क्या ताइवान पर आक्रमण करेगा चीन? शी जिनपिंग में है व्लादिमीर पुतिन जितनी औकात?

क्या चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ताइवान में समुद्र या हवाई मार्ग से दसियों हज़ार सैनिकों को भेजने के लिए आवश्यक क्षमताओं में महारत हासिल करने के कितने करीब है?

बीजिंग, अगस्त 03: यूएस हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद चीन और अमेरिका के संबंध तो काफी ज्यादा तनावपूर्ण हो ही गई हैं, बल्कि अटकलें लगाई जा रही हैं, कि चीन ताइवान पर हमला कर सकता है। वहीं, चीन ने ताइवान के करीबी समुद्र सीमा में भीषण सैन्य अभ्यास करना शुरू कर दिया है, जिसको लेकर ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि, कि इसमें कोई संदेह नहीं है, कि चीन क्या संदेश भेजना चाह रहा है, कि वे "कि वे शांतिपूर्ण साधनों के बजाय ताकत का इस्तेमाल कर एक क्रॉस-स्ट्रेट समाधान चाहते हैं।" यानि, ताइवान को भी चीनी आक्रमण का डर है, लेकिन क्या शी जिनपिंग में रूसी राष्ट्रपति पुतिन जितनी हिम्मत है, कि वो ताइवान पर चढ़ाई कर दे?

बलपूर्वक ताइवान पर कब्जा करने की ताकत है?

बलपूर्वक ताइवान पर कब्जा करने की ताकत है?

चीन के नेता शी जिनपिंग के शासनकाल में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी उस प्वाइंट तक एडवांस हो चुकी है, जहां से वो ताइवान पर आक्रमण करते हुए अपने सैन्य अभियान को तेजी से चलाते हुए ताइवान पर कब्जा कर सकता है और शी जिनपिंग की बातों में इस बात के संकेत कई बार मिल भी चुके हैं। फिर भी विशेषज्ञ और अधिकारी, जो चीन की सेना और चीन की राजनीति पर नजर गड़ाए रहते हैं, वो इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते हैं कि, वे ताकतें ताइवान पर आक्रमण करने के लिए कितनी तैयार हैं और शी जिनपिंग किस तरह से ये जुआ खेल सकते हैं, खासकर यूक्रेन युद्ध में जो रूस का अंजाम हुआ है, उसे देखते हुए।

युद्ध हुआ तो खून-खराबा मचना तय

युद्ध हुआ तो खून-खराबा मचना तय

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के फ्रीमैन स्पोगली इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के साथी ओरियाना स्काईलार मास्ट्रो ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि, "जब लोग इस बारे में बात करते हैं कि चीन ऐसा कर सकता है या नहीं, तो वे वास्तव में कुछ अलग बात कर रहे हैं, इस ऑपरेशन में काफी ज्यादा लागत है, जहांजों का नुकसान है, लोग मरेंगे और इन सब चीजों के लिए चीन को भुगतान करना होगा लिहाजा, अमेरिकी नीति निर्माता बल प्रयोग के लिए चीन की तत्परता को कम आंक सकते हैं'। उन्होंने कहा कि, 'चीन ऐसा कर सकता था, लेकिन अगर ताइवान को बचाने के लिए अमेरिका आता है, तो फिर इसका मतलब है, कि काफी खून खराबा होने वाला है'। 1979 में यूएस कांग्रेस ने एक प्रस्ताव पास किया था, जिसके मुताबिक अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है, लेकिन, राष्ट्रपति ऐसा कदम उठाने के लिए बाध्य नहीं हैं।

