आर्थिक संकट से पाकिस्तान को क्यों बार-बार बचा लेती है दुनिया, श्रीलंका को डूबता हुआ क्यों छोड़ दिया?
अगर वास्तविक हालात की तरफ देखें, तो जो स्थिति फिलहाल श्रीलंका की है, वैसी स्थिति पाकिस्तान की सालों पहले हो जानी चाहिए थी। श्रीलंका की अर्थ व्यवस्था टूट चुकी है और पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था पहले ही टूट जानी चाहिए थी।
कोलंबो/इस्लामाबाद, जुलाई 24: आंकड़ों के नजरिए से ही देखें, तो पाकिस्तान की हालत पिछले कई सालों से श्रीलंका के मुकाबले काफी ज्यादा खराब रही है, लेकिन ऐसी क्या वजह है, कि दुनिया बार बार पाकिस्तान को बचाने के लिए सामने आ जाती है, पाकिस्तान के लिए बेल ऑउट पैकेज का ऐलान कर दिया जाता है, लेकिन श्रीलंका को सिसकते हुए सबने छोड़ दिया है, सिवाय भारत के। श्रीलंका के लिए अभी तक किसी भी देश ने बेलऑउट पैकेज नहीं दिया है। बेलऑउट पैकेज तो बहुत दूर की बात है, भारत के अलावा अभी तक किसी भी देश ने श्रीलंका को मानवीय मदद भी नहीं भेजी है और खुद श्रीलंका के प्रधानमंत्री कह चुके हैं, कि भारत के अलावा किसी और देश से मदद नहीं मिल रही है। तो फिर इसके पीछे की क्या वजह है?

पाकिस्तान, श्रीलंका पर अलग अलग रूख क्यों?
पाकिस्तान एक बार फिर से फंसा हुआ है और आईएमएफ बेलऑउट पैकेज के लिए आखिरकार उसकी आईएमएफ के साथ बात बनने के कगार पर आ चुकी है। लेकिन, श्रीलंका के साथ ऐसा नहीं हुआ। फिलहाल मौजूदा स्थिति ये है, कि कई और देश तेजी से श्रीलंका होने की तरफ बढ़ रहे हैं और पाकिस्तान उनमें से एक है। आर्थिक संकट पाकिस्तान को वैसे ही डरा रहा है जैसे उसने श्रीलंका में किया है। लेकिन, विशेषज्ञ पिछले कई सालों से पाकिस्तान के दिवालिया होने की भविष्यवाणी कर रहे हैं। पाकिस्तान लंबे समय से विदेशी मुद्रा संकट का सामना कर रहा है। और आपको जानकर हैरानी होगी, कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष यानि आईएमएफ पाकिस्तान को इस बार 13वीं बार बेलऑउट पैकेज देने जा रहा है, ताकि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार खत्म ना हो और पाकिस्तान जिस आर्थिक भंवर में फंसा हुआ है, उससे बाहर आ जाए। यानि, पाकिस्तान को बचाने की कोशिश की जा रही है।

श्रीलंका बनाम पाकिस्तान... वास्तविक हालात
अगर वास्तविक हालात की तरफ देखें, तो जो स्थिति फिलहाल श्रीलंका की है, वैसी स्थिति पाकिस्तान की सालों पहले हो जानी चाहिए थी। श्रीलंका की अर्थ व्यवस्था टूट चुकी है और पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को भी अगर पिछले महीने चीन, सऊदी अरब और यूएई से पैसे नहीं मिलते, तो पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था भी ध्वस्त हो चुकी होती। विशेषज्ञों का कहना है, कि पाकिस्तान के मुकाबले श्रीलंका अभी भी काफी बेहतर हालात में है और पाकिस्तान के पास जो करीब आठ अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बचा है, वो भी कर्ज के ही पैसे हैं। मौजूदा स्थिति ये है, कि पाकिस्तान के पास महज दो हफ्तों के लिए ही जरूरत का सामान खरीदने के लिए पैसे बचे हैं, लेकिन इसी बीच आईएमएफ ने पिछले 30 साल में 13वें बेलऑउट पैकेज का ऐलान कर दिया है, जबकि, श्रीलंका आईएमएफ के साथ निगोशिएशन करने में पूरी तरह से नाकामयाब रहा है। आपको बता दें कि, साल 1991 के आर्थिक संकट के बाद भारत ने भी आईएमएफ से बेलऑउट पैकेज लिया था, लेकिन उसके बाद से हमने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

