China Economy: चावल, कूकर, माइक्रोवेव बचाएंगे चीन की अर्थव्यवस्था? सबसे बड़ी मुश्किल में फंस गया है ड्रैगन
China Economy News: दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन कमजोर उपभोक्ता मांग, गहराते संपत्ति संकट और उच्च बेरोजगारी दर से जूझ रहा है, इन सभी ने देश के विकास को इतना ज्यादा धीमा कर दिया है, कि ड्रैगन का हाल बेहाल हो चुका है अपस्फीति ने चीन की इकोनॉमी को बेहाल कर दिया है।
अपस्फीति वो स्थिति है, जब सामानों की कीमत इतनी ज्यादा कम हो जाती है, कि कंपनियों का मुनाफा ही खत्म हो जाता है और इकोनॉमी पर इसका खतरनाक असर पड़ता है। चीन में पिछले कई महीनों से त्राहिमाम मचा है और देश की अर्थव्यवस्था गोते खा रही है और अगर यही स्थिति रही, तो आने वाले समय में कम्युनिस्ट देश की स्थिति बेहाल हो सकती है।

चीन की अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति क्या है?
चीन ने मुद्रास्फीति के कमजोर आंकड़ों की एक और रिपोर्ट दी है, जिससे संकेत मिलता है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अभी भी मंदी में है। दिसंबर में उपभोक्ता मूल्य (CPI) में साल-दर-साल सिर्फ 0.1% की वृद्धि हुई, जो नौ महीनों में सबसे कम है। थोक मुद्रास्फीति का एक पैमाना उत्पादक मूल्य (PPI) साल-दर-साल 2.3% गिर गया है, जो नवंबर में 2.4% की गिरावट के बाद एक मामूली वृद्धि है।
अप्रैल 2023 से चीनी मुद्रास्फीति लगभग शून्य हो गई थी, जो डिमांड के पूरी तरह से खत्म होने की स्थिति को दर्शाता है। वहीं, क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI) डेटा 2023 की पहली तिमाही में गतिविधि में उछाल दिखाता है, जिसके बाद स्थिति में थोड़ी सुधार की संभावना बनती दिख रही है।
मौजूदा हालात ये है, कि चीन की GDP पिछले 6 महीने में मामूली वृद्धि ही हासिल कर पाई है। और प्राइस ग्रोथ 0.9 निगेटिव हो गया है और कोविड-19 लॉकडाउन के बाद देश को फिर से खोलने की कोशिश नाकाम दिख रही है। चीनी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए भारी भरकम प्रोत्साहन राशि भी जारी गई, लेकिन वो भी अभी तक नाकाम रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में सब्जियों की कीमत 2.4 प्रतिशत और फलों के दाम 1 प्रतिशत और गिर गये हैं, जिससे किसानों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है। और इन मुस्किलों से निपटने के लिए चीन अब अपने ट्रेड-इन कार्यक्रम का विस्तार करना चाहता है, ताकि घरेलू उपकरणों और डिजिटल सामानों में सब्सिडी दे, ताकि कंपनियां सामानों के दाम निकाल सके।
लेकिन, अर्थशास्त्रियों के बीच ये बहस चल रही है, कि क्या इन उपायों से चीन अपनी देश की अर्थव्यवस्था को बचा पाएगा?

चीन ने सब्सिडी का दायरा बढ़ाया
चीन की ट्रेड-इन योजना, जिसे मूल रूप से मार्च 2024 में लॉन्च किया गया था, उसने उपभोक्ताओं को विशेष ट्रेजरी बॉन्ड द्वारा वित्तपोषित सब्सिडी के साथ पुराने उपकरणों और वाहनों को बदलने की अनुमति दी है। कार्यक्रम का प्रारंभिक बजट 150 बिलियन युआन (21 बिलियन डॉलर) था, जिसे अब 2025 के लिए आवंटित 81 बिलियन युआन (11 बिलियन डॉलर) के साथ बढ़ा दिया गया है।
माइक्रोवेव ओवन, डिशवॉशर, राइस कुकर और वाटर प्यूरीफायर जैसे नए शामिल किए गए आइटम, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, टेलीविज़न, सेलफ़ोन और हाइब्रिड वाहनों जैसे पहले से पात्र उत्पादों में शामिल हो गए हैं। उपभोक्ता 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं, जिसमें कुछ डिजिटल उपकरणों के लिए 6,000 युआन की सीमा है।
अधिकारियों ने कार्यक्रम की शुरुआती सफलता की प्रशंसा की है। वाणिज्य मंत्रालय के ली गैंग ने बताया कि इस पहल ने अकेले 2024 में ऑटो बिक्री में 920 बिलियन युआन और घरेलू उपकरणों की बिक्री में 240 बिलियन युआन उत्पन्न किए हैं। सरकार अपने इस कार्यक्रम की काफी तारीफ कर रही है।
हालांकि, सब्सिडी के पैमाने पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट के वरिष्ठ अर्थशास्त्री जू तियानचेन ने कहा, कि "हमें उम्मीद है कि 2025 में कुल सब्सिडी का आकार दोगुना होकर 300 बिलियन युआन हो जाएगा। यह कुछ हद तक ज्यादा खपत की ओर नीतिगत बदलाव को दर्शाता है।"
क्या चीन अपनी अर्थव्यवस्था में आए भूकंप को संभाल पाएगा?
जैसे-जैसे चीनी नववर्ष (29 जनवरी 2025) नजदीक आ रहा है, कुछ विश्लेषकों को उम्मीद है कि मौसमी कारक उपभोक्ता खर्च को अस्थायी रूप से बढ़ावा देंगे। हालांकि, गैर-खाद्य मुद्रास्फीति के रुझान और कृषि उत्पादों के लिए थोक मूल्यों में कमी से क्रय शक्ति में धीमी रिकवरी का संकेत मिलता है।
चीन का शीर्ष नेतृत्व घरेलू मांग को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है। एक प्रमुख नीति दस्तावेज में उच्च-स्तरीय, स्मार्ट और हरित उपकरण उन्नयन पर ध्यान केंद्रित करने की योजनाओं पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें उपकरण अपग्रेडेशन ऋण के लिए ब्याज दरों पर सब्सिडी और अल्ट्रा-लॉन्ग ट्रेजरी बॉन्ड से विस्तारित फंडिंग शामिल है।
चीन की तरफ से जल्द ही 2024 के आर्थिक विकास के आंकड़ों की घोषणा करने की उम्मीद है, जिसके अनुमान 5 प्रतिशत के आसपास हैं। जबकि ट्रेड-इन योजना जैसे कार्यक्रम सरकार के मजबूत संकल्प को प्रदर्शित करते है, लेकिन एक्सपर्ट्स को उम्मीद कम है, कि इससे रोजगार की संख्या बढ़ेगी और देश अपनी इकोनॉमी में सुधार कर पाएगा?












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