पाकिस्तान में इमरान ख़ान के साथ और ख़िलाफ़ कौन है?

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ़्तार कर लिया गया है. देश भर में उनके समर्थक प्रदर्शन कर रहे हैं.

इमरान ख़ान
Reuters
इमरान ख़ान

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को मंगलवार को इस्लामाबाद हाईकोर्ट के बाहर से सुरक्षा बलों ने गिरफ़्तार कर लिया.

इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी पर इस्लामाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान शहर के पुलिस प्रमुख अकबर नासिर कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने बताया कि इमरान ख़ान को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ़्तार किया गया है.

सोमवार को इमरान ख़ान ने ट्विटर पर शहबाज़ शरीफ़ से कई सवाल किए थे. उन्होंने पूछा था कि 'क्या सेना के अधिकारी क़ानून से ऊपर होते हैं? उन्हें (इमरान) संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करने से क्यों वंचित किया जा रहा है?'

इमरान की गिरफ़्तारी का पाकिस्तान के शेयर बाज़ार पर भी असर हुआ.

मंगलवार को शेयर बाज़ार का सूचकांक चार सौ अंक से ज़्यादा की गिरावट के साथ बंद हुआ.

पाकिस्तान
EPA
पाकिस्तान

'पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ेगी'

स्टॉक मार्केट के एक जानकार के अनुसार, देश की राजनीतिक-आर्थिक स्थिति की वजह से स्टॉक मार्केट पहले से ही दबाव में था और अब इमरान ख़ान गिरफ़्तारी की वजह से यह और भी लुढ़क गया. मार्केट में उथल-पुथल की स्थिति पैदा हो गई और एक घंटे के भीतर ही शेयर बेचने के लिए मारामारी शुरू हो गई.

स्टॉक मार्केट ब्रोकर्स को आशंका है कि इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी से देश में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ेगी और स्टॉक मार्केट पर इसका बुरा असर होगा.

इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी की चर्चा काफ़ी समय से चल रही थी. बीबीसी हिंदी की संवाददाता प्रेरणा ने बीबीसी उर्दू के संपादक आसिफ़ फ़ारूक़ी से मामले के पीछे की वजहों को समझने के लिए कुछ सवाल पूछे.

ये भी पढ़ें:- इमरान ख़ान को क्यों किया गिरफ़्तार और उन पर कितने मुक़दमे दर्ज हैं

इमरान खान
Getty Images
इमरान खान

ग़ैरक़ानूनी तरीके से ज़मीन ख़रीदने का मामला

सवाल- इमरान ख़ान की गिरफ़्तारी की चर्चा बहुत दिनों से चल रही थी, बात अचानक उनकी गिरफ़्तारी तक कैसे पहुँच ग?

जवाब- ये अचानक नहीं हुआ है. बैकग्राउंड में कार्रवाई चल रही थी. नेशनल अकाउंटिबिलिटी ब्यूरो (नैब) पाकिस्तान में भष्ट्राचार के प्रति जवाबदेह संस्था है.

उसने इमरान ख़ान और उनकी पत्नी को नोटिस भी भेजा था. इसमें उन्हें कहा गया था कि वे पेश हों और उनसे कुछ सवालों के जवाब भी मांगे गए थे. जिसका जवाब उन्होंने नहीं दिया, तब धीरे-धीरे बात गिरफ़्तारी तक पहुंच गई.

ये मामला इमरान ख़ान के प्रधानमंत्री पद पर रहने के दौरान का है. तब उन्होंने पंजाब (पाकिस्तान) में आध्यात्म और सूफ़ीवाद पर काम करने के लिए एक यूनिवर्सिटी बनाने की इज़ाजत दी थी.

उस यूनिवर्सिटी को बनाने के लिए पंजाब सरकार ने कुछ ज़मीनें ख़रीदी थीं. नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो का मानना है कि इमरान ख़ान और उनकी पत्नी ने उस ज़मीन को ख़रीदने में ग़बन किया है.

