Pakistan: पाकिस्तान के दुर्दीन पर वर्ल्ड बैंक की भी मुहर, गरीबी में घुट-घुटकर मर रहा है जिन्ना का देश
आईएमएफ का कहना है, कि पाकिस्तान को अभी 3 अरब डॉलर की मदद और जुटाना है, उसके बाद ही कर्मचारी स्तर की वार्ता फाइनल हो पाएगी और उस वक्त तक डील फाइनल होने की उम्मीदें कम हैं।

Pakistan News: गंभीर आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान को लेकर वर्ल्ड बैंक की एक डराने वाली रिपोर्ट आई है, जिसमें कहा गया है, कि राजनीति और आर्थिक अव्यवस्थाओं की वजह से पाकिस्तान के गरीब खतरनाक हालातों का सामना करने को मजबूर हो सकते हैं।
वर्ल्ड बैंक की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है, कि कमजोर श्रम बाजार, हद से ज्यादा बढ़ती महंगाई, बाहरी वित्तपोषण में देरी, नीतिगत चूक और राजनीतिक अस्थिरता ने गरीबों के लिए जोखिम पैदा कर दिया है।
वर्ल्ड बैंक की पाकिस्तान को लेकर ये रिपोर्ट उस वक्त आई है, जब आईएमएफ और पाकिस्तान सरकार के बीच आईएमएफ प्रोग्राम पर बात फिर से बिगड़ गई है।
आईएमएफ ने शहबाज शरीफ के उस दावे के विपरीत बयान दिया है, जिसमें पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कहा था, कि पाकिस्तान ने आईएमएफ की सभी शर्तों को पूरा कर दिया है। लेकिन, आईएमएफ की तरफ से कहा गया, कि लोन हासिल करने के लिए पाकिस्तान ने अभी आधा रास्ता ही तय किया है।
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है, कि पाकिस्तान उच्च सामाजिक व्यय में भारी कटौती की गई है, लिहाजा लोअर मिडिल क्लास में गरीबी दर बढ़कर 37.2 प्रतिशत होने का अनुमान है।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि देश में कृषि कार्य पर निर्भरता, छोटे पैमाने पर उत्पादन कार्य और निर्माण गतिविधियों में भी कमी आई है। वहीं, जलवायु परिवर्तन को लेकर भी पाकिस्तान संवेदनशील स्थिति में है।
पाकिस्तान के बदतर होते हालात
रिपोर्ट में कहा गया है, कि पाकिस्तान में आधिकारिक प्रेषण प्रवाह (Official remittance inflows) भी 11.1 प्रतिशत तक गिर गया है, जिसकी मुख्य वजह देश में गैर-बैंकिंग चैनलों से पाकिस्तानी रुपया और डॉलर के बीच के कारोबार पर पाबंदी है। सरकार ने ये पाबंदी विदेशी मुद्रा भंडार को बचाकर रखने के लिए पिछले साल ही लगाई थी।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है, कि कुल आधिकारिक प्रेषण में किसी भी गिरावट से परिवारों की आर्थिक झटकों से निपटने की क्षमता और कम हो जाएगी, जिससे गरीबी पर दबाव बढ़ेगा।
वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कम विदेशी भंडार और उच्च मुद्रास्फीति के कारण दबाव में है। नीति को कड़ा करने, बाढ़ के प्रभाव, आयात नियंत्रण, काफी ज्यादा उधारी, ईंधन की लागत, कम आत्मविश्वास, और लंबी नीति और राजनीतिक अनिश्चितता के साथ स्थितियां खराब ही होती जाएंगी।
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, कि कुछ अनुमानित रिकवरी के बावजूद, मध्यम अवधि में वृद्धि क्षमता से कम रहने की उम्मीद है।
वर्ल्ड बैंक ने कहा है, कि आईएमएफ के साथ पाकिस्तान सरकार की कर्मचारी स्तर की बातचीत बार बार नाकाम हो रही है, लिहाजा घरेलू सुरक्षा और बाहरी आर्थिक स्थितियों में गिरावट आएगी। विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आने से देश की संप्रभु स्थिति भी कमजोर पड़ जाएगी।
पढ़ाई और स्वास्थ्य सेक्टर पर गंभीर असर
वर्ल्ड बैंक ने कहा है, कि स्थिति के गंभीर होने का परिणाम ये है, कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था भी चरमराने के कगार पर पहुंच चुकी है और पैसों की कमी की वजह से भारी संख्या में छात्र स्कूल जाने से दूर होंगे। इसके साथ ही, बच्चों को भोजन संकट का भी सामना करना पड़ेगा।
इसके अलावा पाकिस्तान भीषण कर्ज के जाल में भी फंसा हुआ है, जिससे देश की स्थिति आने वाले दिनों में और भी ज्यादा खराब होने की संभावना है। ताजा रिपोर्ट में पता चला है, कि पाकिस्तान को साल 2026 तक, यानि अगले 3 सालों में 77.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है।
यानि, जो पाकिस्तान 1.1 अरब डॉलर के कर्ज की किश्त के लिए आईएमएफ के सामने महीनों से गिड़गिड़ा रहा है और जिस पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार में पिछले कई महीनों से 3 अरब डॉलर के आसपास ही पैसे बचे हों, वो पाकिस्तान भला अरबों डॉलर का कर्ज कैसे चुकाएगा?
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पाकिस्तान को अप्रैल 2023 से जून 2026 तक 77.5 अरब अमेरीकी डालर के बाहरी ऋण का पुनर्भुगतान करना है। जिसको लेकर पिछले दिनों अमेरिकी थिंक टैंक ने चेतावनी दी थी, कि ये कर्ज चुकाना पाकिस्तान के लिए असंभव है, लिहाजा पाकिस्तान के लिए दिवालिया होना तय है।
USIP की रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2023 से जून 2026 तक पाकिस्तान को 77.5 अरब डॉलर का बाहरी कर्ज चुकाने की जरूरत है, और जिस पाकिस्तान की कुल अर्थव्यवस्था ही 350 अरब डॉलर की है, उसके लिए ये कर्ज चुकाना नामुमकिन की तरह है।
अमेकिती थिंक टैंक USIP ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि पाकिस्तान को अंतत: डिफॉल्ट होना ही होगा और ऐसी स्थिति में पाकिस्तान को 'विघटनकारी प्रभावों' को झेलना होगा।












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