...तो फिर क्या चीन भेज सकता है सेना

...तो फिर क्या चीन भेज सकता है सेना

ऐसे में एक महत्वपूर्ण सवाल ये है, कि क्या चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ताइवान में समुद्र या हवाई मार्ग से दसियों हज़ार सैनिकों को भेजने के लिए आवश्यक क्षमताओं में महारत हासिल करने के कितने करीब है? ताइवान द्वीप पर कब्जा जमाना, वहां पैर जमाना, वहां के बंदरगाहों, रेलवे स्टेशों और हवाई अड्डों पर नियंत्रण स्थापित करना और ताइवान के सुरक्षाबलों को कंट्रोल करना और उन्हें निष्क्रीय करना क्या चीन के लिए इतना आसान होगा? पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना पर पेंटागन की 2021 की वार्षिक रिपोर्ट में इसपर बात की गई है। जिसमें कहा गया है, चीन ने जहाजों की संख्या बढ़ाकर दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना का निर्माण किया है, लेकिन उसके बाद भी ताइवान पर आक्रमण करना उसकी सेना के लिए तनाव पैदा करेगा, क्योंकि ऐसी स्थिति में चीन पर काफी ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय दबाव होगा। पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है, कि भले ही चीनी सेनाओं ने ताइवान पर हमले की पूरी तैयारी कर ली हो, बावजूद इसके चीनी सेना के लिए शहरी लड़ाई लड़ना और पूरे ताइवान पर कब्जा करना सैन्य और राजनीतिक तौर पर शी जिनपिंग के शासन के लिए आसान नहीं होगा।

चीन की थल सेना में क्षमता का अभाव

चीन की थल सेना में क्षमता का अभाव

यूक्रेन में जिस तरह से रूस की सेना पस्त हुई है, उसने चीन को आक्रमण करने से पहले सौ बार सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। यू.एस. नेवल वॉर कॉलेज के अध्ययन के अलावा हाल ही में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल डेनिस जे ब्लास्को ने एक अध्ययन में लिखा है कि चीन की थल सेना में अभी भी पूरे द्वीप को कंट्रोल करने के लिए आवश्यक उपकरणों और कौशल क्षमता का भारी अभाव है। चीन के उभयचर बलों के पास अभी भी इतने बड़े ऑपरेशन को चलाने के लिए दक्षता का अभाव है, लिहाजा चीन के लिए ताइवान पर आक्रमण करना इतना आसान नहीं है, जितना चीन दावा करता है।

अमेरिका जरूर पहुंचाएगा सैन्य मदद

अमेरिका जरूर पहुंचाएगा सैन्य मदद

इसके अलावा अगर अमेरिका यूक्रेन की तरह ही ताइवान को भी सैन्य मदद पहुंचाता है, जो वो जरूर करेगा, तो फिर चीन के लिए ये लड़ाई कतई आसान नहीं होगी, क्योंकि चीन के लिए मुद्दा सिर्फ ताइवान ही नहीं है, बल्कि ऐसा करने से चीन काफी कमजोर होगा और उसके बगल में एक और महाशक्ति भारत है, जिसके साथ चीन बुरी तरह से सीमा विवाद में उलझा हुआ है। वहीं, चीन को अपनी अर्थव्यवस्था के चौपट होने का भी डर है, जिसकी वजह से देश में विद्रोह की स्थिति पैदा हो सकती है, क्योंकि वहां लोकतंत्र नहीं है। इसमें कोई शक नहीं है कि चीन की सेना अपने युद्ध कौशल में सुधार कर रही है, लेकिन ताइवान भी बचाव की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

कैसे चेहरा बचाएंगे शी जिनपिंग?

कैसे चेहरा बचाएंगे शी जिनपिंग?

चीन की सख्ततम चेतावनी के बाद भी नैन्सी पेलोसी ने ताइवान का दौरा किया है, लिहाजा अब सवाल ये है, कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने देश की जनता को क्या जबाव देंगे? सोमवार को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की स्थापना की 95वीं वर्षगांठ पर शी जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को साल 2027 तक आधुनिकीकरण पूरा करने पर जोर दिया है और अमेरिका के रिटायर्ड एडमिरल फिल डेविडसन, जो पैसिफिक कमांड थे, उन्होंने रिटायर्ड होने से पहले सीनेट कमेटी को यह बताकर नई बहस छेड़ दी है, कि चीन साल 2027 तक ताइवान पर आक्रमण कर सकता है। यानि आकलन अलग अलग हैं और सबकुछ अब शी जिनपिंग पर निर्भर करता है, कि चीन में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले क्या वो ताइवान पर आक्रमण करने के लिए राष्ट्रपति पुतिन जितनी औकात रखते हैं या नहीं?

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