कौन हैं भारतीय मूल के अमेरिकी चिरंजीव कथूरिया, जिनकी कंपनी भारत में बना सकती है पहली एयर टैक्सी?
एक भारतीय जो सिर्फ 8 महीने की उम्र में अमेरिका गया था, अब भारत में पहली एयर टैक्सी निर्माण की योजना पर काम कर रहा है। यह हैं भारतीय-अमेरिकी चिरंजीव कथूरिया।

भारतीय मूल के अमेरिकी कारोबारी डॉक्टर चिरंजीव कथूरिया एयर टैक्सी के निर्माण पर काम कर रहे हैं और भारतीय बाजारों में भी इसे लॉन्च करने की उनकी योजना है। यही नहीं उनकी कंपनी ड्रोन भी बनाती है और अभी यूक्रेन में उसका इस्तेमाल भी किया जा रहा है। अगले साल तक वह ड्रोन भारतीय रक्षा बाजार में भी उपलब्ध हो सकता है। डॉक्टर चिरंजीव कथूरिया बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। उन्होंने जिस भी क्षेत्र में हाथ लगाया है, उसने बुलंदियों को छू लिया है। (तस्वीरें सौजन्य: chirinjeevkathuria.com)

भारत में पहली एयर टैक्सी लॉन्च करने की तैयारी
टीओआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय मूल के अमेरिकी डॉक्टर चिरंजीव कथूरिया की कंपनी भारतीय बाजारों में एयर टैक्सी उतारने वाली पहली संस्था बन सकती है। डॉक्टर कथूरिया एक बड़े अमेरिकी कारोबारी बन चुके हैं। संभावना है कि चार साल के अंदर उनकी कंपनी की एयर टैक्सी भारतीय आसमान में उड़ान भर सकती है। उनकी जॉन्ट एयर मोबिलिटी (Jaunt Air Mobility) ने पिछले साल अर्बन एयर मोबिलिटी (UAM) विकसित करने के लिए एल एंड टी टेक्नोलॉजी सर्विसेज के साथ साझेदारी की थी।

भारत में ही होगी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट
इनकी कंपनी को हाल ही में एक भारतीय चॉपर ऑपरेटर से 250 एयर टैक्सी का ऑर्डर मिला है। अब, उन्होंने देश और क्षेत्रीय बाजारों के लिए 2025 तक भारत में ही इन फ्यूचरिस्टिक वाहनों को बनाने के लिए जोर लगा दिया है। उन्होंने शिकागो से बताया है कि जॉन्ट एयर टैक्सी कनाडा और अमेरिका के एविएशन रेग्युलेटर से 2026-27 तक मंजूरी मिलने के बाद उड़ान भर सकते हैं। उन्होंने कहा है कि 'पहली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट अमेरिका में है; और दूसरी भारत में होगी।'

कौन हैं चिरंजीव कथूरिया?
दिल्ली में जन्मे चिरंजीव कथूरिया 2004 में अमेरिकी सीनेट में प्रवेश की कोशिश करने वाले पहले भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हैं। वह पेश से डॉक्टर हैं और ब्राउन यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन की है। इसके साथ ही इन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन भी किया है। आज इनके करियर में उद्यमी, समाजसेवी, निवेशक और राजनीति सब शामिल हो चुका है।
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रक्षा ड्रोन भी भारत में लाने की योजना
डॉक्टर कथूरिया की एक कंपनी आज RQ-35 Heidrun खुफिया, निगरानी और टोही ड्रोन भी बनाती है, जिसका इस्तेमाल अभी यूक्रेन में किया जा रहा है। शिकागो से उन्होंने बताया कि अगले साल यह ड्रोन भारतीय रक्षा बाजार में भी उपलब्ध हो सकता है। वे न्यू जेनरेशन पॉवर के को-फाउंडर और अभी इसके चेयरमैन भी हैं। वे उस ओशन बायोमेडिकल के भी को-फाउंडर हैं, जिन्होंने हाल ही में मलेरिया वैक्सीन की खोज का ऐलान किया है।
अंतरिक्ष मिशन में भी रहा है योगदान
चिरंजीव कथूरिया अमेरिकन टेलेरेडियोलॉजी नाइटहॉक्स के भी को-फाउंडर हैं, जिसका नाइटहॉक रेडियोलॉजी होल्डिंग्स के साथ विलय हुआ और यह संयुक्त कंपनी नैसडैक पर पब्लिक हुई। वे अंतरिक्ष से जुड़ी खोज में भी शामिल रहे हैं। वह मिरकॉर्प के फाउंडिंग डायरेक्टर हैं, जो कि प्राइवेट मानव मिशन अंतरिक्ष कार्यक्रम को लॉन्च और फंड देने वाली पहली निजी वाणिज्यिक कंपनी है।
8 महीने की उम्र में गए थे शिकागो
उन्होंने भारत में अमेरिकी इंवेस्टमेंट बैंक का पहला दफ्तर खोलने में मदद की और मॉर्गन स्टेनली के इंवेस्टमेंट बैंक डिविजन में मैनेजर के रूप में भी कार्य किया। कथूरिया जब सिर्फ 8 महीने के थे, तभी अपने माता-पिता के साथ अमेरिकी शहर शिकागो चले गए थे। जिस सीनेट की रेस में कथूरिया पिछड़ गए, उसी में आखिरकार बराक ओबामा को जीत मिली और वह अमेरिका के राष्ट्रपति बने।












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