीन को इसे और ज्यादा पारदर्शी बनाना चाहिए।

गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रेडोस ने कहा कि हम चीन से कोरोना वायरस से संबंधित पारदर्शी जांच में सहयोग का आग्रह करते हैं। अगर इस जांच के नतीजे सही आ जाते हैं, तो इससे प्रभावित करोड़ लोग चीन के आभारी रहेंगे। साथ ही उन लोगों का परिवार भी आभारी रहेगा, जिन्होंने इस वायरस की वजह से जान गंवाई। वहीं डब्ल्यूएचओ के शीर्ष आपातकालीन विशेषज्ञ माइक रयान ने बताया कि ट्रेडोस WHO के 194 सदस्य राष्ट्रों को शुक्रवार को कोरोना संबंधित जांच के दूसरे स्टेज के बारे में बताएंगे।
वहीं जर्मन स्वास्थ्य मंत्री जेन्स स्पैन ने गुरुवार को WHO चीफ से बातचीत की। साथ ही उनसे कोरोना वायरस की उत्पत्ति की जांच जारी रखने का आग्रह किया। स्पैन के मुताबिक इस मसले पर ज्यादा से ज्यादा जानकारी की जरूरत है, क्योंकि इसने लाखों जिंदगियां तबाह की हैं।
चीन गई थी टीम
WHO के नेतृत्व वाली एक टीम ने चीनी शोधकर्ताओं के साथ वुहान और उसके आसपास के इलाकों में चार हफ्ते बिताए थे। इसके बाद जारी संयुक्त रिपोर्ट में कहा गया कि चमगादड़ से ये वायरस किसी जानवर में गया होगा। इसके बाद वो वहां से इंसानों में आया होगा। वहीं अमेरिका ने चीन पर आरोप लगाया था कि वुहान की लैब में हुई घटना की वजह से कोरोना वायरस लीक हुआ। जिस पर WHO की टीम ने कहा था कि इसकी संभावनाएं बहुत ही कम हैं।












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