प्रेमी जोड़ों के लिए सऊदी अरब में कोरोना महामारी खुशियों की सौगात क्यों है ? जानिए
रियाद, 31 जनवरी: सऊदी अरब समेत खाड़ी के कई देशों में शादियों पर इतना ज्यादा खर्च होता है कि कई प्रेमी युगलों के लिए इस बंधन में बंध पाना मुश्किल रहता है। हम शाही सऊदी शादी या मध्यमवर्गीय सऊदी शादी की भी बात नहीं कर रहे। सामान्य से सामान्य लोगों को वहां शादियों में इतना ज्यादा खर्च होता है, जिसकी भरपाई में जीवन के कई दशक निकल जाते हैं। कई लोग हैं जो शादियों का खर्च चुकाने के लिए दिन में नौकरी और बाकी टाइम टैक्सी चलाकर बैंक का लोन चुका रहे हैं। लेकिन, कोरोना महामारी ने ऐसे लोगों की जिंदगी ही बदल दी है। शादियों पर होने वाला उनका खर्च घटकर 90% से भी कम हो गया है और महामारी के दौरान शादियों की संख्या भी बढ़ गई है। यानी जो लोग खर्च के डर से बिना शादी के काम चला रहे थे, उन्हें भी अब वैवाहिक बंधन में बंध जाने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है।

ठेठ सऊदी शादी, जीवन पर क्यों भारी ?
ठेठ सऊदी अंदाज में शादी करने का सपना अच्छे-अच्छे प्रेमी जोड़ियों को हताश करता रहा है। वहां शादी का खर्च इतना ज्यादा होता है कि पैसे वाले लोगों के लिए भी उसका हिसाब चुकता करने में पसीने छूट जाते हैं। सैकड़ों मेहमानों के लिए शानदार बॉलरूम बुक करना कोई बच्चों का खेल नहीं है। क्योंकि, दुल्हन का स्टेज ऐसा होना चाहिए कि शाही अंदाज की झलक कोने-कोने से नजर आए। केक में इतने लेयर होने चाहिए कि देखने वाला, देखता ही रह जाए। उसपर से शाही अंदाज में शादी करने की परंपरा तभी पूरी होगी, जब तलवारबाजों की लाइन लगी हो, चीयरलीडर्स मेहमानों की स्वागत कर रही हों और संगीतकार की मधुर ध्वनि में ऐशो आराम का भरपूर अहसास हो। आइए पहले एक आम सऊदी शादी का खर्च का आकलन करने की कोशिश करते हैं।
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सामान्य सऊदी शादी में भी करीब 40 लाख रुपये का खर्च
ऊपर हमने जिन खर्चों का जिक्र किया, वह खर्चे अभी अधूरे हैं। स्थानीय परंपरा के मुताबिक यहां मर्दों और औरतों के लिए अलग-अलग हॉल होने चाहिए। जिससे शादी का खर्चा सीधे दोगुना होना तय है। कितना भी कर लें एक आम सऊदी शादी में करीब 2,00,000 रियाल तो खर्च होना ही होना है। मतलब, भारत के लिहाज से देखें तो करीब 40 लाख रुपये। यह किसी सऊदी अमीर की शादी की बात नहीं हो रही। वे तो (अमीर सऊदी) सिर्फ क्रूनर्स (एक खास तरह का गवैया) को हायर करने में ही इससे चार गुना ज्यादा खर्च कर देते हैं। ऊपर से इतना खर्च करने के बाद कितने दिन शादी टिकेगी इसकी भी गारंटी नहीं है। बड़ी संख्या में शादी के कुछ समय बाद तलाक भी हो जाते हैं।

कोविड महामारी के चलते शादी का खर्च घट गया
इतनी महंगी शादी का असर ये होता है कि कई लोग अगर किसी तरह से शादी कर भी लेते हैं, तो उसके बाद कर्ज के बोझ तले ऐसे दब जाते हैं, जिससे उबरना मुश्किल होता है। इकोनॉमिस्ट से रयान एल सामेइरी ने कहा है, 'मेरी शादी के सात साल हो चुके हैं और मैं अभी भी बैंक का कर्जा चुका रहा हूं, सिर्फ दो घंटे वाली चपत के लिए।' ये टीचर हैं और टैक्सी चलाकर भी कमाई करते हैं। बीते दो वर्षों में ऐसे लोगों को काफी राहत मिली है और इसके लिए वह कोरोना महामारी को शुक्रिया अदा कर रहे हैं। 2020 में कोविड की शुरुआत होने पर सऊदी अरब में 50 या इससे कम लोगों की भीड़ जुटाने की सीमा तय कर दी गई थी। जो लोग शादी करना चाहते हैं, उन्हें अब इस नियम का बड़ा सहारा मिल रहा है। उन्हें कई सारी कटौतियों के मौके मिल रहे हैं, जिससे शादी का खर्च कई गुना कम हो गए हैं।

शादी में 90% घटा खर्चा, 9% बढ़ी शादियों की संख्या
कोविड महामारी नियमों के पालन के नाम पर ऐसे जोड़े जो अपने प्यार को शादी के रूप में परवान चढ़ाना चाहते हैं, वे जाफ्फा (संगीत के साथ जुलूस) और अर्दा (तलवार डांस) जैसी परंपराओं को अब नजरअंदाज करने लगे हैं। वो महंगे बॉलरूम की जगह सामुदायिक हॉल से ही काम चलाने लगे हैं। लोग कम हो गए हैं तो केक की साइज में छोटी हो गई है। यात्रा से जुड़ी पाबंदियां लागू हैं तो हनीमून का फालतू खर्च भी बचने लगा है। यूं समझ लीजिए कि खर्च के डर से जो सऊदी प्रेमी युगल के हाथ-पैर शादी के नाम पर कांपने लगते थे, उनका काम अब 90% कम खर्च में चलने लगा है। इसका परिणाम ये हुआ है कि लॉकडाउन के दौरान 2020 में सऊदी अरब में शादियों की संख्या में 9% इजाफा हो गया। यह सिर्फ सऊदी अरब में हो रहा है, ऐसा नहीं है। खाड़ी के बाकी देशों में भी जैसे कि कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात में भी सस्ती शादी का इंतजार करने वाले लोगों को वैवाविक बंधंन में बंधने का मौका मिला है।

कोविड ने लोगों को प्रैक्टिकल बना दिया है
जेद्दाह के एक वकील बयान जाहरन ने कहा है 'एक लड़की का हमेशा सपना फाइव स्टार शादी की होती है, लेकिन कोविड ने लोगों को ज्यादा प्रैक्टिकल बना दिया है।' उनका कहना है कि '5 घंटे में किए गए अत्यधिक खर्च की वजह से अपना भविष्य क्या खराब करना ?' कुछ जोड़े तो मिसयार विवाह का विकल्प भी चुन रहे हैं (इसकी अनुमति मौलवी देते हैं और यह रखेलों या दूसरी महिलाओं से शादी करने के लिए भी लोकप्रिय है।) हालांकि, परिवार और साथियों का दबाव बरकरार रहता है, लेकिन आम लोगों को एक नया रास्ता मिल गया है और ओमिक्रॉन के दौरान भी इसकी लोकप्रियता बढ़ी है। (तस्वीरें प्रतीकात्मक)












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