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Indonesia BrahMos Deal: इंडोनेशिया भारत से क्यों खरीदना चाहता है ब्रह्मोस? कौन है उसका सबसे बड़ा दुश्मन?

Indonesia BrahMos Missile Deal: ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के एयरबेस पर ब्रह्मोस मिसाइल द्वारा किए गए सटीक हमले ने दुनिया का ध्यान एक बार फिर भारत की सुपरसोनिक स्ट्राइक क्षमता की ओर खींचा है। इसके बाद से कई देशों ने ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम में रुचि दिखाई है।

फिलीपींस के बाद अब इंडोनेशिया भी इस मिसाइल को खरीदने के लिए भारत के साथ गंभीर बातचीत कर रहा है और यह डील जल्द फाइनल हो सकती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक छोटे से द्वीपीय देश को ब्रह्मोस मिसाइल की जरुरत क्यों पड़ी, उसे किस से खतरा है...

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इंडोनेशिया क्यों चाहता है ब्रह्मोस?

इंडोनेशिया दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग-मलक्का स्ट्रेट-के किनारे स्थित है। यह दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री चोकपॉइंट है, जहां से 40% से अधिक वैश्विक व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। इसके अलावा, इंडोनेशिया मलक्का, सुंडा और लोम्बोक जैसे महत्वपूर्ण सामुद्रिक रास्तों को नियंत्रित करता है, जिनकी चौड़ाई 18 किमी से 300 किमी तक है।

ऐसे में इन समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसके लिए प्राथमिक चुनौती है। ब्रह्मोस की तटीय बैटरी इस क्षेत्र में इंडोनेशिया की समुद्री रक्षा को बेहद मजबूत बना सकती है। उसकी लंबी रेंज, सुपरसोनिक स्पीड और उच्च सटीकता इसे तटीय सुरक्षा के लिए आदर्श हथियार बनाते हैं।

इंडोनेशिया की सबसे बड़ी स्ट्रेटेजिक चिंता

इंडोनेशिया की किसी भी देश से सीधी सैन्य दुश्मनी नहीं है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी चुनौती दक्षिण चीन सागर में चीन का विस्तारवादी रवैया है। चीन बार-बार इंडोनेशिया के नाटूना समुद्री क्षेत्र में घुसपैठ करता रहा है। चीनी कोस्टगार्ड, मछली पकड़ने वाली नावें और अनाधिकारिक पेट्रोलिंग अक्सर इंडोनेशिया के विशेष आर्थिक क्षेत्र में घुस जाती हैं, जिससे उसके समुद्री संसाधनों और स्थानीय मछुआरों को नुकसान होता है।

ड्रैगन अपने आर्थिक निवेशों और व्यापारिक रिश्तों का उपयोग कर इंडोनेशिया पर कूटनीतिक दबाव भी बनाता है। इंडोनेशिया इस दबाव से निकलकर अपनी समुद्री संप्रभुता को मजबूत करना चाहता है। ऐसे में ब्रह्मोस मिसाइल उसकी सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन रही है, क्योंकि यह चीन की गतिविधियों को रोकने के साथ अपने समुद्री क्षेत्र की रक्षा और तटीय निगरानी को मजबूत करने की क्षमता देती है।

ब्रह्मोस पर क्यों दुनिया ने दिखाई दिलचस्पी?

ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक है, जिसकी रफ्तार 2.8-3 माख तक है। यह जमीन, पानी और हवा-तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च की जा सकती है। ऑपरेशन सिंदूर में इसकी सटीक स्ट्राइक और पाकिस्तान के एयरबेस पर सफल प्रहार ने दुनिया को प्रभावित किया है। कई देशों ने इसे चीन और अन्य खतरों से निपटने के लिए प्रभावी हथियार माना है।

फिलीपींस ने पहले ही ब्रह्मोस खरीदकर तैनाती शुरू कर दी है, और अब इंडोनेशिया भी उसी राह पर है। भारत और इंडोनेशिया के बीच पहले से ही मजबूत रणनीतिक और रक्षा संबंध हैं। अगर यह डील होती है, तो इंडोनेशिया फिलीपींस के बाद दूसरा दक्षिण-पूर्व एशियाई देश होगा जो ब्रह्मोस खरीदेगा। यह भारत को एक टॉप-टियर डिफेंस एक्सपोर्टर के रूप में स्थापित करेगा और मेक इन इंडिया को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाएगा।

26-28 नवंबर की बैठक में हो सकती है बड़ी घोषणा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल सजाफ्री सजामसोएद्दीन 26 से 28 नवंबर के बीच भारत के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करेंगे और ब्रह्मोस डील पर निर्णायक बातचीत होने की संभावना है। यह डील 600 से 800 मिलियन डॉलर के बीच हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस के प्रदर्शन ने इंडोनेशिया का भरोसा और बढ़ा दिया है और अब वह इस मिसाइल को जल्द खरीदना चाहता है।

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