क्यों मधुमक्खियों के सफाए में जुटा है ये देश? करोड़ों डॉलर के शहद कारोबार पर संकट,फसलें भी होंगी चौपट!

नई दिल्ली, 4 जुलाई: ऑस्ट्रेलिया में मधुमक्खियों का सफाया अभियान चलाया जा रहा है। अभी तक 60 लाख से ज्यादा मधुमक्खियों का खात्मा किया जा चुका है। ऑस्ट्रेलिया में शहद का कारोबार करोड़ों डॉलर का है, ऐसे में उसपर बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ऊपर से मधुमक्खियों की संख्या घटने से महंगी फसलों के भी चौपट होने की आशंका पैदा हो गई है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है,जब यूक्रेन संकट की वजह से ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के चलते कृषि उद्योग पहले से ही भारी दबाव में है। लेकिन, ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों का कहना है कि मधुमक्खियों को मारने के अलावा उनके पास कोई उपाय नहीं है।

ऑस्ट्रेलिया में लाखों मधुमक्खियों का सफाया

ऑस्ट्रेलिया में लाखों मधुमक्खियों का सफाया

पिछले दो हफ्तों में ऑस्ट्रेलिया सरकार ने लाखों मधुमक्खियों को नष्ट कर दिया है। इसके पीछे एक परजीवी प्लेग है, जो बड़ी तबाही लाने में सक्षम है। इससे ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण-पूर्वी इलाका काफी प्रभावित हो रहा है। जिस परजीवी प्लेग को लेकर ऑस्ट्रेलियाई सरकार के होश उड़े हुए हैं, उसका कारण वैरोआ घुन बताया जा रहा है। तिल के आकार का यह जीव पिछले हफ्ते पहली बार सिडनी बंदरगाह के पास देखा गया था। लेकिन, उसके बाद से ही देश के करोड़ों डॉलर के शहद कारोबार को लेकर अफरा-तफरी मची हुई है।

तिल के आकार के कीड़े से संक्रमण

तिल के आकार के कीड़े से संक्रमण

वैरोआ घुन का संक्रमण ज्यादा इलाकों में ना फैले और यह और बड़ी महामारी का शक्ल ना अख्तियार करे इसके लिए मधुमक्खियों की कॉलोनियों में एक तरह से 'लॉकडाउन' लगा दिया गया है। ऑस्ट्रेलियन हनी बी इंडस्ट्री काउंसिल ने कहा है,'यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि न्यूकैसल इलाके के मधुमक्खी पालक वहां ना तो कोई चीज या उपकरण लेकर जाएं और ना ही वहां से बाहर लाएं।' हाल तक ऑस्ट्रेलिया उन चंद देशों में शामिल था जो वैरोआ घुन से फैलने वाले प्लेग को नियंत्रित करने में काफी सक्षम था, जिसे कि पूरी दुनिया में मधुमक्खियों का 'हत्यारा' माना जाता है। लेकिन, इस बार ऑस्ट्रेलिया सरकार निश्चिंत नहीं है, क्योंकि उसको लग रहा है कि मधुमक्खियों का यह दुश्मन कीड़ा इतनी आसानी से पीछा छोड़ने वाला नहीं है।

वैरोआ माइट क्या है ?

वैरोआ माइट क्या है ?

वैरोआ घुन या वैरोआ विध्वंसक एक ऐसा परजीवी कीड़ा है, जो मधुमक्खियों को खाता है। लाल-भूरे रंग का तिल जितना बड़ा कीड़ा इतना खतरनाक है कि विशेषज्ञों के मुताबिक यह मधुमक्खियों की पूरी कॉलोनी को सफाचट कर सकता है। यह मधुमक्खियों और मधुमक्खी पालन से जुड़े उपकरणों के जरिए ही फैलते हैं और फिर संक्रमण फैलाना शुरू कर देते हैं। दुनिया भर में मधुमक्खी कॉलोनियों की संख्या में कमी को इस कीड़े के प्रकोप का बहुत बड़ा कारण माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया की मधुमक्खी पालन वेबसाइट Bee Aware के मुताबिक, 'हालांकि वैरोआ माइट्स वयस्क मधुमक्खियों को खा सकते हैं और उनके भरोसे जीवित रह सकते हैं, वे मुख्य रूप से विकसित हो रहे अंडों के समूह में लार्वा और प्यूपा को फीड कराते हैं और प्रजनन करते हैं, जिससे मधुमक्खियों में विकृति पैदा होने लगती है और कमजोर होने के साथ-साथ उनमें कई तरह के वायरस पहुंचा देते हैं।'

