भारतीय बाजार से क्यों उखड़ गई स्पुतनिक वैक्सीन? जानिए रूसी वैक्सीन के साथ क्या गलत हुआ
मॉस्को स्थित गमलेया नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी ने स्पुतनिक वैक्सीन का निर्माण किया है और ये दुनिया की पहली रजिस्टर्ड कोरोना वायरस वैक्सीन थी।
मॉस्को, नवंबर 22: भारतीय बाजार में रूसी वैक्सीन स्पुतनिक काफी धूम-धाम से आई थी और भारत के लोगों में रूसी वैक्सीन स्पुतनिक को लेकर काफी दिलचस्पी थी और कई लोग स्पुतनिक वैक्सीन लेने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन, कुछ लाख खुराक भेजने के बाद भारत में स्पुतनिक वैक्सीन का आना बंद हो गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि, आखिर रूस ने स्पुतनिक को भारतीय बाजार में भेजना क्यों बंद कर दिया?

स्पुतनिक के साथ दिक्कत
स्पुतनिक वैक्सीन की दूसरी खुराक के अनुमानित उत्पादन की तुलना में धीमी, भारी कोल्ड स्टोरेज की आवश्यकताएं, डब्ल्यूएचओ की मंजूरी लंबित, रूस में बढ़ते कोविड-19 मामले और निजी अस्पतालों में कम मांग ने भारत में रूसी वैक्सीन की वापसी पर मुहर लगा दिया है। अप्रैल के दूसरे सप्ताह में देश के दवा नियामक से मंजूरी मिलने के बाद स्पुतनिक वी वैक्सीन को पहली बार 1 मई को भारत में लॉन्च किया गया था।

दुनिया का पहला कोरोना वैक्सीन
मॉस्को स्थित गमलेया नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी द्वारा विकसित स्पुतनिक वी वैक्सीन, रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा रजिस्टर्ड किया गया था और "कोरोनावायरस के खिलाफ दुनिया का पहला रजिस्टर्ड टीका" बन गया। लेकिन, भारत सरकार से मंजूरी मिलने के बाद अब 6 महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन स्पुतनिक वैक्सीन भारत में व्यावसायिक तौर पर उपलब्ध नहीं है। भारत में सिर्फ 11 लाख 13 हजार टीके ही स्पुतनिक वैक्सीन के लगे हैं।

डॉ. रेड्डी लैब से समझौता
रूस ने भारत में स्पुतनित वैक्सीन के डिस्ट्रीब्यूशन के लिए दवा निर्माता कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरी के साथ एफडीआई के तहत समझौता किया था और भारत में स्पुतनिक वैक्सीन का एकमात्र डिस्ट्रीब्यूटर डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरी को ही बनाया गया था। लेकिन, रूस ने स्पुतनिक वी टीके की 31 लाख पहली खुराक और सिर्फ 4.5 लाख दूसरी खुराक ही भारत भेजी और उसके बाद से रूसी टीके का भारत आना बंद हो गया। दोनों खुराक में बेमेल के बाग भारत में स्पुतनिक वी वैक्सीन के रोलआउट को रोक दिया था। वैक्सीन विशेषज्ञों का कहना है कि, स्पुतनिक वी की सबसे बड़ी चुनौती दूसरी खुराक के उत्पादन में है। इसे प्रयोगशाला में तैयार करने में काफी मुश्किलें आती हैं और इसका डिस्ट्रीब्यूशन करना भी काफी मुश्किल काम है। हालांकि, डॉ रेड्डीज के मुताबिक, सितंबर से स्थिति नियंत्रण में आ गई थी, क्योंकि भारत में उतनी मात्रा में वैक्सीन का निर्माण कर लिया गया।
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कैसे बनती है स्पुतनिक वी वैक्सीन?
स्पुतनिक वैक्सीन का दोनो खुराक दो अलग अलग कंपोनेंट्स से मिलकर बनी है, जिसमें पहले खुराक को एडेनोवायरस वेक्टर 26 (AD26) को रिकंबाइंड करके बनाया गया है, जिसे प्राइम खुराक के तौर पर माना जाता है, और दूसरा खुराक एडेनोवायरस वेक्टर 5 से बना है। ये दोनों वायरस सामान्य सर्दी के वायरस की तरह इंसानों पर अपना असर दिखाता है। जहां Ad26 वैक्सीन की पहली खुराक है, वहीं Ad5 दूसरा शॉट है, जिसे 21 दिन या तीन सप्ताह के अंतराल पर दिया जाता है। डॉ. रेड्डी के प्रवक्ता के अनुसार, जबकि दो-खुराक वाले स्पुतनिक वी वैक्सीन को मई में भारत में एक सॉफ्ट पायलट के रूप में लॉन्च किया गया था, इसे आरडीआईएफ से आयातित खेप के आधार पर जुलाई से व्यावसायिक रूप से शुरू किया गया था। लैब के मुताबिक, "हमने भारत भर के प्रमुख अस्पतालों के साथ पार्टनरशिप की, और अपनी कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित किया क्योंकि टीके के लिए माइनस 18 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है।"

