खुल गया आज तक का सबसे बड़ा रहस्य- एक जैसे क्यों दिखाई देते हैं जुड़वां इंसान?
एम्सटर्डम, 30 सितंबर। दुनियाभर में एक जैसी शक्ल और कद-काठी के कई जुड़वां इंसान हैं। कई बार तो जुड़वां बच्चों की मां भी उनमें अंतर नहीं कर पाती। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जुड़वां बच्चे क्यों होते हैं? वह एक जैसे क्यों दिखाई देते हैं या फिर अगर आपका भी जुड़वां भाई-बहन होता तो आप क्या करते? सालों तक रहस्य रहने के बाद आखिरकार अब इन सवालों से पर्दा उठ चुका है। हाल ही में एक वैज्ञानिक ने जुड़वां इंसानों पर कई चौकाने वाले खुलासे किए।

वैज्ञानिकों ने किया इस रहस्य का खुलासा
सालों की रिसर्च के बाद अब वैज्ञानिकों ने इस मेडिकल रहस्य को सुलझा लिया है कि कुछ जुड़वां एक जैसे क्यों दिखाई देते है। सामने आया रिसर्च जन्मजात विकारों के इलाज में भी क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। नीदरलैंड के शोधकर्ताओं ने पहली बार एक जैसे दिखने वाले जुड़वां बच्चों पर रिसर्च के दौरान एक ऐसे डीएनए समूह का पता लगाया जो गर्भावस्था के दौरान होने वाली घटनाओं को बदल सकता है।

एक ही एग से पैदा होते हैं समान जड़वां बच्चे
महिला के गर्भाशय में फर्टिलाइजेशन की प्रकिया के बाद भ्रूण तैयार होता है। आम तौर पर पहले स्पर्म के संपर्क में आते ही एग खुद को सील कर लेता है, लेकिन कई बार इस प्रक्रिया में दो स्पर्म एक साथ एक ही एग में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे में उस एग से दो भ्रूण बनते हैं। एक ही अंडे से फर्टिलाइज होने की वजह से भ्रूण का प्लेसेंटा एक ही होता है। ऐसी स्थिति में दो लड़के या दो लड़किया पैदा हो सकती हैं।

जुड़वां होने के बावजूद अलग होते हैं फिंगर प्रिंट्स
वैज्ञानिकों के मुताबिक एक ही एग से जन्म लेने वाले जुड़वां बच्चे दिखने में अमूमन एक जैसे होते हैं। इनका डीएनए भी एक दूसरे से काफी मेल खाता है, लेकिन फिंगर प्रिंट्स अलग-अलग होते हैं। इस प्रक्रिया से जन्म लेने वाले बच्चों को मोनोजाइगोटिक ट्विन्स कहा जाता है। जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित शोध में आनुवंशिकी और जुड़वां अध्ययनों में विशेषज्ञ नीदरलैंड ट्विन रजिस्टर (वीयू) के प्रोफेसर डोरेट बूम्स्मा ने कई बाते कही हैं।

यह एक बहुत बड़ी खोज
प्रोफेसर डोरेट बूम्स्मा ने कहा, 'यह एक बहुत बड़ी खोज है। समान जुड़वा बच्चों की उत्पत्ति और जन्म हमेशा एक पूर्ण रहस्य रहा है। यह कुछ लक्षणों में से एक है। जिसमें आनुवंशिकी कोई या बहुत मामूली भूमिका नहीं निभाती है। यह पहली बार है कि हमने मनुष्यों में इस घटना का एक जैविक मार्कर पाया है। स्पष्टीकरण जीनोम में नहीं, बल्कि इसके स्वदेशी में निहित प्रतीत होता है।'

1000 जुड़वां में 4 जुड़वां होते हैं एक जैसे
शोधकर्ताओं ने कहा कि दुनियाभर में प्रति 1000 जन्म की दर पर चार समान जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं। इससे पहले किसी भी अध्ययन में मोनोजाइगोटिक ट्विन्स पर रिसर्च नहीं की गई थी। जबकि दूसरी स्थिति में जब महिला के अंदर दो अंडे निषेचित होते हैं और उससे हुए गर्भ में दो अलग-अलग जुड़वां बच्चे होते हैं। ये लड़का या लड़की किसी भी लिंग के हो सकते हैं। इनकी कद-काठी और शक्ल भी अलग होती है।

इस स्थिति में नहीं होते एक जैसे जुड़वां
समान जुड़वां एक ही फर्टिलाइज एग से उत्पन्न होते हैं, शोधकर्ताओं ने अब पाया है कि यह ऐसे बच्चों के गुणसूत्रों अलग होते हैं लेकिन ये अंतर उनके डीएनए कोड में नहीं होता। एपिजेनोम नियंत्रण तत्व हैं जो यह निर्धारित करते हैं कि जीन को कैसे ट्यून किया जाता है और उन्हें कितनी दृढ़ता से व्यक्त किया जाता है। डीएनए मिथाइलेशन यह नियंत्रित करता है कि शरीर की प्रत्येक कोशिका में कौन से जीन 'चालू' हैं और कौन से जीन 'बंद' हैं।

6,000 जुड़वां बच्चों पर किया गया शोध
शोधकर्ताओं ने नीदरलैंड, ग्रेट ब्रिटेन, फिनलैंड और ऑस्ट्रेलिया से करीब 6,000 से अधिक जुड़वां बच्चों के डीएनए की जांच की। इनके डीएनए में 4,00,000 से अधिक साइटों पर मिथाइलेशन के स्तर को नापा गया। शोधकर्ताओं ने डीएनए में 834 स्थान पाए जहां गैर-जुड़वा बच्चों की तुलना में समान जुड़वा बच्चों में मिथाइलेशन स्तर अलग था। डीएनए में ये स्थान प्रारंभिक भ्रूण विकास के कार्यों में शामिल हैं।
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