पाकिस्तान की स्थिति श्रीलंका से ज्यादा खराब
आर्थिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब पांच साल पहले तक श्रीलंका के आर्थिक हालात को देखकर कोई सोच भी नहीं सकता था, कि उसकी स्थिति ये हो जाएगी। श्रीलंका का विकास दर भी अच्छा था और आर्थिक हालात भी अच्छे थे। हंगर इंडेक्स, जीडीपी इंडेक्स और हैप्पीनेस इंडेक्स में भी श्रीलंका भारत के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रहा था। साल 2018 में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कहा था, कि साउथ एशिया में अब भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान के बाद सबसे ज्यादा खराब है। उन्होंने तमाम सोशल-इकोनॉमिक इंडिकेटर्स के आधार पर पाकिस्तान के बाद भारत को रखा था और कुछ एक्सपर्ट्स से भारत को श्रीलंका से सीखने की सलाह दी थी।

सबसे खराब रहा है पाकिस्तान का परफॉर्मेंस
बात अगर श्रीलंका से तुलना की करें, तो भारत से अगल होने के बाद करीब 20 सालों के बाद से ही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था धूल फांकने लगी थी। आईएमएफ ने पिछले 30 सालों में जहां पाकिस्तान को 13 बार बेलऑउट पैकेज दिया है, वहीं श्रीलंका को 7 बार आईएमएफ से पैकेज मिला है। वहीं, विदेशी कर्ज की बात करें, तो पाकिस्तान के ऊपर अब 53 अरब डॉलर का कर्ज हो गया है, जबकि श्रीलंका के ऊपर कुल 51 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज है। जबकि, पाकिस्तान की जीडीपी श्रीलंका के मुकाबले तीन गुना बड़ी है, लेकिन उसके बाद भी श्रीलंका की जीडीपी का विकास दर पाकिस्तान के मुकाबले बेहतर है, जबकि पाकिस्तान की आबादी श्रीलंका के मुकाबले 10 गुना ज्यादा है।

साल 2022 के हालात समझिए
श्रीलंका की स्थिति इस साल मार्च से बिगड़ी है, जब मार्च महीने में श्रीलंका को 6 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना था, जबकि श्रीलंका के पास सिर्फ 1.9 अरब डॉलर ही विदेशी मुद्रा बचा था। वहीं, पूरे साल की बात करें, तो श्रीलंका को इस साल 13.38 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है, यानि श्रीलंका की स्थिति आगे और भी ज्यादा खराब होने वाली है। वहीं, बात अगर पाकिस्तान की करें, तो पाकिस्तान को इस साल 10.88 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है, लेकिन उसके पास सिर्फ 8 अरब डॉलर का ही विदेशी मुद्रा भंडार है, जो उसे चीन, सऊदी और यूएई से मिले हैं। यानि, तीन देशों से मदद मिलने के बाद भी पाकिस्तान अपने कर्ज का भुगतान नहीं कर पाएगा, जबकि, इतने पैसे में उसे अपने जरूरत का सामान, जैसे पेट्रोल-डीजल, गैस और दूसरी चीजें भी खरीदनी है। ऐसे में सवाल ये उठता है, कि आखिर ऐसी क्या वजह है, कि पाकिस्तान अभी भी खड़ा हुआ है और श्रीलंका गिर चुका है?

जियो-पॉलिटिकल गेम
जियो-पॉलिटिकल गेम को एक लाइन में समझे, तो आपका दोस्त कौन कौन से देश हैं, ये इसपर निर्भर करता है। हालांकि, इस लिहाज से देखें, तो चीन, श्रीलंका और पाकिस्तान, दोनों का ही कॉमन पार्टनर है, लेकिन पाकिस्तान के जो चीन के साथ संबंध हैं, वो पिछले कई सालों में धीरे धीरे बनते गये हैं और चीन के अपने कई हित पाकिस्तान के अंदर है, जैसे सीपीईसी, जिसमें चीन कई अरब डॉलर लगा चुका है और अगर पाकिस्तान गिरता है, तो चीन के कई अरब डॉलर सीधे तौर पर पानी डूब जाएंगे। लेकिन, बात श्रीलंका की करें, तो श्रीलंका चीन का नया नवेला दोस्त है और राजपक्षे सरकार ने श्रीलंका को चीन की गोद में बिठाया था और चीन का श्रीलंका में कोई ज्यादा हित नहीं है। और यही वजह है, कि श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने इस साल जब जनवरी में चीन से 1.2 अरब डॉलर का लोन मांगा, तो चीन की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके साथ ही पाकिस्तान के कुछ और भी दोस्त हैं, जैसे सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका।

