पाकिस्तान को पहली बार UAE ने कसकर फटकारा, अल्पसंख्यकों को लेकर क्यों गुस्से में आया भारत का दोस्त?

UAE condemns burning of churches in Pakistan: पाकिस्तान को दिवालिया होने से बार बार बचाने वाले संयुक्त अरब अमीरात ने पिछले हफ्ते अल्पसंख्यकों पर हुए हमले को लेकर पाकिस्तान को कसकर फटकार लगाई है। संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को कहा है, कि वो अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए कदम उठाए और कट्टरपंथ ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करे।

ये पहली बार ही है, जब संयुक्त अरब अमीरात अल्पसंख्यको के खिलाफ हुई हिंसा को लेकर इतनी बुरी तरह से भड़का है, लिहाजा यूएई के गुस्से के कई मायने निकाले जा रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक प्रेस बयान में कहा है, कि संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान में चरमपंथियों द्वारा कई चर्चों और दर्जनों घरों को जलाने की कड़ी निंदा की है और साथ ही, ईसाई समुदाय के खिलाफ की गई हिंसा की भी निंदा की है।

UAE condemns burning of churches in Pakistan

एक तरफ भारी निवेश, फिर गु्सा क्यों?

संयुक्त अरब अमीरात ने उस वक्त पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की है, जब वो खुद पाकिस्तान को भारी- भरकम कर्ज के साथ साथ पाकिस्तान के बंदरगाहों में निवेश कर रहा है।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब ने इस साल पाकिस्तान में निवेश की गति तेज कर दी है। अगर अबू धाबी पाकिस्तान में और निवेश करने का फैसला करता है, तो इसकी काफी संभावना है, कि रियाद भी अपनी आने वाले वक्त में पाकिस्तान में और निवेश करेगा।

अपनी बीमार अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए पाकिस्तान ने पिछसे दिनों स्पेशल इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन काउंसल (SIFC) का गठन किया है, जिसका मुख्य मकसद पाकिस्तान के 28 हाई लेवल प्रोजेक्ट्स में अपने मित्र देशों को अरबों डॉलर के निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है और पाकिस्तान को उम्मीद है, कि सऊदी अरब, यूएई, कतर और बहरीन जैसे देश, पाकिस्तान में निवेश कर सकते हैं।

लेकिन, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर जिस तरह से हमले हो रहे हैं, उसने मित्र देशों को इसलिए चिंतित कर दिया है, क्योंकि इस बार पांच चर्च जलाने के बाद पाकिस्तान, पश्चिमी देशों के सख्त निशाने पर है।

संयुक्त अरब अमीरात पहले भी पाकिस्तान में निवेश कर चुका है और इस तरह के संकेत मिल रहे हैं, कि चर्च जलाने के बाद यूरोप, पाकिस्तान के खिलाफ आने वाले दिनों में कुछ कड़े उठा सकता है, लिहाजा सऊदी अरब की कोशिश ये भी है, कि पाकिस्तान को लेकर वो यूरोप के साथ रिश्ते को दांव पर नहीं लगाए।

संयुक्त अरब अमीरात के एडी पोर्ट्स ग्रुप ने जून में कराची बंदरगाह पर चार बर्थ 50 साल के लिए लगभग 220 मिलियन डॉलर देकर पट्टे पर लिया है। कुछ ही हफ्तों बाद, अबू धाबी ने पाकिस्तान से दूसरे प्रमुख बंदरगाह टर्मिनल सौदे पर हस्ताक्षर किए। परिणामस्वरूप, पाकिस्तान पूर्वी घाट का लगभग 85% संयुक्त अरब अमीरात कंपनी द्वारा नियंत्रित किया जाएगा।

लिहाजा, यूएई नहीं चाहता है, कि आने दिनों में अगर पाकिस्तान के खिलाफ यूरोपीय देश प्रतिबंध लगाए, वो उसके घर तक इस प्रतिबंध की आंच पहुंचे, लिहाजा और निवेश करने से पहले पहले वो पाकिस्तान को नसीहत दे रहा है।

पाकिस्तान के खराब हैं आर्थिक हालात

पिछले महीने आईएमएफ ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का कर्ज देने का ऐलान किया, जिसके बाद पाकिस्तान 'चार दिन की चांदनी' वाले फेज में आ गया है। पाकिस्तानी शेयर बाजार में उछाल आ गया है, तो पाकिस्तानी रुपया भी अचानक डॉलर के मुकाबले अच्छा करने लगा है। वहीं, तत्कालीन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इतने उत्साहित थे, कि उन्होंने ये तक कह दिया, कि 'खुदा करे, ये आखिरी आईएमएफ लोन हो।'

लेकिन, पाकिस्तान की हालत इस लोन के बाद भी खराब और पिछले महीने अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां फिच और मूडीज़ का मानना है, कि पाकिस्तान में चार दिनों की चांदनी के बाद फिर से अंधेरी रात हो जाएगी। फिच रेटिंग्स और मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने पिछले महीने पाकिस्तान की वित्तीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरों की चेतावनी दी है। लिहाजा, पाकिस्तान की मदद के लिए संयुक्त अरब अमीरात आया है।

लेकिन, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब अब बदलती दुनिया के हिसाब से अपनी छवि को लेकर काफी सतर्क हैं और वो नहीं चाहते, कि पाकिस्तान में कट्टरपंथी ताकतों के वर्चस्व के बीच, उनके निवेश के लिए उनकी आलोचना की जाए, लिहाजा संयुक्त अरब अमीरात की ये आलोचना, पाकिस्तान की परेशानी बढ़ाने वाली है और एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अगर पाकिस्तान नहीं सुधरता है, तो ये देश मदद करने से हाथ भी पीछे खींच सकते हैं।

दूसरी तरफ, यूएई और भारत काफी मजबूत पार्टनर्स बन चुके हैं और दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार भी शुरू हो चुका है, और भारत, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे वर्ताव को लेकर यूएई से बात करता रहा है और अब यूएई का बदलता रूख इस बात को दर्शाता है, कि यूएई, भारत की बातों को मान रहा है।

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