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फ्रांस, इटली, नीदरलैंड... कट्टर दक्षिणपंथी राजनीति का उदय, यूरोप में क्यों उफान पर है एंटी-इस्लामिक एजेंडा?

Why Europe Embrace Anti-Islam Agenda: इटली की प्रधानमंत्री जियॉर्जिया मेलोनी का हालिया बयान है, कि यूरोप में हम शरिया कानून लागू नहीं होने देंगे और उन्होंने दावा किया, कि यूरोप में इस्लाम को बढ़ावा देने की एक प्रक्रिया चल रही है और सऊदी अरब, यूरोप में इस्लामिक केन्द्रों को फंड मुहैया करवा रहा है।

नीदरलैंड में पिछले दिनों हुए चुनाव में अप्रत्याशित जीत हासिल करने वाले नेता गीर्ट विल्डर्स कई बार कह चुके हैं, कि अवैध मुसलमान यूरोप को तबाह कर चुके हैं और गीर्ट के एंटी-इस्लाम बयानों को लेकर पूरी दुनिया में कई बार हंगामा हो चुका है।

why anti islam agenda sporeding in europe

वहीं, यूरोप का सबसे प्रमुख देश फ्रांस, जहां पर पिछले कुछ सालों में इस्लाम को केन्द्र में रखकर कुछ हत्याएं हुई हैं, वहां भी विपक्ष की दक्षिणपंथी पार्टी काफी तेजी से आगे बढ़ रही हैं और मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जिन्होंने पिछले चुनाव में कड़े मुकाबले में जीत हासिल की थी, उनके लिए अगला चुनाव जीतना काफी मुश्किल हो गया है, क्योंकि देश में एंटी-इस्लाम नजरिया काफी तेजी से फैल रहा है।

तो फिर यूरोप में मुसलमानों के खिलाफ माहौल क्यों बन रहा है? आइये फ्रांस के माहौल से समझने की कोशिश करते हैं।

एंटी-इस्लाम होगी फ्रांस की अगली सरकार?

फ्रांस की मुख्य विपक्षी नेता का नाम है मरीन ले पेन, जिन्होंने देश को काफी हद तक ये मनवा दिया है, कि मुस्लिम शरणार्थियों को शरण देकर फ्रांस ने ऐतिहासिक गलतियां की हैं और पिछले कुछ सालों में फ्रांस में हिंसक घटनाओं में मुस्लिमों का हाथ है।

मरीन ले पेन के आरोप निराधार नहीं हैं। सिर्फ इस साल फ्रांस में कई हिंसक घटनाओं में अवैध मुस्लिम शरणार्थियों का हाथ रहा है और इसी साल एक किशोर की पुलिस पिटाई में मौत होने के बाद फ्रांस के कई शहर कई दिनों तक जलते रहे। वो किशोर मुस्लिम समुदाय का था और पुलिस का कहना था, कि वो ड्रग एडिक्ट था और सड़क पर गलत ड्राइविंग करते हुए उसका चालान काटा जा रहा था, जब उसने गाड़ी की रफ्तार तेज कर भागने की कोशिश की।

हकीकत जो कुछ भी हो, लेकिन स्थिति ये है, कि मरीन ले पेन 2024 की राजनीति में काफी ताकतवर स्थिति में आ चुकी हैं।

मरीन ले पेन की पार्टी, नेशनल रैली (रैसेम्बलमेंट नेशनल, आरएन), पिछले साल के फ्रांसीसी राष्ट्रपति चुनाव में अपनी ऐतिहासिक सफलता हासिल करने में सक्षम रही है और अगले साल जून में यूरोपीय संसद चुनावों में सीटें हासिल करने के लिए काफी मजबूती के साथ तैयार है।

पूरे यूरोप में धुर दक्षिणपंथी पार्टियों के लिए समर्थन बढ़ रहा है। पूरे महाद्वीप में लोकलुभावन, आप्रवासी-विरोधी पार्टियों की योजनाओं को काफी पसंद किया जा रहा है।

लिहाजा, मुख्यधारा के राजनेताओं को चिंता है, कि धुर दक्षिणपंथ पहले से ही फ्रांस में भी जड़ें जमा चुका है और अब फ्रांस की सत्ता भी धुर-दक्षिणपंथी नेताओं के हाथ में आने वाली है।

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी ने भी माना है, कि नेशनल रैली का जनाधार तेजी से बढ़ रहा है।

फ्रांस की विपक्षी नेता मरीन ले पेन

फ्रांस में दक्षिणपंथी राजनीति के उदय के कारण?