ज़मीन को ग़ैरक़ानूनी तरीके से ख़रीदा गया है जिससे सरकार को नुक़सान हुआ है. इसी आधार पर कुछ महीने पहले इमरान ख़ान पर भष्ट्राचार के आरोप लगाए गए.

ये भी पढ़ें:- इमरान ख़ान: इस्लामाबाद में गिरफ़्तार हुए कप्तान की सियासी बॉलिंग का सफ़र

नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो का इस्तेमाल

सवाल- नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो की कमान किसके हाथ में है और कैसे काम करती है?

जवाब- नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो कुछ सालों में विवादित संस्था बन गई है.

परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपने कार्यकाल में इसे बनाया था. उन्होंने इसका इस्तेमाल विरोधी नेताओं को चुप कराने के लिए काफ़ी ज़्यादा किया था.

इस संस्था के पास काफ़ी शक्तियां थीं. नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो किसी को भी गिरफ़्तार करने के बाद 60 दिनों तक रिमांड में ले सकती थी.

इमरान ख़ान की सरकार के दौरान पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नेता भी इसकी हिरासत में रहे हैं. इसमें नवाज़ शरीफ़ और मरियम नवाज़ भी शामिल हैं.

लेकिन जब इमरान ख़ान की सरकार चली गई तब नई सरकार ने सोचा कि इस संस्था के पास व्यापक शक्तियां हैं और इसकी मदद से विरोधी नेताओं के ऊपर कार्रवाई की जाती है, इसलिए उन्होंने इसकी शक्तियों को कम कर दिया है.

आज का नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो साल भर पहले से काफ़ी कम शक्तियों के साथ काम कर रहा है. सारी सरकारों ने अपने राजनीतिक एजेंडे को साधने के लिए इस संस्था का इस्तेमाल किया है.

ये भी पढ़ें:- बिलावल की कश्मीर पर टिप्पणी से भारत ग़ुस्सा, क्या पाकिस्तान की सुनेगी दुनिया?

लाहौर
EPA
लाहौर

सवाल- इमरान ख़ान के पास क्या क़ानूनी रास्ते हैं, पहले कई बार उन्हें अदालत से राहत मिली है, इस बार क्या हो सकता है?

जवाब- ये क़ानूनी से ज़्यादा सियासी मामला है. क़ानूनी तौर पर तो उन्हें राहत मिलती रहती है फिर नए मामले दर्ज होते हैं.

जैसा मैंने कहा कि नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो के क़ानून अब उतने प्रभावशाली नहीं हैं जितने पिछले साल तक थे.

तब लोगों को जम़ानत मुश्किल से मिलती थी. दो-दो साल तक ज़मानत नहीं मिलती थी.

लेकिन तुलनात्मक रूप से अब इमरान ख़ान को ज़मानत मिलना आसान है.

लेकिन पाकिस्तान में राजनेताओं के ऊपर भष्ट्राचार के जो मामले होते हैं उनके आधार सिर्फ़ क़ानूनी नहीं होते, उन्हें राजनीतिक संदर्भों में भी देखा जाना चाहिए.

इसके बाद ही आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि मामला कहां जाकर ख़त्म होगा. इमरान ख़ान के मामले में भी क़ानूनी बहस ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं है. दरअसल राजनीतिक हालात सारे मामले पर प्रभाव डाल रहे हैं.

ये भी पढ़ें:- मुज़फ़्फ़रनगर दंगेः क्या था गैंगरेप का मामला जिसमें 9 साल बाद हुई सज़ा

इमरान ख़ान
Getty Images
इमरान ख़ान

सेना का समर्थन

सवाल- पाकिस्तान में उनकी अपनी पार्टी के अलावा कौन लोग इमरान के साथ हैं, और कौन लोग उनके ख़िलाफ़ हैं, मसलन, आर्मी, ज्यूडिशियरी और दूसरी सियासी जमातों का क्या रुख़ है?

जवाब- हमने ये देखा कि जब से इमरान ख़ान सरकार से बाहर हुए हैं, तब से उन्हें अदालत की ओर से काफ़ी सपोर्ट मिला है.

