कोरोना वैक्सीन लेने वाली गर्भवती महिलाओं के बच्चों को मिली हाई लेवल एंटीबॉडी, US स्टडी में आया सामने
नई दिल्ली, सितंबर 23। गर्भवती महिलाओं के लिए कोरोना वैक्सीन सुरक्षित है या नहीं, इसको लेकर एक अमेरिकी स्टडी की गई, जिसमें सामने आया है कि वैक्सीन लेने वाली महिलाओं के अंदर पनप रहे बच्चे को उच्च स्तर की एंटीबॉडी मिलती है। अमेरिकन जर्नल ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी मैटरनल फेटल मेडिसिन में बुधवार को प्रकाशित एक स्टडी के नतीजों में कहा गया है कि जिन गर्भवती महिलाओं को फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना mRNA के टीके लगे हैं, उन महिलाओं के बच्चों में उच्च स्तर की एंटीबॉडी पाई गई है।

नवजात बच्चों में मिली 100 फीसदी एंटीबॉडी
Recommended Video
शोधकर्ताओं का कहना है कि mRNA टीकों की प्रभावशीलता सही एंटीबॉडी रक्त प्रोटीन के उत्पादन को ट्रिगर करने की क्षमता रखती है। इसी से व्यक्ति संक्रमण से बचने में सक्षम होता है। इस स्टडी में 36 नवजात बच्चों को शामिल किया गया और शोधकर्ताओं ने पाया कि सभी 36 नवजात बच्चों में 100 फीसदी एंटीबॉडी पाई गई। शोधकर्ताओं ने इन बच्चों की माताओं को फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना वैक्सीन की डोज दी थी। शोधकर्ताओं का कहना है कि हमें इस बात की उम्मीद नहीं थी कि सभी नवजात बच्चों में 100 फीसदी एंटीबॉडी होगी, लेकिन हमें अभी और परिवर्तन देखे जाने की उम्मीद है।
गर्भवती महिलाओं को वैक्सीनेशन के लिए प्रोत्साहित करेगी स्टडी
इस स्टडी का डेटा अधिक से अधिक महिलाओं को उनकी गर्भावस्था के दौरान कोरोना वैक्सीन लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के 11 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, डिलीवरी से पहले टीके की सुरक्षा के बढ़ते प्रमाण के बावजूद 18 से 49 वर्ष की आयु की केवल 30% गर्भवती महिलाओं को ही टीका लगाया जाता है। अध्ययन के छोटे नमूने के आकार को देखते हुए, टीम अब एक बड़े समूह के परिणामों को देख रही है, साथ ही यह भी देख रही है कि जन्म के बाद शिशुओं का टीकाकरण कितने समय तक चलता है।












Click it and Unblock the Notifications