वैरोआ माइट कब मचाने लगता है कहर ?

वैरोआ माइट कब मचाने लगता है कहर ?

समय के साथ मधुमक्खियों की कॉलोनियों में वैरोआ माइट की संख्या बढ़ जाती है। जब इसका संक्रमण बहुत भयावह शक्ल अख्तियार कर लेता है तो इसके चलते मधुमक्खियां अपंग होने लगती हैं, उन्हें उड़ने में दिक्कतें होने लगती हैं। इसके बाद अधिकांश ऐसी मधुमक्खियां उड़ने के बाद वापस कॉलोनी तक नहीं पहुंच पातीं। फिर सिर्फ तबाही ही बच जाती है।

400 से ज्यादा जगहों में फैला संक्रमण

400 से ज्यादा जगहों में फैला संक्रमण

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मधुमक्खियों के दुश्मन इस घुन का पहला मामला पिछले हफ्ते न्यूकैसल बंदरगाह के पास मिला। उसके बाद से यह 400 से ज्यादा जगहों में फैल चुका है, जिसे नियंत्रित करने के लिए 60 लाख से ज्यादा मधुमक्खियों को खत्म किया जा चुका है, ताकि यह दूसरों तक संक्रमण ना फैलाएं। इसकी जानकारी मिलते ही ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने सख्त बायोसिक्योरिटी जोन स्थापित कर दिया और प्रभावित इलाकों में मधुमक्खियों, हाइव्स, शहद और कॉम्ब की आवाजाही को अगले आदेश तक के लिए सीमित कर दिया। लेकिन, सख्ती के बावजूद इसका प्रकोप 378 किलोमीटर दूर डुब्बो शहर तक भी पहुंच गया है।

देशी मधुमक्खियों पर असर नहीं

देशी मधुमक्खियों पर असर नहीं

जिस कीड़े ने ऑस्ट्रेलिया के मधुमक्खियों पर बरपाया है, वह उसके देशी मधुमक्खियों को नहीं खाते। लेकिन, ऑस्ट्रेलिया का मुख्य कारोबार बाहरी मधुमक्खियों के भरोसे है, इसलिए उसपर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ा है। क्वींसलैंड डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर एंड फिशरीज के मुताबिक उनका देश 2016, 2019 और 2020 में ऐसे ही प्रकोपों को सफलतापूर्वक कंट्रोल कर चुका है।

ऑस्ट्रेलिया में मधुमक्खियां क्यों हैं महत्वपूर्ण ?

ऑस्ट्रेलिया में मधुमक्खियां क्यों हैं महत्वपूर्ण ?

एफटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक अभी इस महामारी के प्रकोप को रोकने के लिए ऑस्ट्रेलिया में जिस तरह का मधुमक्खी कॉलोनियों पर लॉकडाउन लगाया गया है, उससे कई तरह के फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। क्योंकि, बादाम, मैकाडामिया नट और ब्लूबेरी परागण के लिए हाइव्स पर ही निर्भर हैं। वैरोआ घुन का यह संक्रमण ऐसे समय में फैला है, जब ऑस्ट्रेलिया का कृषि उद्योग रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते ऊर्जा कीमतों में भारी इजाफे की वजह से पहले से ही दबाव में हैं। इसके अलावा सप्लाई-चेन पर भी संकट के बादल हैं। (तस्वीरें-फाइल और प्रतीकात्मक)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+