यूक्रेन युद्ध में इज्जत भी बचा पाएंगे राष्ट्रपति पुतिन? युद्ध के 56वें दिन उखड़ रहे रूसी सैनिकों के पैर

यूक्रेनी सैनिकों कई बार की कोशिशों के बाद रूसी सेना की अग्रिम पंक्ति को तोड़ दिया है और ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि, रूसी सैनिकों के पास रसद आपूर्ति नहीं हो पा रही हैं।

मॉस्को/कीव, अप्रैल 20: रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर आक्रमण किया था और यूक्रेन पर हमला हुए अब करीब 2 महीने पूरे होने वाले हैं, लेकिन रूस की सेना अब पूरी तरह से राजधानी कीव और उत्तरी यूक्रेन से बेलारूस और रूस में वापस आ गई है। यूक्रेन के उत्तर से अपनी वापसी के बाद रूस ने अपना पूरा फोकस पूर्वी यूक्रेन के डोनबास और मारियुपोल शहर पर कर रखा है, जो रणनीतिक लिहाज से काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हैं और माना जा रहा है कि, मारियुपोल और डोनबास को यूक्रेन से अलग करते ही ये लड़ाई खत्म हो जाएगी, लेकिन क्या वाकई ये लड़ाई जल्द खत्म होने वाली है और क्या सचमुच पुतिन इस जंग को जीत भी पाएंगे? इन सवालों के जवाब युद्ध के 56वें दिन की स्थिति को समझकर आसानी से लगाई जा सकती है।

अब बदल चुका है रूस का टारगेट

अब बदल चुका है रूस का टारगेट

रूसी अधिकारियों ने कहा है कि उनकी सेना का ध्यान अब डोनबास की "पूर्ण आजादी" पर है, जो मोटे तौर पर यूक्रेन के डोनेट्स्क और लुहान्स्क के पूर्वी क्षेत्रों को संदर्भित करता है, जहां रूस समर्थित अलगाववादियों ने आक्रमण से पहले ही यूक्रेन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और इम दोनों क्षेत्रों की आजादी की घोषणा करने के बाद ही रूस ने यूक्रेन पर हमला किया है। रूस ने हाल के हफ्तों में डोनबास क्षेत्र में अपने सैनिकों की संख्या में काफी वृद्धि की है और सैटेलाइट तस्वीरों में यूक्रेन की सीमा पर रूसी सैनिकों और उनके वाहनों के काफिले को दिखाया गया है। जबकि दोनों पक्ष 300 मील के मोर्चे पर युद्ध में घिरे हुए हैं।

मरिंका शहर वापस यूक्रेन के पास

मरिंका शहर वापस यूक्रेन के पास

यूक्रेनी सैनिकों कई बार की कोशिशों के बाद रूसी सेना की अग्रिम पंक्ति को तोड़ दिया है और ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि, रूसी सैनिकों के पास रसद आपूर्ति नहीं हो पा रही हैं। यूक्रेन ने दावा किया है कि उसने डोनेट्स्क के पास मरिंका शहर को वापस ले लिया है। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) का कहना है कि रूस भले ही इज़ियम से डोनेट्स्क तक यूक्रेनी सेना को घेरने का प्रयास कर रहा हो, लेकिन जिस "जल्दी" के साथ आक्रामक शुरू किया गया था, वह इसकी सफलता को खतरे में डाल सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि रूसी सेना आने वाले दिनों में जमीनी आक्रामक अभियानों के पैमाने को बढ़ा सकती है।

दक्षिणी यूक्रेन में रूस की धीमी चाल

दक्षिणी यूक्रेन में रूस की धीमी चाल

रूसी सेना ने युद्ध के शुरूआती दिनों में दक्षिणी यूक्रेन में लगातार कामयाबी हासिल की थी और रूसी सेना के मुख्य उद्येश्य क्रीमिया के बीच एक भूमि गलियारे का निर्माण था, जिसे उसने 2014 में कब्जा कर लिया था, और जो डोनेट्स्क और लुहान्स्क में रूसी समर्थित अलगाववादियों द्वारा आयोजित क्षेत्रों में आता है। रूस चाहता है कि, डोनेट्स्क और लुहान्स्क को क्रीमिया की तरह ही अलग कर दे और तीनों को एक साथ मिलाकर एक अलग देश का निर्माण कर दें, जो रूस का विश्वासपात्र हो और रूस को अगर अपने इस उद्येश्य को पूरा करना है, तो फिर उसे यूक्रेन के एकमात्र बंदरगाह वाले शहर मारियुपोल पर कब्जा करना होगा, जहां रूसी सैनिक लगातार लड़ाई लड़ रहे हैं।

