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#jerusalem: आखिर डोनाल्ड ट्रंप ने येरूशलम को क्यों बनाया इजरायल की राजधानी?

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    वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए बुधवार को येरूशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता प्रदान कर दी, ट्रंप का ये एतिहासिक फैसला काफी जोखिम भरा है क्योंकि फिलीस्तीन के साथ अमेरिका की दुश्मनी बढ़ सकती है, बावजूद इसके ट्रंप ने ये जोखिम भरा कदम उठाते हुए अपना वो वादा पूरा किया, जो कि उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार के वक्त लोगों से किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस कदम के बाद हर किसी के दिमाग में बस एक ही सवाल घूम रहा है कि आखिर ट्रंप ने विरोध के बावजूद इतना बड़ा फैसला कैसे किया, आखिर इस निर्णय के पीछे क्या कारण है, क्या ये उनकी मुस्लिम विरोधी नीति का हिस्सा है या फिर कुछ और क्योंकि इस फैसले की वजह से अरब देशों में हिस्सा पनप सकती है। ट्रंप को पहले भी अरब के देशों ने ऐसा ना करने के लिए धमकी दे रखी थी।

    मुस्लिमों के खिलाफ बयानबाजी

    मुस्लिमों के खिलाफ बयानबाजी

    डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा मुस्लिमों के खिलाफ बयानबाजी की है, इससे पहले भी वे सभी अमेरिकी मुस्लिमों के लिए धर्म के आधार पर अलग से उनका पहचान पत्र बनवाने और अमेरिका में स्थित सभी मस्जिदों की निगरानी किए जाने की बात कह चुके हैं और काफी आलोचनाओं के शिकार हो चुके हैं, बावजूद उसके उनकी सोच पर कोई फर्क नहीं पड़ा और येरूशलम पर आया उनका फैसला इस बात की पुष्टि भी करता है।

    आतंकी संगठन ISIS

    आतंकी संगठन ISIS

    गौरतलब है कि ट्रंप जिस रिपब्लिकन पार्टी से आते हैं उसे वैसे भी दक्षिणपंथी सोच वाली पार्टी माना जाता है, जो अमेरिकी राष्ट्रवाद को लेकर मुखर है लेकिन पेरिस और कैलिफोर्निया हमले में आतंकी संगठन ISIS की भूमिका ने अमेरिकी लोगों के मन में इस्लाम के प्रति नफरत बढ़ानी शुरू कर दी है।शायद यही वजह है कि ट्रंप ने मौके की नजाकत को देखते हुए मुस्लिमों के खिलाफ जुबानी हमले तेज कर दिए हैं और इजरायल के पक्ष में फैसला करना उसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

    यूएस-सऊदी-इजरायल गठबंधन

    यूएस-सऊदी-इजरायल गठबंधन

    अनुमान तो ये भी है कि ट्रंप के इस फैसले में सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान का गुप्त रूप से शामिल हैं, दरअसल, ट्रंप के दामाद और मध्य पूर्व के सलाहकार जेरेड कुश्नेर की सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ करीबी संबंध हैं, अगर ये सही है तो ट्रंप के इस कदम के बाद उन्हें इजरायल के कट्टरपंथी समर्थकों का समर्थन मिलेगा और ईरान के खिलाफ यूएस-सऊदी-इजरायल गठबंधन बन सकता है।

    इजरायल जश्न मना रहा

    इजरायल जश्न मना रहा

    खैर आगे जो होगा वो तो वक्त तय करेगा लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि आज इजरायल जश्न मना रहा है और फिलीस्तीन गम में डूबा है।

    सबसे सफल लोकतंत्र का भी केंद्र

    सबसे सफल लोकतंत्र का भी केंद्र

    मालूम हो कि करीब सात दशकों से अमेरिका की विदेश नीति और इजरायल और फिलिस्तीन के बीच शांति प्रक्रिया को तोड़ते हुए ट्रंप ने यह विवादित फैसला लिया है। ट्रंप ने कहा, येरुशलम सिर्फ तीन महान धर्मों का केंद्र नहीं है, यह दुनिया के सबसे सफल लोकतंत्र का भी केंद्र है।

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    English summary
    President Donald Trump formally recognized Jerusalem as the capital of Israel, reversing nearly seven decades of American foreign policy and setting in motion a plan to move the U.S. Embassy from Tel Aviv to the fiercely contested Holy City.

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