भारतीय बाजार में डिमांड हो गई कम
विश्लेषकों के मुताबिक, मई महीने के बाद जब भारत के लोग जल्द से जल्द वैक्सीन का टीका लेना चाह रहे थे, उस वक्त स्पुतनिक वैक्सीन सप्लाई करने में नाकामयाब रहा। वहीं, डॉ रेड्डीज लैब के प्रवक्ता ने न्यूज-18 से बात में कहा कि, उन्हें रूस से पहली खुराक की 31.5 लाख डोज और दूसरी खुराक की सिर्फ 4.5 लाख डोज ही मिली। लैब के मुताबिक, जून महीने से अगस्त की अवधि में दूसरी खुराक मिलने में काफी चुनौतियां आईं और दूसरी तरफ रूस में कोरोना वायरस का ग्राफ भी तेजी से बढ़ता चला गया, जिससे वैक्सीन की आपूर्ति और कम होती चली गई। लैब ने कहा कि, सितंबर महीने के बाद आपूर्ति को फिर से बहुत हद तक सही कर लिया गया, लेकिन तब तक भारतीय बाजार में स्पुतनिक वी वैक्सीन की डिमांड ही कम हो गई।

दूसरे खुराक में देरी चिंता की बात
विशेषज्ञों का कहना है कि स्पुतनिक की सबसे बड़ी चुनौती Ad5 वायरल वेक्टर का उत्पादन है। दूसरे शॉट की खराब उत्पादन की समस्या का समाधान अभी तक नहीं किया गया है। और यह एक बड़ा कारण है कि रूसी फर्म और डॉ रेड्डीज ने अब एक नए सिंगल शॉट वैक्सीन - स्पुतनिक लाइट पर ध्यान केंद्रित किया हुआ है, जिसमें लोगों को दूसरी खुराक की जरूरत नहीं होती है। लेकिन, उसके लिए दिक्कत ये है कि, आपके पास पहली खुराक की प्रचूर मात्रा होनी चाहिए।

स्पुतनिक पर आईसीएमआर का बयान
जिनेवा में अक्टूबर के अंत में पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के डायरेक्टर डॉ. बलराम भार्गव ने स्पष्ट किया था कि, ''भारत में मुख्य तौर पर स्पुतनिक वी वैक्सीन का इस्तेमाल नहीं किया है, लेकिन हां, बहुत सारे भारतीयों ने स्पुतनिक वी वैक्सीन की खुराक ली है"। भार्गव ने कहा था कि "भारत और रूस आपसी सहयोग की मदद से स्पुतनिक वैक्सीन का उत्पादन अब भारत में कर रहे हैं और खुराक को रूस में भी निर्यात किया जा रहा है। उन्होंने भी यही कहा कि, हम पहली खुराक का निर्माण आसानी से कर सकते हैं लेकिन दूसरी खुराक के निर्माण में हमें अभी भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।












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