मारियुपोल पर कब्जे की लड़ाई

मारियुपोल पर कब्जे की लड़ाई

मारियुपोल पर अंतिम विजय पताखा फहराना अभी रूस के लिए बाकी है और खंडहर में तब्दील हो चुके मारियुपोल शहर में जब तक रूसी सैनिक एक बर्बाद हो चुके औद्योगिक इलाके को पार नहीं कर लेते हैं, वो मारियुपोल की जंग में विजेता नहीं माने जाएंगे। यानि, अभी अंतिम लड़ाई बाकी है। अजोव सागर के किनारे बसे मारियुपोल शहर के यूक्रेनी रक्षकों ने रूस के सामने हथियार डालने से इनकार कर दिया है और साफ कहा है, जान जाने के बाद भी हाथों से हथियार गिरेंगे। मारियुपोल शहर की स्थिति ये है, कि रूस को भीषण मुंहतोड़ जवाब देने के बाद भी यूक्रेनी सैनिकों के लिए जीत मुश्किल नजर आ रहा है और कई चश्मदीद जर्मनिस्टों ने लिखा है, कि मारियुपोल में युद्ध नारकीय है और ऐसा युद्ध जर्मनी की हिटलर सेना की वजह से ही शायद आखिरी बार लड़ी गई होगी।

यूक्रेनी सेना ने उत्तरी हिस्सा छीना

यूक्रेनी सेना ने उत्तरी हिस्सा छीना

वहीं, उत्तरी यूक्रेन पर एक बार फिर से यूक्रेनी सेना का कब्जा हो गया है और उत्तरी यूक्रेन से रूसी सैनिक वापस लौट गये हैं। हालांकि, जब उत्तरी यूक्रेन से रूसी सैनिकों ने हटना शुरू किया, बेहद खौफनाक तस्वीरों का आना शुरू हो गया। बूचा शहर में दर्जनों सामूहिक कब्र मिले हैं, जहां रूसी सैनिकों ने सैकड़ों यूक्रेनी आम नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया था। वहीं, उत्तरी यूक्रेन में रूसी सैनिकों पर नाबालिग बच्चियों और महिलाओं से बलात्कार के भी आरोप लगे। रूसी सैनिकों की वापसी के बाद अमेरिका और ब्रिटेन ने पुतिन को सीधे तौर पर युद्ध अपराधी ठहकाया तो यूक्रेनी गांवों से विनाशक तस्वीरों का सामने आना शुरू हो गया।

बौखलाए रूस ने दिया अल्टीमेटम

बौखलाए रूस ने दिया अल्टीमेटम

रूस ने मंगलवार को यूक्रेनी सैनिकों से "तुरंत हथियार डालने" को कहा था और बंदरगाह वाले शहर मारियुपोल में मौजूद यूक्रेनी सैनिकों को लड़ाई छोड़कर फौरन अपने हथियार डालने की चेतावनी दी थी। रूसी रक्षा मंत्रालय ने यूक्रेन की राजधानी कीव को सीधे तौर पर संबोधित किया था और कहा था, कि, 'यूक्रेन अपने सैनिकों को फौरन हथियार डालने को कहें और बेमतलब का प्रतिरोध दिखाना बंद करें'। रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा था, कि चंद घंटों में अगर यूक्रेनी सैनिक हथियार डाल देते हैं, तो रूस उनकी जान बख्शने की गारंटी ले रहा है अन्यथा अंजाम बहुत बुरे होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी रक्षा मंत्रालय ने स्थानीय समयानुसार मंगवलार शाम का वक्त दिया था, लेकिन यूक्रेनी सैनिकों ने रूसी धमकी को खारिज कर दिया है।

पुतिन के लिए इज्जत की लड़ाई?

पुतिन के लिए इज्जत की लड़ाई?

मारियुपोल शहर यूक्रेन का बंदरगाह शहर है, जहां पर पिछले कई हफ्तों से कब्जा करने की कोशिश में रूसी सैनिक लगे हुए हैं, लेकिन यूक्रेनी सैनिकों ने उन्हें रोक रखा है। पिछले हफ्ते भी रूसी सैनिकों ने दावा किया था, कि मारियुपोल पर रूस का नियंत्रण स्थापित हो गया है, लेकिन बाद में रूसी दावा गलत निकला था। लिहाजा, माना जा रहा है, कि यूक्रेन की सैनिकों ने जिस तरह से रूसी सैनिकों का डटकर मुकाबला किया है और जिस तरह से यूक्रेन ने मिसाइल हमले में रूसी जहाज को उड़ाया है, उससे रूस विचलित हो गया है और अब आखिरी लड़ाई के मूड में आ चुका है। वहीं, एक्सपर्ट्स का मानना है कि, पुतिन को अब तक इस लड़ाई से कुछ भी हासिल नहीं हुआ है और उल्टा रूस की अर्थव्यवस्था जरूर तबाह होने लगी है, लिहाजा अब पुतिन अपनी इज्जत बचाने लिए कोई भी विनाशक कदम उठा सकते हैं।

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