नोबल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी कौन हैं? ईरान की सबसे खतरनाक जेल में बीत रही जिंदगी
ईरान की मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को साल 2023 के लिए नोबल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति के अध्यक्ष बेरिट रीस-एंडरसन ने शुक्रवार को ओस्लो में पुरस्कार की घोषणा की।
नोबेल पुरस्कार में 11 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 1 मिलियन डॉलर) का नकद पुरस्कार दिया जाता है। दिसंबर में पुरस्कार समारोह में विजेताओं को 18 कैरेट का स्वर्ण पदक और डिप्लोमा भी मिलता है।

ईरान में नरगिस मोहम्मदी का नाम मानवाधिकारों की लड़ाई का पर्याय बन चुका है। नोबेल कमिटी ने कहा है कि महिलाओं के दमन के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली नरगिस को उनके बहादुरी भरे संघर्ष की जबरदस्त व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़ी है।
वह देश में एक ऐसी लड़ाई लड़ रही हैं जिसमें इस कार्यकर्ता का लगभग सब कुछ खो चुका है। उन्हें अब तक 13 बार गिरफ्तार किया जा चुका है। बेजुबानों की आवाज बनने, मौत की सजा के खिलाफ उनके अथक अभियान के लिए उन्हें बार-बार सजा सुनाई गई है।
बीते 2 दशकों में अधिकांश समय उनका जेल में गुजरा है। उन्हें अब तक कुल 31 सालों की सजा सुनाई जा चुकी है। इसके अलावा उन्हें 154 कोड़े की सजा भी सुनाई गई है। फिलहाल वह राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ कार्रवाई और राज्य के खिलाफ प्रचार के आरोप में एविन जेल में 10 साल और 9 महीने की सजा काट रही है।
नरगिस मोहम्मदी को जब शांति का पुरस्कार दिया जा रहा है, उस समय भी वह अभी जेल में हैं। लेकिन तेहरान की कुख्यात एविन जेल की सबसे अंधेरी कोठरियां भी उसकी शक्तिशाली आवाज को कुचलने में कामयाब नहीं हो पाई हैं।
ईरान में सितंबर 2022 में एक युवा कुर्दिश महिला महसा अमीनी की मोरलिटी पुलिस की कस्टडी में मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद पूरे ईरान में जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। इस प्रदर्शन के दौरान नरगिस को कथित तौर पर ठीक से हिजाब न पहनने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने 259 व्यक्तियों और 92 संगठनों सहित 351 उम्मीदवारों में से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शांति पुरस्कार के लिए इस वर्ष के विजेता को चुना। मोहम्मदी 122 साल पुराना पुरस्कार जीतने वाली 19वीं महिला हैं।
पिछले साल, यह पुरस्कार बेलारूस के मानवाधिकार अधिवक्ता एलेस बायलियात्स्की, रूसी मानवाधिकार समूह मेमोरियल और यूक्रेनी मानवाधिकार संगठन सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज को दिया गया था।
शांति पुरस्कार नोबेल पुरस्कारों में से एकमात्र पुरस्कार है जो स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम के बजाय नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में प्रदान किया जाता है।
कौन है नरगिस मोहम्मदी?
नरगिस कुर्द हैं। उनका जन्म ईरान के जंजन शहर में 21 अप्रैल 1972 में हुआ था। फिजिक्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने इंजीनियर और तौर पर काम किया। नरगिस 1990 के दशक से ही नरगिस महिलाओं के हक के लिए आवाज उठा रही हैं। इस दौरान वह कई अखबारों के लिए कॉलम लिखती थीं।
नरगिस 2003 के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता शिरीन ईबादी के नेतृत्व वाले एक गैर-सरकारी संगठन, डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर की उप प्रमुख हैं। शिरीन ईबादी के प्रयासों से ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2007 से हर साल 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित किया।
2003 से ही नरगिस ने डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट सेंटर में काम शुरू किया था। नरगिस मोहम्मदी को जेल में बंद कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों की सहायता करने का कोशिश करने के आरोप में पहली बार 2011 में जेल की सजा हुई थी।
एक इंटरव्यू में नरगिस ने कहा था कि उन्होंने 8 साल से अपने बच्चों को नहीं देखा है। उन्होंने आखिरी बार अपनी जुड़वा बेटियों अली और कियाना की आवाज एक साल पहले सुनी थी। नरगिस की दोनों बेटियां उनके पति तागी रहमानी के साथ फ्रांस में रहती हैं।
नरगिस ने एक किताब भी लिखी है, जिसका नाम व्हाइट टॉर्चर है। इस किताब में उन्होंने जेल में रहते हुए उन्होंने साथी कैदियों की यातनाओं के बारे में लिखा है। 2022 में उन्हें रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) के साहस पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
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