फ़्रांस में धुर दक्षिणपंथी राजनीति के उदय के कई कारण हैं। सूची में सबसे ऊपर, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की सरकार के प्रति व्यापक असंतोष है, कई लोग अभी भी नेशनल असेंबली में वोट के बिना, अलोकप्रिय कानून पारित करने के लिए सरकार के संवैधानिक पैंतरेबाज़ी के इस्तेमाल को लेकर नाराज हैं, खासकर रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने को लेकर इस साल फ्रांस में व्यापक प्रदर्शन किए गये हैं।

इसके अलावा, लोग महंगाई और जीवनयापन की लागत से निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

जनता उन शहरी दंगों को भी नहीं भूली है, जिन्होंने जून में पुलिस द्वारा एक किशोर लड़के की हत्या के बाद देश को हिलाकर रख दिया था।

इसके अलावा, हमास के आतंकियों ने जिस तरह से इजराइल पर हमला किया है और यूरोप में यहूदियों को जिस तरह से निशाना बनाया जा रहा है, उसने भी फ्रांस के लोगों में गुस्सा भरा है। इसके अलावा, फ्रांस में हालिया समय में आतंकी हमलों में इजाफा हुआ है, जैसे उत्तरी फ्रांस में एक शिक्षक डोमिनिक बर्नार्ड की चाकू मारकर हत्या कर दी गई, जिसने एक बार फिर से फ्रांसीसी पहचान, आप्रवासन और आतंकवादी हिंसा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

पेरिस में साइंसेज-पीओ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और विशेषज्ञ गाइल्स इवाल्डी ने कहा, कि "आव्रजन, आतंकवाद और आर्थिक चिंता का कॉकटेल, दक्षिणपंथी राजनीति को मजबूत कर रहा है।"

लिहाजा, स्थिति अब ऐसी बन रही है, कि फ्रांस में अगले चुनाव में दक्षिणपंथी पार्टी सत्ता में आ सकती है और उसके बाद फ्रांस में सबसे पहला कानून अवैध शरणार्थियों के खिलाफ बनाया जाएगा। इसके पीछे की एक और बड़ी वजह ये है, कि ये नेता, अपनी जनता को ये विश्वास दिलाने में कामयाब हो रहे हैं, कि अवैध प्रवासी देश की पहचान छीनने का काम कर रहे हैं।

इसके अलावा, दूसरे यूरोपीय देशों के भी दक्षिणपंथी नेताओं के उदय से बाकी देश प्रभावित हो रहे हैं, जैसे इटली में जियॉर्जिया मेलोनी का सत्ता में आना।

प्रधानमंत्री मेलोनी ने एक दिन पहले इस्लामिक संस्कृति का मजाक उड़ाते हुए कहा, कि यूरोप में इस्लाम के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा, कि 'मेरा मानना है कि इस्लामी संस्कृति और हमारी सभ्यता के मूल्यों और अधिकारों के बीच सामंजस्य नहीं है। ये दोनों परस्पर विरोधी हैं।''

मेलोनी ने सीधे तौर पर सऊदी अरब को निशाना बनाते हुए कहा, कि "इटली में इस्लामी सांस्कृतिक केंद्रों को सऊदी अरब द्वारा वित्त पोषित किया जाता है जहां शरिया लागू है। यूरोप में हमारी सभ्यता के मूल्यों से बहुत दूर इस्लामीकरण की प्रक्रिया चल रही है!"

इटली पीएम की ये टिप्पणियां रोम में उनकी धुर दक्षिणपंथी पार्टी- ब्रदर्स ऑफ इटली- द्वारा आयोजित एक राजनीतिक उत्सव की मेजबानी के बाद आई हैं, जिसमें ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भाग लिया था।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक सप्ताहांत पर इटली के आधिकारिक दौरे पर हैं। अपने भाषण में सुनक ने कहा कि अवैध प्रवासन से यूरोप के प्रभावित होने का खतरा है। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों को अपडेट करने का सही समय है।

ब्रिटेन में भी अवैध अप्रवासियों के खिलाफ सख्त कानून बनाया गया है और लंदन में पिछले कुछ सालों में जिस तरह से पाकिस्तानी मुसलमानों ने उत्पात मचाया है, उसने भी दक्षिणपंथी नेताओं की बातों को मानने के लिए लोगों को मजबूर किया है।

लिहाजा अब हालात ऐसे बनते जा रहे हैं, कि यूरोप में बहुत जल्द एंटी-इस्लाम एजेंडा एक खतरनाक स्तर पर जा सकता है और नौबत अवैध प्रवासियों को देश से बाहर निकालने तक भी पहुंच सकती है।

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