कोरोना को लेकर कठघरे में WHO, क्या अकेला चीन उसे बचा पाएगा?

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहली बार राजनीतिक विवादों के दलदल में फंस गया है। WHO पर चीन के हाथों खेलने का आरोप है। कोरोना संक्रमण को रोकने में WHO की भूमिका कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी रही, अब इस बात की जांच हो सकती है। भारत समेत 62 देशों ने जांच के प्रस्ताव पर दस्तखत किये हैं। भारी दबाव के बीच WHO भी इसके लिए राजी हो गया है। हालांकि प्रस्ताव में चीन या वुहान का जिक्र नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम गैब्रियसस को एक्सपोज करने के लिए यह प्रस्ताव लाया गया है। अमेरिका खुले तौर पर WHO को चीन समर्थक बता चुका है और दंडस्वरूप उसके फंड को भी रोक लिया है। दुनिया के कई देश चीन पर कोरोना की जानकारी छिपाने का आरोप लगा चुके हैं। कई खोजी रिपोर्ट में चीन के इस फर्जीवाड़े का सबूत भी मिला। लेकिन WHO लगातार इस बात का खंडन करता रहा। अब कोरोना संकट पर WHO और इसके महानिदेशक, दोनों सवालों के घेरे में हैं। अब सवाल ये है कि चीन अकेले कैसे इन्हें बचाता है?

WHO पर आरोप
ताइवान ने 31 दिसम्बर 2019 को ही विश्व स्वास्थ्य संगठन को चेताया था कि इंसानों से इंसानों में संक्रमित होने वाली यह बीमारी बहुत नुकसानदायी हो सकती है। लेकिन ताइवान की इस सूचना को सगंठन ने गंभीरता से नहीं लिया।WHO चीन के इशारे पर जनवरी के मध्य तक यही कहता रहा कि वुहान में प्रस्फुटित हुआ वायरस इंसानों से इंसानों में नहीं फैलता। इस जानकारी से दुनिया के देश भ्रमित हुए। जब कि कोरोना वायरस इंसानों के जरिये वुहान से दूसरे देशों में फैलता रहा।WHO ने समय रहते कोरोना वायरस के बारे में दुनिया के देशों को अगाह नहीं किया। WHO ने चीन की इस बात के लिए तारीफ की थी उसने कोरोना महामारी पर तीन महीने में ही काबू पा लिया। जबकि उस समय वुहान के अस्पतालों को कोरोना फ्री दिखाने के लिए कई रोगियों को जबरन घर भेज दिया गया था। अमेरिकी सिनेटर ने महानिदेशक के बयान की जांच की मांग की थी।WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एडनॉम गैब्रियसस चूंकि चीन के समर्थन से इस पद पर पहुंचे थे इसलिए उन्होंने जानबूझ कर चीन की गलती को छिपाया। साम्यवादी विचारों के टेड्रोस एडनॉम को चीन का समर्थक माना जा रहा है।विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO संयुक्त राष्ट्र की एक अनुषंगी इकाई है। इसकी स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी। इसका मुख्य काम दुनिया भर की स्वास्थ्य समस्याओं पर ध्यान रखना और उसका निदान बताना है। स्मॉल पॉक्स बीमारी को खत्म करने में यह संगठन प्रभावकारी भूमिका निभा चुका है। लेकिन कोरोना संकट के समय यह विवादों में आ गया है। विवाद के केन्द्र में हैं WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम गैब्रियसस।

कौन हैं टेड्रोस एडनॉम?
टेड्रोस एडनॉम गैब्रियसस अफ्रीकी देश इथोपिया के रहने वाले हैं। वे WHO के पहले ऐसे महानिदेशक हैं जो डॉक्टर नहीं हैं। उन्होंने बायोलॉजी से ग्रेजुएशन किया है और इम्यूनोलॉजी ऑफ इन्फेक्सस डिजीज में मास्टर डिग्री हासिल की है। कम्युनिटी हेल्थ में उन्होंने डॉक्टरेट किया है इस लिए अपने नाम के आगे डॉक्टर लगाते हैं। शिक्षा पूरी करने के बाद टेड्रोस ने इथोपिया में जूनियर हेल्थ एक्सपर्ट के रूप में नौकरी की। फिर वे टिगरे प्रांत के हेल्थ ब्यूरो में प्रमुख बने। 2005 में वे इथोपिया के स्वास्थ्य मंत्री और 2012 में विदेश मंत्री बने। 2017 में WHO के महानिदेशक पद का चुनाव होना था। टेड्रोस ने अफ्रीकी यूनियन की मदद से इस पद के लिए चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी।

