Israel Iran War: रजा पहलवी कौन? जिसे ईरान की गद्दी पर बिठाने के लिए अमेरिका ने छेड़ दिया 'महायुद्ध'
Iran Crown Prince Reza Pahlavi: पश्चिम एशिया दहक रहा है, इजरायल और अमेरिका के 'ऑपरेशन लायन रोर' (Lion's Roar) के जवाब में ईरान ने करीब 400 मिसाइलें दागकर रणभेरी बजा दी है। हाइफा से लेकर कतर और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए इन धमाकों ने दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। इस भीषण सैन्य टकराव के बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, क्राउन प्रिंस रजा पहलवी।
ईरान के अंतिम शाह के बेटे रजा पहलवी, जो दशकों से अमेरिका में निर्वासित जीवन जी रहे हैं, अब इस पूरे संघर्ष के केंद्र बिंदु बन गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह हमला केवल सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि ईरान में 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) की एक सोची-समझी बिसात है, जिसका चेहरा रजा पहलवी को बनाया जा रहा है।

Crown Prince Reza Pahlavi: निर्वासित शहजादे की वापसी की पटकथा
रजा पहलवी ईरान के अंतिम शासक मोहम्मद रजा शाह पहलवी के सबसे बड़े बेटे हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद उनके परिवार को देश छोड़ना पड़ा था। अमेरिका उन्हें एक 'धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक' विकल्प के रूप में पेश कर रहा है। वाशिंगटन का मानना है कि वर्तमान धार्मिक नेतृत्व को उखाड़ फेंकने के बाद रजा पहलवी ही वह चेहरा हो सकते हैं जो ईरान को फिर से पश्चिमी देशों के करीब ला सकें।
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Reza Pahlavi Iran: रजा पहलवी को क्यों छोड़ना पड़ा था देश?
क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ईरान के अंतिम राजा (शाह) मोहम्मद रेजा पहलवी के सबसे बड़े बेटे और पहलवी राजवंश के उत्तराधिकारी हैं। 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान जब उनके पिता का तख्तापलट हुआ, तब उन्हें अपना देश छोड़कर जाना पड़ा। वर्तमान में वह अमेरिका में निर्वासित जीवन जी रहे हैं और ईरानी विपक्षी आंदोलन के प्रमुख चेहरे हैं। वह ईरान में 'इस्लामिक रिपब्लिक' को समाप्त कर लोकतांत्रिक सुधारों और धर्मनिरपेक्षता की वकालत करते हैं। प्रदर्शनकारियों के बीच उनकी लोकप्रियता हाल के दिनों में काफी बढ़ी है।
रजा पहलवी का बड़ा राजनीतिक संकेत
अमेरिका में दशकों से निर्वासित जीवन जी रहे क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने साफ कहा है कि वह तानाशाही से मुक्ति दिलाने के लिए ईरान लौटने को तैयार हैं। पहलवी की अपील के बाद ही ईरान के भीतर प्रदर्शनों में तेजी आई है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर यूरोपीय देशों से चुप्पी तोड़ने और ईरानी जनता को तकनीकी व राजनयिक सहायता प्रदान करने का आग्रह किया है ताकि उनकी आवाज दुनिया तक पहुंच सके।
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क्या ईरानी जनता स्वीकार करेगी 'विदेशी' समर्थन वाला नेतृत्व?
ईरान के भीतर एक बड़ा वर्ग वर्तमान शासन से असंतुष्ट है, लेकिन रजा पहलवी के लिए चुनौती बड़ी है। उन पर 'अमेरिकी कठपुतली' होने का ठप्पा लग सकता है। हालांकि, हालिया विरोध प्रदर्शनों में 'पहलवी अमर रहें' जैसे नारों ने अमेरिका को यह भरोसा दिलाया है कि जमीनी स्तर पर उनके लिए समर्थन मौजूद है। रजा पहलवी ने खुद को एक 'ट्रांजिशनल लीडर' के रूप में पेश किया है जो चुनाव कराकर लोकतंत्र स्थापित करेंगे।












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