अमेरिका का ईरान पर महाविनाशक प्रहार! 2,200 किलो के बंकर बस्टर बमों से पाताल में छिपे मिसाइल अड्डों को किया राख
US Iran War Update: मिडिल ईस्ट (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे भीषण सैन्य प्रहार करते हुए उसके दक्षिणी तट पर स्थित मिसाइल अड्डों को निशाना बनाया है। इस हमले में अमेरिका ने अपनी सबसे घातक सैन्य शक्ति, 2,200 किलोग्राम (5,000 पाउंड) वजनी 'बंकर बस्टर' बमों का इस्तेमाल किया है, जिससे पूरी खाड़ी क्षेत्र में महायुद्ध के बादल गहरा गए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह सर्जिकल स्ट्राइक सीधे तौर पर ईरान की उन एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों को तबाह करने के लिए की गई थी, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बनी हुई थीं। 2,200 किलो के इन विशेष बमों ने जमीन के सैकड़ों फीट नीचे बने अभेद्य बंकरों को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया है।

NATO देशों पर फूटा ट्रंप का गुस्सा
इस हमले के कुछ ही देर बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मीडिया से बात करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। ट्रम्प ने खुलासा किया कि अधिकांश NATO सहयोगी देश इस जंग में अमेरिका और इजरायल के साथ खड़े तो हैं, लेकिन वे सीधे तौर पर अपनी सेना या संसाधन भेजने से पीछे हट रहे हैं। उन्होंने सहयोगियों के इस रुख को 'बेहद चौंकाने वाला' करार दिया, हालांकि उन्होंने फिलहाल किसी पर कार्रवाई के संकेत नहीं दिए हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट
दुनिया की 20% तेल सप्लाई का रास्ता (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) मार्च की शुरुआत से ही बंद है, जिससे वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी ने साफ कर दिया है कि वे इस संघर्ष का हिस्सा नहीं बनेंगे और न ही अपने युद्धपोत भेजेंगे। अमेरिका और इजरायल का ईरान के खिलाफ यह साझा अभियान अब अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है।
दुनिया पर महाविनाश का खतरा
खाड़ी देशों में छिड़ी यह जंग अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गई है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा आर्थिक और ऊर्जा संकट बन गई है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति की कमर टूट गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में जबरदस्त आग लग गई है। दुनिया भर में ऊर्जा की भारी कमी का डर पैदा हो गया है, क्योंकि इसी रास्ते से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अपनी तेल और गैस की जरूरतें पूरी करता है।
युद्ध की आग अब तेजी से फैल रही है, जहां इजरायल ने लेबनान के साथ अपने संघर्ष को बढ़ाते हुए राजधानी बेरूत को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। दूसरी ओर, ईरान भी शांत बैठने को तैयार नहीं है और उसने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत कई अमेरिकी सहयोगियों के तेल ठिकानों और हवाई अड्डों को अपना निशाना बनाया है।
दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास हुए ड्रोन हमलों और फुजैराह में तेल सुविधाओं पर हुई बमबारी ने वैश्विक निवेशकों के बीच हड़कंप मचा दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि इराक से लेकर लेबनान तक हर तरफ बर्बादी का मंजर है और आम जनता बंकरों में रहने को मजबूर है। यदि यह तनाव जल्द नहीं थमा, तो दुनिया एक ऐसी आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकती है जिससे उबरना नामुमकिन होगा।












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