Hana-Rawhiti Maipi-Clarke कौन हैं? NZ संसद में डांस कर बटोरी सुर्खियां
Who is Hana-Rawhiti Maipi-Clarke: न्यूजीलैंड की 22 वर्षीय सांसद हाना-राव्हिती करारीकी मापी-क्लार्क ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। न्यूजीलैंड की संसद में 14 नवंबर 2024 को तब हड़कंप मच गया, जब हाना-राव्हिती मापी-क्लार्क ने संसद में पेश किए गए विवादास्पद संधि सिद्धांत विधेयक का विरोध करते हुए इसकी प्रति फाड़ दी।
इसके साथ ही उन्होंने माओरी समुदाय के पारंपरिक हाका नृत्य का प्रदर्शन किया। इस दृश्य ने वहां उपस्थित अन्य सदस्यों और दर्शकों को भी उनके साथ हाका करने के लिए प्रेरित किया। स्पीकर गेरी ब्राउनली ने कुछ समय के लिए संसद की कार्यवाही स्थगित कर दी।

विवादित संधि सिद्धांत विधेयक
इस विधेयक का उद्देश्य 1840 की ऐतिहासिक वेटांगी संधि के सिद्धांतों को स्पष्ट करना था, जिसके तहत माओरी जनजातियों ने ब्रिटिशों को शासन सौंपा था। इस संधि में माओरी जनजातियों को उनकी भूमि पर अधिकार बनाए रखने और अपने हितों की रक्षा का आश्वासन दिया गया था। विधेयक को लेकर काफी विवाद है, और आलोचकों का मानना है कि इससे नस्लीय और संवैधानिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।
हाना-राव्हिती मापी-क्लार्क: न्यूज़ीलैंड की सबसे युवा सांसद
हाना-राव्हिती मापी-क्लार्क न्यूज़ीलैंड की सबसे युवा सांसद हैं और माओरी पार्टी, ते पाटी माओरी, का प्रतिनिधित्व करती हैं। वह इतिहास में पिछले 200 सालों में संसद में सबसे कम उम्र की सदस्य बनीं। उन्होंने पहली बार 2023 के चुनावों में जीत हासिल की और संसद में अपने पहले भाषण के दौरान माओरी हाका का प्रदर्शन कर खास पहचान बनाई। उन्हें और उनके पिता को ते पाती माओरी से चुनाव लड़ने के लिए संभावित उम्मीदवारों के रूप में चुना गया था, लेकिन उनकी युवा दृष्टिकोण और ऊर्जावान नेतृत्व को देखते हुए मापी-क्लार्क को प्राथमिकता दी गई।
प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की आलोचक
हाना-राव्हिती मापी-क्लार्क ने न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन और उनकी सरकार की मुखर आलोचक की। लक्सन पर माओरी अधिकारों को सीमित करने का आरोप है। लक्सन की कुछ नीतियों की वजह से उनकी लोकप्रियता में गिरावट देखी गई है। टाइम मैगजीन के अनुसार, मापी-क्लार्क का नाम "पसंदीदा प्रधानमंत्री" के 5 संभावित उम्मीदवारों की सूची में भी शामिल है।
विवादास्पद संधि सिद्धांत विधेयक पर राष्ट्रीय विरोध
संधि सिद्धांत विधेयक को संसद में बहुत कम समर्थन मिला है और इसे कानून बनने की उम्मीद नहीं है। इस विधेयक का पूरे न्यूज़ीलैंड में व्यापक विरोध किया जा रहा है, जहां हजारों लोग इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि यह विधेयक न केवल नस्लीय तनाव बढ़ा सकता है, बल्कि संवैधानिक अस्थिरता भी ला सकता है।












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