इमरान ख़ान के राजनीतिक विरोधी ये भी कहना शुरू कर चुके हैं कि अदालत में सुनवाई कर रहे जज भी तहरीक़-ए-इंसाफ़ पार्टी के समर्थक के तौर पर इमरान ख़ान के हक़ में फ़ैसले दे रहे हैं.

इससे पहले भी इमरान को गिरफ़्तार करने की कई कोशिशें हुई हैं, लेकिन उन्हें अदालत की तरफ़ से अभूतपूर्व राहत दी गई है.

राहत के तौर पर अदालतों ने उनके अरेस्ट वारंट को तब तक सस्पेंड रखा है, जब तक वो अदालत के सामने पेश न हो गए हों.

जब भी वो अदालत में पेश हुए हैं उन्हें ज़मानत मिली है. साल भर पहले तक पाकिस्तानी आर्मी ने कहा था कि अब आर्मी राजनीतिक मामलों में दख़लअंदाजी को कम कर देगी.

जानकारों का मानना है कि पिछले एक-डेढ़ साल में आर्मी ने बहुत हद तक ख़ुद को राजनीति से दूर रखा है. लेकिन इससे पाकिस्तान के सत्ता के गलियारों में जो एक खालीपन पैदा हुआ उसे अदालतों ने भर दिया है.

चूंकि अदालत इमरान ख़ान को काफ़ी राहत दे रही है, तो ऐसा लग रहा है जैसे इमरान लोगों के सामने ख़ुद स्थापित हो रहे हैं. उनका दावा है कि आर्मी के भीतर ऐसे लोग हैं जो उनका समर्थन करते हैं और अदालत से उन्हें समर्थन मिल ही रहा है.

जैसे पाकिस्तान के आम राजनेता होते हैं वैसे इमरान ख़ान नहीं हैं. उनके पास एक ग़ैर-मामूली शक्तियां आई हुई हैं, जिसका वो अच्छे से इस्तेमाल कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें:-हज की सीटें पाकिस्तान ने सऊदी अरब को क्यों लौटाईं

इमरान खान
ANI
इमरान खान

सियासी असर

सवाल- इस गिरफ़्तारी का सियासी नतीजा क्या होगा? सरकार के लिए और इमरान के लिए इसके क्या परिणाम हो सकते हैं. पाकिस्तान में इसी साल चुनाव होने तय हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए क्या लगता है, चुनाव हो पाएँगे? इमरान ख़ान तो लंबे समय से तुरंत चुनाव की माँग करते रहे हैं?

जवाब- इस गिरफ़्तारी का क्या नतीज़ा होगा ये इस बात पर निर्भर करता है कि गिरफ़्तारी कितने देर के लिए होती है.

अगर महीने भर के भीतर ज़मानत पर बाहर आ जाते हैं तो ये उनकी राजनीति को और ज़्यादा मज़बूत बनाएगी.

लेकिन अगर वे चुनाव के बाद तक गिरफ़्तार रहते हैं तब ये तहरीक-ए-इंसाफ़ के लिए नाकामयाबी साबित हो सकती है.

तहरीक-ए-इंसाफ़ भी पाकिस्तान की बाकी पार्टियों की तरफ एक व्यक्ति पर केंद्रित पार्टी है.

जैसे इमरान ख़ान सड़क पर होते हैं तब लोग सड़क पर निकलते हैं, अगर चुनावी कैंपेन में खु़द नहीं जाते हैं तब ये पीटीआई के लिए बड़ी मुश्किलों वाला वक़्त होगा.

इसकी दो वजहें हैं- पहला, जब उम्मीदवारों को टिकट देने की बारी आएगी तब पार्टी को काफ़ी समस्याएं आएंगी. दूसरा, जब इमरान ख़ान की अपील लोगों के बीच नहीं होगी तब पार्टी को नुक़सान झेलना पड़ सकता है.

ये भी पढ़ें:-

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+