PM Kisan की 23वीं किस्त के बाद किसानों की लगी लॉटरी! अब सरकार देगी ₹22,500, जानें किसे और कैसे मिलेगा लाभ

Rajasthan Crop Loss Compensation: राजस्थान में खेती हमेशा मौसम के भरोसे नहीं चलती। कभी सूखा किसानों की उम्मीदों को झटका देता है तो कभी ओलावृष्टि, पाला या बेमौसम बारिश महीनों की मेहनत पर पानी फेर देती है। ऐसे हालात में सबसे बड़ी चिंता अगली फसल की तैयारी को लेकर होती है। क्योंकि नुकसान झेल चुके किसानों के सामने बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों का खर्च जुटाना आसान नहीं रहता।

इसी समस्या को देखते हुए पीएम किसान की 23वीं किस्त जारी होने के बाद राजस्थान सरकार ने किसानों के लिए राहत व्यवस्था को और मजबूत किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य में कृषि आदान अनुदान सहायता योजना लागू की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों तक जल्दी आर्थिक मदद पहुंचाना है ताकि वे बिना ज्यादा परेशानी के अगली बुवाई की तैयारी कर सकें।

Rajasthan Crop Loss Compensation

किन किसानों को मिलेगा फायदा

यह योजना उन किसानों के लिए बनाई गई है जिनकी फसल प्राकृतिक आपदा की वजह से बुरी तरह प्रभावित हुई है। सरकार ने इसके लिए एक तय मानक रखा है। यदि किसी किसान की खड़ी फसल को 33 प्रतिशत या उससे ज्यादा नुकसान हुआ है, तभी वह इस सहायता के लिए पात्र माना जाएगा। इससे कम नुकसान होने पर योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

पीएम किसान से कैसे अलग है यह योजना?

पीएम किसान सम्मान निधि योजना और कृषि आदान अनुदान सहायता योजना दोनों किसानों के लिए चलाई जाती हैं, लेकिन इनका उद्देश्य अलग है। पीएम किसान योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जबकि कृषि आदान अनुदान सहायता योजना केवल उन किसानों को राहत देने के लिए है जिनकी फसल प्राकृतिक आपदा के कारण कम से कम 33 प्रतिशत खराब हुई हो। पीएम किसान की राशि सभी पात्र किसानों को नियमित रूप से मिलती है, वहीं कृषि आदान अनुदान योजना में सहायता फसल नुकसान के आधार पर तय की जाती है।

नुकसान का कैसे होगा आकलन

फसल खराब होने की स्थिति में राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेगी। अधिकारी खेतों का निरीक्षण करेंगे और नुकसान की रिपोर्ट तैयार करेंगे। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सहायता राशि केवल उन्हीं किसानों तक पहुंचे जिन्हें वास्तव में नुकसान हुआ है। इसी वजह से 33 प्रतिशत नुकसान की शर्त को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है।

फसल के हिसाब से अलग-अलग सहायता

योजना के तहत मिलने वाली राशि सभी किसानों के लिए समान नहीं होगी। यह इस बात पर निर्भर करेगी कि फसल किस प्रकार की थी और खेती किस व्यवस्था के तहत की गई थी। राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) के नियमों के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग सहायता तय की गई है।

बारानी फसलों पर कितनी मदद

जिन क्षेत्रों में खेती मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर करती है, वहां फसल खराब होने पर किसानों को अधिकतम 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक सहायता दी जाएगी। राज्य के कई हिस्सों में किसान आज भी वर्षा आधारित खेती करते हैं। ऐसे इलाकों में यह राहत राशि तत्काल मदद का काम करेगी।

सिंचित खेती करने वालों को ज्यादा राहत

सिंचित क्षेत्रों में खेती की लागत अपेक्षाकृत अधिक होती है। पानी, बिजली और अन्य संसाधनों पर ज्यादा खर्च आता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सिंचित फसलों के नुकसान पर अधिकतम 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तक आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया है।

बगीचों और बारहमासी फसलों के लिए विशेष व्यवस्था

फलदार पौधे और बगीचे तैयार होने में कई साल लग जाते हैं। ऐसे में इनके नुकसान से किसानों को बड़ा आर्थिक झटका लगता है। यदि बारहमासी फसलें पूरी तरह नष्ट हो जाती हैं तो किसानों को अधिकतम 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि दी जाएगी। यह योजना के तहत मिलने वाली सबसे अधिक राहत राशि है।

आवेदन की जरूरत नहीं

इस योजना की सबसे खास बात यह है कि किसानों को किसी अलग आवेदन प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। न तो किसी दफ्तर के चक्कर लगाने होंगे और न ही किसी पोर्टल पर जाकर लंबा रजिस्ट्रेशन करना पड़ेगा। सरकार ने पूरी प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया है।

फसल नुकसान की जानकारी मिलने के बाद संबंधित क्षेत्र के पटवारी खेतों का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद तैयार रिपोर्ट को आपदा प्रबंधन विभाग के एकीकृत डीएमआईए पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। सत्यापन पूरा होने के बाद सहायता राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में DBT यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से भेज दी जाएगी।

खरीफ और रबी के लिए तय हुई समय सीमा

राहत वितरण में देरी रोकने के लिए सरकार ने स्पष्ट समय सीमा भी तय की है। खरीफ सीजन से जुड़ी फसल क्षति का पूरा विवरण हर साल 31 मार्च तक पोर्टल पर दर्ज करना होगा। वहीं रबी फसलों से संबंधित जानकारी 30 सितंबर तक अपलोड करना अनिवार्य रहेगा। सरकार का मानना है कि तय समय सीमा से किसानों को अगली फसल की तैयारी से पहले आर्थिक मदद मिल सकेगी।

सर्वे में नाम छूट जाए तो क्या करें

कई बार किसी कारणवश किसान का नाम सर्वे सूची में शामिल नहीं हो पाता। ऐसे मामलों के लिए भी अलग व्यवस्था बनाई गई है। राजस्थान सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए राज गिरदावरी ऐप उपलब्ध कराया है, जिसके जरिए किसान खुद भी अपनी फसल के नुकसान की जानकारी दर्ज कर सकते हैं।

राज गिरदावरी ऐप से मिलेगी मदद

किसान अपने मोबाइल से खराब फसल की तस्वीरें खींचकर ऐप पर अपलोड कर सकते हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारी मौके पर जाकर जांच करेंगे। यदि जानकारी सही पाई जाती है तो किसान का नाम लाभार्थी सूची में जोड़ दिया जाएगा और उसे भी योजना का लाभ मिलेगा।

सहायता राशि का पूरा विवरण

फसल का प्रकार अधिकतम सहायता राशि
वर्षा आधारित (बारानी) फसल 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर
सिंचित फसल 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर
बारहमासी फसल/बगीचे 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर

राजस्थान के उन इलाकों में जहां किसान हर साल मौसम की मार झेलते हैं, यह योजना राहत का बड़ा माध्यम बन सकती है। खास बात यह है कि पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है, जिससे जरूरतमंद किसानों तक सहायता राशि कम समय में पहुंच सके।

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