टेड्रोस एडनॉम क्यों है विवादों में?
टेड्रोस जब 2017 में WHO के महानिदेशक पद का चुनाव लड़ने के लिए मैदान में कूदे उसी समय विवादों में आ गये थे। इथोपिया के कई दलों ने उनके चुनाव लड़ने का इसलिए विरोध किया था क्यों वे विवादित संगठन टिगरे लिबरेशन फ्रंट से जुड़े हुए थे। यह वामपंथी संगठन सशस्त्र क्रांति में भरोसा रखता था। तब यह भी आरोप लगा था कि टिगरे लिबरेशन फ्रंट ने टेड्रोस को चुनाव लड़ने के लिए लाखों डॉलर की सहायता दी थी। उस समय अमेरिका, इंग्लैंड और कनाडा जैसे देश इंग्लैंड के चिकित्सक और वैज्ञानिक डॉ. डेविड नबारौ को महानिदेशक बनाना चाहते थे। टेड्रोस, डेविड समेत कुछ छह प्रत्याशी मैदान में थे। कहा जाता है चीन ने इथोपिया में बड़ा पूंजी निवेश किया है और उसकी शुरू से टेड्रोस में खास दिलचस्पी थी। ऊपर से टेड्रोस साम्यवाद के समर्थक थे। तब चीन ने एशिया और अफ्रीका के देशों को पश्चिमी शक्तियों के खिलाफ लामबंद किया। इस चुनाव के एक पर्यवेक्षक ने तब कहा था कि यह बहुत ही खराब चुनाव था। चुनाव के पहले टेड्रोस पर आरोप लगा था कि जब वे इथोपिया के स्वास्थ्य मंत्री थे तब वे हैजा से निबटने में तीन बार नाकाम रहे थे। 2006, 2009 और 2011 में हैजा ने जब इथोपिया में भयंकर तबाही मचायी थी तब टेड्रोस स्वास्थ्य मंत्री के रूप में फेल हो गये थे। लेकिन इन सब के वावजूद वे चीन की मदद से WHO का महानिदेशक बनने में कामयाब रहे थे।

टेड्रोस से इस्तीफे की मांग
जनवरी 2020 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस ने चीन के राष्ट्रपति शी जिन पिंग से मुलाकात की थी। उन्होंने तब कोरोना से निबटने के मामले में चीन की खूब तारीफ की थी। इतना ही नहीं टेड्रोस ने चीनी की सत्तारुढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की भी प्रशंसा की थी कि वह जनता को इस संकट से उबारने में काबिले तारीफ काम कर रही है। हद तो यह थी कि टेड्रोस ने उस समय (जनवरी में) भी चीन की यात्रा की वकालत की थी। लेकिन बाद में स्थितियां तेजी से बदलने लगीं। जब चीन ने बाद में खुद कोरोना से हुई मौत के आंकड़ों में संशोधन किया तो WHO की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे। फिर जब यह प्रमाणित हो गया कि कोरोना वायरस की सच्चाई बताने वाले चीन के प्रमुख लोग या तो गायब हो गये या फिर उनकी संदेहास्पद स्थितियों में मौत हो गयी तो टेड्रोस शक के दायरे में आ गये। who के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एडनॉम गैब्रियसस का कार्यकाल 2022 तक है। लेकिन अब अधिकतर देश उनसे से इस्तीफा की मांग करने लगे हैं। अगर दुनिया भर में कोरोना संक्रमण फैलने की जांच होती है तो टेड्रोस एडनॉम का किया-धरा सब सामने आ जाएगा। तब चीन चाह कर भी उन्हें बचाने में कामयाब नहीं हो पाएगा।
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