पाकिस्तान का इस्लामिक कार्ड
इसके साथ ही पाकिस्तान हमेशा से इस्लामिक कार्ड खेलने में माहिर रहा है और वो किसी ना किसी तरह से मुस्लिम बिरादर की बात कर सऊदी अरब से लोन लेने में कामयाब हो ही जाता है। पाकिस्तान अपनी सुन्नी मुस्लिम बहुल कार्ड को भी सऊदी अरब के सामने खेलता है और इन सबके साथ ही पाकिस्तान अपनी सेना को सऊदी अरब की सेना को ट्रेनिंग देने के लिए भी भेजता रहता है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जब चुनकर आये थे, तो उन्होंने सबसे ज्यादा मुस्लिम कार्ड भुनाने की कोशिश की थी और पीएम बनते ही वो लोन लेने के लिए सऊदी अरब पहुंच गये थे और साल 2018 में इमरान खान ने सऊदी अरब से 3 अरब डॉलर का बैलेंस ऑफ पेमेंट सपोर्ट लिया था और संयुक्त अरब अमीरात ने 3 अरब डॉलर कैश पाकिस्तान को दिया था। वहीं, साल 2019 में चीन ने पाकिस्तान को 3.5 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता दी थी, ताकि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार ना गिरे। वहीं, अमेरिका ने तो पाकिस्तान की कई सालों तक अरबों डॉलर की मदद दी और जबतक पाकिस्तान अमेरिका के करीब था, उसके अकाउंट में अरबों डॉलर क्रेडिट होते रहते थे।

पाकिस्तान क्यों है कुछ देशों का फेवरेट?
कोल्ड वार के समय से ही पाकिस्तान लगातार अमेरिका के पक्ष में रहा, जबकि सोशलिस्ट अर्थव्यवस्था होने की वजह से भारत का झुकाव हमेशा से रूस की तरफ रहा और भारत की जनता एक तरह से रूस के साथ दिल से जुड़ी हुई है, लिहाजा अमेरिका और पाकिस्तान काफी करीब आते चले गये। और भारत के खिलाफ अमेरिका ने हमेशा से पाकिस्तान को एक कार्ड के तौर पर इस्तेमाल किया और साल 1999 में जब कारगिल युद्ध हुआ था, उस वक्त अमेरिका ने भारत को अपनी सैटेलाइट सुविधा देने से इनकार कर दिया। वहीं, दूसरी तरफ भारत को घेरने की फिराक में लगा रहता है और इसके लिए उसे पाकिस्तान की जरूरत रही है। पाकिस्तान जब तक भारत के खिलाफ खड़ा रहेगा, चीन को भारत की सीधी चुनौती नहीं मिल सकेगी, ये ड्रैगन जानता है, लिहाजा चीन लगातार पाकिस्तान को जिंदा रखता है। वहीं, पाकिस्तान ने पीओके का एक हिस्सा चीन को गिफ्ट कर चुका है। लिहाजा, पाकिस्तान हमेशा से किसी ना किसी सुपरपॉवर का फेवरेट बना रहा और अपनी इस स्थिति का जमकर फायदा उठाया।

पाकिस्तान उठाता है अपनी स्थिति का फायदा
पाकिस्तानी अखबारों में कुछ दिन पहले एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें कहा गया था कि, इंटरनेशनल कम्युनिटी कभी नहीं चाहेगी, कि पाकिस्तान के हालात श्रीलंका जैसे हों। हालांकि, इस बार जब पाकिस्तान सऊदी अरब और यूएई के पास लोन के गया था, तो उन्होंने लोन के लिए आईएमएफ के पास जाने के लिए कह दिया था और आईएमएफ ने 7 अरब डॉलर का बेलऑउट पैकेज पाकिस्तान को दे दिया, जबकि पाकिस्तान ने सिर्फ 6 अरब डॉलर ही मांगे थे। जबकि, आईएमएफ पर अमेरिका का ही कंट्रोल है। इसके साथ ही पाकिस्तान आतंकवाद का भी फायदा उठाने की कोशिश करता है और पाकिस्तान हमेशा से दुनिया को डर दिखाता है, कि अगर पाकिस्तान ध्वस्त होता है, तो पाकिस्तान के अंदर और पाकिस्तान समर्थित तालिबान जैसे आतंकी संगठन दुनिया के लिए नासूर बन जाएंगे और इसलिए भी पाकिस्तान को किसी ना किसी देश से कर्ज मिल ही जाता है। लेकिन, श्रीलंका के साथ ऐसी स्थिति नहीं है। श्रीलंका में आतंकी संगठन नहीं है और श्रीलंका बर्बाद भी हो जाए, तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।












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