क्या धरती को निगल जाएगा सूरज? बड़ी अनहोनी की आशंका ने वैज्ञानिकों को डराया

वैज्ञानिकों के मुताबिक सूरज के कोर में मौजूद हीलियम तत्व सिकुड़ जाएगा, जिससे सूरज और ज्यादा गर्म होना शुरू हो जाएगा। इससे सूर्य का आकार 100 गुना से ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है।

वॉशिंगटन, जून 21: हमारे सौरमंडल को सूर्य से प्रकाश और ऊष्मा प्राप्त होती है और इसी वजह से पृथ्वी पर जीवन का उदय संभव हो पाया। प्राचीन काल से ही पृथ्वी के अलग अलग हिस्सों में लोग सूर्य को देवता के रूप में पूजते रहे हैं। अब वैज्ञानिकों को डर है कि आज से अरबों साल बाद सूर्य का अंत हमारी पृथ्वी को पूरी तरह से खत्म कर देगा और सौर मंडल में सबसे खराब जगह में बदल देगा। इस दौरान सूर्य का आकार इतना बढ़ जाएगा कि वह बुध, शुक्र और यहां तक कि हमारी पृथ्वी को भी खा जाएगा।

सूरज की आधी उम्र हो चुकी है खत्म

सूरज की आधी उम्र हो चुकी है खत्म

वैज्ञानिकों का मानना है कि सूर्य की वर्तमान आयु 4.6 अरब वर्ष हो गई है। जो उसके अनुमानित 10 अरब साल के जीवनकाल का लगभग आधा है। आज से इतने सालों बाद जब सूरज का हाइड्रोजन ईंधन खत्म हो जाएगा तो वह ऊर्जा पैदा करने के लिए 'भारी तत्वों' का सहारा लेगा। उस समय सूर्य का सीक्वेंस फेज खत्म हो जाएगा और फिर उस समय सूर्य के आकार में भी अजीब बदलाव देखने को मिलेंगे।

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    हीलियम कोर के सिकुड़ने से आकार में वृद्धि

    हीलियम कोर के सिकुड़ने से आकार में वृद्धि

    वैज्ञानिकों के मुताबिक सूरज के कोर में मौजूद हीलियम तत्व सिकुड़ जाएगा, जिससे सूरज और ज्यादा गर्म होना शुरू हो जाएगा। इससे सूर्य का आकार 100 गुना से ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है वैज्ञानिकों ने जताई है। ऐसे में अपनी आकार से 100 गुना ज्यादा बड़ा हो चुका हुआ सूरज हमारे सौर मंडल के बुध, शुक्र और पृथ्वी को निगल जाएगा। और अगर हमारे सौरमंडल में उस दूरी में कोई और ग्रह मौजूद है तो सूरज उसे भी निगल जाएगा और सूरज एक विशालकाय लाल तारे के तौर पर दिखाई देने लगेगा।

    सूर्य के अंदर होगें बड़े बदलाव

    सूर्य के अंदर होगें बड़े बदलाव

    आकार में इतने बड़े परिवर्तन के साथ ही सूर्य के अंदर विभिन्न प्रकार की संलयन अभिक्रियाएं (फ्यूजन रिएक्शन) शुरू हो जाएंगी। इसका बाहरी आवरण (ऑउटर सेल) हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में जलाएगा और इससे बनने वाले दूसरे उत्पाद सूर्य के अंदर कोर को ऊर्जा प्रदान करेंगे। इससे सूर्य का कोर और ज्यादा संकुचित और गर्म हो जाएगा। जब कोर 180 मिलियन डिग्री फ़ारेनहाइट यानि 100 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तो इसके परिणामस्वरूप हीलियम जलने लगता है, जिसकी वजह से कार्बन और ऑक्सीजन में फ़्यूज़ होना शुरू हो जाएगा।

    जीवन के आखिरी चरण में सूरज

    जीवन के आखिरी चरण में सूरज

    सूरज के अंदर आने वाली तमाम परिवर्तन की वजह से हमारा सूरज कुछ मिलियन सालों तक लगातार सिकुड़ता रहेगा, लेकिन बाद में यह फिर से 10 करोड़ सालों तक फैल जाएगा। जब इसके मूल का हीलियम विलुप्त होने के कगार पर पहुंच जाएगा, तो सूर्य की चमक और बढ़ जाएगी। उस दौरान बाहर की ओर बहने वाली तारकीय हवा (स्टेलर विंड) सूर्य के बाहरी आवरण (ऑउटर कोर) को हटा देगी, जिसकी वजह से सूरज अपनी जिंदगी के आखिरी चरण में पहुंच जाएगा।

    कई ग्रह जलकर हो जाएंगे खाक

    कई ग्रह जलकर हो जाएंगे खाक

    नासा के विज्ञान मिशन निदेशालय के खगोलविद एस. एलन स्टर्न का कहना है कि, अपनी आकार से काफी ज्यादा बड़ा हो चुका सूरज हमारे सौर मंडल के कई ग्रहों को जलाकर राख कर देगा। पूरे सौरमंडल में जहां कहीं भी पानी या बर्फ मौजूद है, सब कुछ पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। सूरज से ज्ञात सबसे दूर मौजूद प्लूटो ग्रह, जहां का तापमान हमेशा माइनस में रहता है, वह भी उष्णकटिबंधीय समुद्र तट के तापमान जितना ही गर्म हो जाएगा।

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