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सैन्य अड्डों से पूरी दुनिया को घेरना चाहता था चीन, लेकिन जिनपिंग के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का बुलबुला फूटा

दुनिया पर अपना प्रभाव स्थापित करने के लिए चीन विश्व के कई हिस्सों में गुप्त सैन्य अड्डे बनाना चाह रहा है, लेकिन अब कई देशों ने चीन को सैन्य अड्डा बनाने के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया है।

हांगकांग, दिसंबर 14: बार-बार दावे किए जा रहे हैं कि चीन दुनियाभर में सैन्य ठिकानों का निर्माण कर रहा है, या सैन्य ठिकानों के निर्माण के लिए जमीन तलाशने की कोशिश कर रहा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी तक सिर्फ चीन एक ही सैन्य ठिकाना बनाने में कामयाब हो पाया है, जबकि प्रोपेगेंडा के अलावा चीन और कुछ नहीं कर पा रहा है। लिहाजा सवाल अब ये उठ रहे हैं, कि क्या चीन को अब कोई और देश सैन्य ठिकानों के निर्माण के लिए जगह देने के लिए तैयार नहीं है? क्या चीन की विस्तारवादी नीति के खिलाफ दुनिया खड़ी हो गई है?

चीन कि विस्तारवादी नीति के खिलाफ दुनिया

चीन कि विस्तारवादी नीति के खिलाफ दुनिया

अमेरिकी रक्षा विभाग ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि, चीन "नौसेना, वायु, जमीन, साइबर और अंतरिक्ष में शक्ति प्रक्षेपण का समर्थन करने के लिए अतिरिक्त सैन्य सुविधाओं के पीछे भाग रहा है"। दरअसल, पेंटागन के अधिकारियों ने कहा है कि, बीजिंग "नौसेना, वायु और जमीन पर सैन्य ठिकानों के निर्माण के लिए और उन सैन्य ठिकानों तक रसद सामग्री पहुंचाने के लिए पहले से ही विचार और योजना बना रहा है"। चीन की सेना पीएलए के पास कम से कम 20 लाख सैनिक हैं, और वो दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य बल है, बावजूद इसके चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी देश के अंदर और देश के बाहर अलग अलग जगहों पर सैन्य ठिकानों के निर्माण के लिए हाथ-पैर मार रही है।

शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षा

शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षा

पिछले आठ सालों से ज्यादा वक्त से शी जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति हैं और उनकी महत्वाकांक्षा चीन की सेना को विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना का निर्माण करना है और शी जिनपिंग अपनी इस योजना को लेकर काफी बहिर्मुखी भी हैं। हाल के दिनों में मीडिया रिपोर्ट्स में दावे किए गये हैं कि. चीन ने इक्वेटोरियल गिनी और संयुक्त अरब अमीरात में सैन्य प्रतिष्ठानों के निर्माण पर काफी ज्यादा ध्यान केन्द्रित किया है, लेकिन अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद संयुक्त अरब अमीरात ने चीन को सैन्य ठिकाने के लिए निर्माण कार्य करने से रोक दिया है। जो चीन के लिए बहुत बड़ा झटका है, लिहाजा ज्ञात तौर पर इतना ही पता चल पाया है कि, देश के बाद चीन अब तक सिर्फ एक ही सैन्य ठिकाने का निर्माण कर पाया है।

गिनी में एकमात्र सैन्य अड्डा

गिनी में एकमात्र सैन्य अड्डा

दिसंबर की शुरुआत में, मीडिया रिपोर्टों ने कहा गया है कि, इक्वेटोरियल गिनी में चीन अपना पहला अटलांटिक सैन्य अड्डा बनाने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि, गिनी के बाटा नामक जगह पर चीन गहरे पानी में एक कॉमर्शियल बंदरगाह का निर्माण कर रहा है और उसी बंदरगाह में चोरी-छिपे चीन एक सैन्य अड्डे का निर्माण भी कर रहा है। अमेरिकी सेना के अफ्रीका कमांड के कमांडर जनरल स्टीफन टाउनसेंड ने अप्रैल में गवाही दी थी कि चीन "सबसे महत्वपूर्ण खतरा" है। उन्होंने कहा था कि, "अफ्रीका के अटलांटिक तट पर एक सैन्य रूप से उपयोगी नौसैनिक सुविधा का निर्माण हो रहा है''। उन्होंने कहा था कि, ''मैं एक बंदरगाह के बारे में बात कर रहा हूं जहां वे हथियारों के साथ फिर से हमला कर सकता है और नौसेना के जहाजों की मरम्मत कर सकता है।"

