कोरोना महामारी के बीच क्यों बहुत खतरनाक है वायु प्रदूषण का बढ़ना? रिसर्च में हुआ खुलासा
स्पेन में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों में कोरोना के विकास के जोखिम का खतरा बढ़ जाता है।
मैड्रिड, 18 नवंबर। स्पेन में किए गए एक अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों में कोरोना के विकास के जोखिम का खतरा बढ़ जाता है। बुधवार को एन्वायर्नमेंट हेल्थ पर्सपेक्टिव पत्रिका में प्रकाशित शोध वायु प्रदूषण को कम करने से होने वाले स्वास्थ्य लाभों को दर्शाता है और संक्रामक रोगों पर पर्यावरणीय कारकों के प्रभाव पर प्रकाश डालता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि पिछले अध्ययनों से पता चला है कि वायु प्रदूषण के उच्च पूर्व-महामारी स्तर वाले क्षेत्रों में कोविड-19 और मौतों की घटनाएं अधिक थीं। हालांकि इन घटनाओं का वायु प्रदूषण से कोई संबंध है यह अभी स्पष्ट नहीं है।

बीमारी की संवेदनशीलता को बढ़ा सकता है वायु प्रदूषण
शोधकर्ताओं के अनुसार वायु प्रदूषण वायरस के हवा के जरिए ट्रांसमिशन को और किसी व्यक्ति की बीमारी की संवेदनशीलता को बढ़ा सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि समस्या ये है कि पिछले अध्ययन ऐसे मामलों पर आधारित थे जिनका निदान किया गया था, लेकिन इन अध्ययनों में असिम्टोमेटिक और अनियंत्रित मामलों को शामिल नहीं किया गया था।
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उच्च वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों पर किया गया शोध
शोधकर्ताओं ने कैटेलोनिया में रहने वाले उन वयस्कों के एक समूह में वायरस-विशिष्ट एंटीबॉडी की एक श्रृंखला को मापा जो नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, पीएम 2.5, ब्लैक कार्बन और ओजोन जैसे वायु प्रदूषकों के दीर्घकालिक संपर्क में थे। स्पेन में बार्सिलोना इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ (ISGlobal) में हुए इस अध्ययन में शामिल शोधकर्ता कैथरीन टन ने बताया कि कोरोना महामारी का बढ़ते वायु प्रदूषण से संबंध को लेकर यह अपनी तरह का पहला अध्ययन है।
उच्च वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने वालों में मिले कोरोना के गंभीर मामले
इस शोध में 9,605 लोगों को शामिल किया गया, जिनमें 481 ( 5 प्रतिशत) पुष्टि किए गए कोरोना के मामले शामिल थे। अध्ययन में शामिल NO2 और PM2.5 के उच्च जोखिम वाले प्रतिभागियों और बीमारी के बीच एक संबंध पाया गया। वायु प्रदूषण के दीर्घकालिक संपर्क में रहे संक्रमितों में कोरोना के गंभीर मामले मिले। अध्ययन से जुड़े एक अन्य शोधकर्ता कोगेविनास ने कहा कि हमारा अध्ययन परिवेशी वायु प्रदूषण और कोरोना के संबंध पर वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत सबूत प्रदान करता है।












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