India-US Ties: पीएम मोदी के अमेरिका का राजकीय दौरा क्यों होगा ऐतिहासिक? जियो-पॉलिटिक्स का नया अध्याय
PM मोदी के दौरे का कार्यक्रम भारत में होने वाले कई कार्यक्रम, जैसे एससीओ की बैठक, कर्नाटक चुनाव की वजह से तय नहीं हो रहा था। इसके अलावा पीएम मोदी इसी महीने ऑस्ट्रेलिया भी जाने वाले हैं।

PM Modi US Visit: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिका दौरा की घोषणा हो गई है और पीएम मोदी का ये दौरा, पिछले कई दौरों से काफी अलग है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इस बार पीएम मोदी, अमेरिका के राजकीय मेहमान बनकर जा रहे हैं।
बाइडेन प्रशासन के आने के बाद पीएम मोदी तीसरे ऐसे वैश्विक नेता है, जो अमेरिका में राजकीय मेहमान बनकर जाएंगे। हालांकि, पीएम मोदी को न्योता पिछले कई महीनों से मिल रहा था, लेकिन दोनों नेताओं की व्यस्तता के चलते ये कार्यक्रम की तारीख तय नहीं हो पा रही थी।
हालांकि, अब व्हाइट हाउस ने घोषणा कर दी है, कि पीएम मोदी 22 जून को अमेरिका जाएंगे, जहां राष्ट्रपति जो बाइडेन उनकी मेजबानी करेंगे और पीएम मोदी के सम्मान में राजकीय भोज का भी आयोजन किया गया है। भारत के राजनयिकों का मानना है, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा 'ऐतिहासिक' है और यह इस बात को रेखांकित करेगी, कि दोनों देशों के बीच साझेदारी जन-केंद्रित, जन-प्रेरित है और दुनिया के लिए काफी अच्छी है।
पीएम मोदी के दौरे को लेकर अमेरिका ने कहा है, कि "पीएम मोदी की आगामी यात्रा अमेरिका और भारत के बीच गहरी और करीबी साझेदारी और परिवारों और दोस्ती के गर्म बंधन की पुष्टि करेगी, जो अमेरिकियों और भारतीयों को एक साथ जोड़ती है।"
अमेरिका के लिए भारत कितना अहम?
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन खुद कह चुके हैं, कि वो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के साथ संबंधों को गहरा करने के लिए काफी उत्सुक हैं और उनका मानना है, कि दुनिया की निरंकुश सत्तावादी ताकतें, खासकर चीन के खिलाफ और निरंकुश समाजों के खिलाफ चल रहे प्रतियोगिता को जीतने के लिए अमेरिका को निश्चित तौर पर भारत का साथ चाहिए।
भारत अब दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन गया है और इसी साल दोनों देशों के बीच सैन्य उपकरण, सेमिकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर संबंधों को गहरा करने के लिए साझेदारी की शुरूआत की गई है।
वहीं, भारत इस साल जी20 शिखर सम्मेलन की भी मेजबानी कर रहा है, लिहाजा अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन इस साल सितंबर मबीने में नई दिल्ली की यात्रा करने वाले हैं। वहीं, इस दौरान भारत में क्वाड देशों की बैठक भी होगी, जिसमें जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री भी शामिल होंगे।
इसी साल जनवरी में अमेरिका के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा था, कि "राष्ट्रपति बाइडेन का मानना है, कि दुनिया की दो प्रमुख ज्ञान अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, भारत और अमेरिका के बीच की साझेदारी काफी आवश्यक है।
उनका (बाइडेन) मानना है, कि आज दुनिया जिन बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है, उनमें से किसी भी बड़ी चुनौती से निपटने के लिए कोई भी अकेले सफल और स्थायी प्रयास नहीं कर सकता, चाहे खाद्य या ऊर्जा या स्वास्थ्य सुरक्षा, जलवायु संकट, या एक मुक्त और खुले इंडो- पैसिफिक को बनाए रखने की बात कर रहे हों"। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने वाशिंगटन में भारतीय पत्रकारों के एक समूह को बताया, कि इन सभी मुद्दो पर "अमेरिका-भारत साझेदारी के बिना काम हो, ये संभव नहीं है।"
भारत-अमेरिका बनाम चीन
भारत फिलहाल विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन कुछ सालों में ही ये तीसरे नंबर पर आ जाएगा, ये बात सब जानते हैं। लिहाजा, अमेरिका और भारत की साझेदारी कई मायनों में अहम है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले साल टोक्यो में अमेरिका-भारत संबंध को विश्वास की साझेदारी और अच्छी वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक ताकत के रूप में वर्णित किया था। वहीं, अमेरिकी अधिकारी ने कहा, कि "अमेरिका वास्तव में मानता है, कि वैश्विक शक्ति के रूप में भारत के उदय का समर्थन करना हमारे रणनीतिक हित में है।
अमेरिकी अधिकारी ने कहा, कि हम इसे क्वाड और जी-20 में भारत की अध्यक्षता दोनों में इसे देखते हैं। यह इस सुसंगत यूएस-इंडो पैसिफिक रणनीति की एक बड़ी दृष्टि का वर्णन करता है, जिसके लिए आवश्यक है कि अमेरिका और भारत दोनों एक साथ आएं और ऐसा करने के लिए लंबे समय से चली आ रही बाधाओं को दूर करें।
आपको बता दें, कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पिछले साल दिसंबर में अपने पहले राजकीय रात्रिभोज के लिए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रॉन की मेजबानी की थी, वहीं पिछले महीने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति राजकीय अतिथि बनकर अमेरिका गये थे और अब पीएम मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा होने वाली है।












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