संयुक्त अरब अमीरात ने दिया झटका

संयुक्त अरब अमीरात ने दिया झटका

पिछले महीने खबर आई थी कि, संयुक्त अरब अमीरात में चीन एक सैन्य अड्डे का निर्माण कर रहा है, जिसके बाद अमेरिका की तरफ से कड़ी चेतावनी जारी की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अबू धाबी से 80 किमी उत्तर में खलीफा के कार्गो बंदरगाह पर चीन सैन्य निर्माण कर रहा था, जिसे अमेरिकी चेतावनी के बाद रोक दिया गया। ऐसे आरोप थे कि संयुक्त अरब अमीरात चीन के इरादों से अनजान था और उसे नहीं पता था कि, चीन वहां गुप्त सैन्य सुविधाएं विकसित कर रहा है। 2018 में संयुक्त अरब अमीरात और चीन ने COSCO शिपिंग पोर्ट्स अबू धाबी टर्मिनल को अपग्रेड करने के लिए USD300 मिलियन के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, यह बंदरगाह अल धफरा एयर बेस और जेबेल अली दोनों के पास स्थित है और दुबई में उत्तरार्द्ध अमेरिकी नौसेना के जहाजों के दौरे के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर सबसे व्यस्त बंदरगाह है।

क्या कंबोडिया में भी है सैन्य अड्डा?

क्या कंबोडिया में भी है सैन्य अड्डा?

रिपोर्ट के मुताबिक, कंबोडिया भी एक और संभावित स्थान है, जहां चीन द्वारा सैन्य अड्डे के निर्माण की संभावना है। सितंबर-अक्टूबर 2020 में कंबोडिया ने रीम नेवल बेस में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा वित्त पोषित दो इमारतों को ध्वस्त कर दिया था। बाद में कंबोडियाई रक्षा मंत्री टी बान ने पुष्टि करते हुए कहा कि, चीन की मदद से वो इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने में मदद कर रहा है। उन्होंने कहा था कि, ''हम एक उपयुक्त जगह विकसित करना चाहते हैं... अकेले कंबोडिया ऐसा नहीं कर सकता। यह काफी महंगा भी है, लेकिन मुझे नहीं पता कि कितना खर्च आएगा और चीन बिना किसी स्वार्थ के मदद कर रहा है।" सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज द्वारा प्रकाशित सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि, कंबोडिया में तीन इमारतों का निर्माण कार्य चीन कर रहा है और इसके साथ ही निर्माण के लिए चीन को कंबोडिया की तरफ से जमीन दी गई है। जो यह बताता है, चीन विदेशी क्षेत्रों में रणनीतिक तौर पर पैर जमाने के लिए क्या कर सकता है।

कंबोडिया और चीन में गुप्त समझौता

कंबोडिया और चीन में गुप्त समझौता

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने चीनी सेना को नौसैनिक सुविधा का उपयोग करने देने के लिए एक गुप्त 30 साल के समझौते का आरोप लगाया था। हालांकि, कंबोडियाई सरकार, जो बीजिंग की जेब में है, उसने इसका कड़ा खंडन किया है। दूसरी चिंता कोह कोंग में एक चीनी विकास है जिसमें असामान्य रूप से बड़ा हवाई अड्डा शामिल है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने 8 दिसंबर को कंबोडिया पर हथियार और दोहरे उपयोग वाली वस्तु पर प्रतिबंध लगा दिया है, भले ही यह कंबोडिया को चीन की गोद के और करीब धकेल देगा। इसके साथ ही सोलोमन द्वीप में चीनी भागीदारी को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ था। वहीं, न्यूजीलैंड के मैसी विश्वविद्यालय में डिफेंस की प्रोफेसर डॉक्टर अन्ना पॉवल्स ने एएनआई को बताया कि "स्थानीय डायनेमिक्स ने पिछले तीन सालों में ग्लोबल पॉलिटिक्स को बदल दिया है और स्थानीय चीनी विरोधी भावनाओं में भी इजाफा हुआ है।"

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