दुनिया से जाते-जाते भी बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर गई मां, लोगों की मदद से जुटाए लाखों रुपये
जिंदगी से अपनी जंग हार रही एक मां भी मरने से पहले अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना चाहती थी। उसे इस बात की चिंता सताए जा रही थी कि उसके जाने के बाद बच्चों का क्या होगा। इसलिए उसने मरने से पहले कुछ ऐसा किया ताकि उसके बेटे आराम से अपनी जिंदगी जी सकें।
बैनबरी। कहते हैं न.. कि मां आखिर मां ही होती है। वो फिर अपने बच्चे के साथ रहे या उससे दूर, उनकी चिंता उसे हमेशा सताती रहती है। जिंदगी से अपनी जंग हार रही एक मां भी मरने से पहले अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना चाहती थी। उसे इस बात की चिंता सताए जा रही थी कि उसके जाने के बाद बच्चों का क्या होगा। इसलिए उसने मरने से पहले कुछ ऐसा किया ताकि उसके बेटे आराम से अपनी जिंदगी जी सकें। 34 वर्षीय सैम अपने बेटों के लिए 34 लाख रुपये जुटा के गईं हैं।

ब्रिटेन के बैनबरी की रहने वाली सैम किमी ने अपने बेटों के लिए 34 लाख रुपये जुटा कर इस दुनिया को अलविदा कहा। सैम को मोटर न्यूरॉन डिजीज थी और उनके पास जीने के लिए ज्यादा वक्त नहीं था। उन्हें अप्रैल में इस बीमारी का पता चला था और तभी से वो अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता में पड़ गईं थीं। जिंदगी में सबकुछ अपने दम पर करने वाली सैम के लिए ये काफी मुश्किल समय था। वो अपने बच्चों के लिए चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहीं थीं।
मरने से पहले वो अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना चाहती थीं। उनकी बहन पीपा ने क्राउडफंडिंग वेबसाइट पर पैसे जुटाने के बारे में सोचा और सैम को इसके लिए राजी किया। दोनों ने अपनी रिक्योस्ट डाली। उन्होंने अपनी कहानी शेयर करते हुए लिखा, 'मेरा डर ये नहीं है कि मैं मर रही हूं, बल्कि ये है कि मेरे जाने के बाद मेरे बच्चों का क्या होगा।' उनका मकसद तीन दिन में 12 लाख रुपये इकट्ठा करना था लेकिन जब समय खत्म हुआ तो दोनों हैरान रह गए।
उनकी कहानी ने कई लोगों को छुआ और लोगों ने दिल खोलकर सैम की मदद की। तीन दिन में 34 लाख रुपये इकट्ठा हो चुके थे। इन पैसों से सैम का अंतिम संस्कार, उनके बच्चों की ट्रैवल और स्कूल फीस दी जानी है। सैम चाहती थीं कि उनके बच्चे उनकी बहन पीपा के साथ ऑस्ट्रेलिया में रहें। उनका 8 साल का बेटा हैरी और 12 साल का जोई अब ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में अपनी मौसी के साथ रहेंगे। ऑस्ट्रेलिया के लिए दोनों की टिकट बैनबरी के लोकल एजेंट ने कराई है। दोनों की स्कूल फीस क्राउडफंडिंग के जरिये जुटाए गए पैसों से दी जाएगी। बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के बाद सैम ने गुरुवार को आखिरी सांसें लीं।
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