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हिंदी से ग्रेजुएट, बाइडेन के विश्वासपात्र, जानिए कौन हैं एरिक गार्सेटी, जो भारत में होंगे अमेरिका के नये दूत

कौन हैं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के विश्वासपात्र एरिक माइकल गार्सेटी, जो भारत में अमेरिका के नये दूत हो सकते हैं, जिन्होंने कहा कि, भारत कठिन पड़ोसियों से घिरा हुआ है।

वॉशिंगटन, दिसंबर 15: 'अगर मुझे भारत में अमेरिका का अगला दूत नियुक्त किया जाता है, तो मैं भारत को मिलने वाला अमेरिकी मदद दोगुना कर दूंगा'। ये बयान दिया है एरिक माइकल गार्सेटी, जो अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के विश्वासपात्र हैं, और जिन्हें भारत में अमेरिका का अगला दूत नियुक्त किया जा सकता है। एरिक माइकल गार्सेटी ने भारत को लेकर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं और उनके इरादे से साफ जाहिर होता है, कि आने वाले वक्त में भारत और अमेरिका के संबंध और भी ज्यादा मजबूत होंगे और अमेरिका भारत को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने के लिए तैयार हो सकता है।

राजदूत बनने के लिए दिया इंटरव्यू

राजदूत बनने के लिए दिया इंटरव्यू

एरिक माइकल गार्सेटी, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के बेहद विश्वासपात्र माने जाते हैं और इसीलिए राष्ट्रपति बाइडेन भारत में उन्हें दूत बनाकर भेजना चाहते हैं। लिहाजा अमेरिकी सांसदों के सामने भारत के राजदूत बनने के लिए जब एरिक माइकल गार्सेटी ने इंटरव्यू दिया, तो उन्होंने भारत को लेकर अपना नजरिया पूरी तरह साफ कर दिया, जिसमें भारत की सीमा की सुरक्षा, पड़ोसियों से भारत के संबंध और भारत को टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर की बात कही गई है। एरिक माइकल गार्सेटी ने अमेरिकी सांसदों के सामने कहा कि, भारत कठिन पड़ोसियों से घिरा हुआ है, लिहाजा भारत की सीमा की सुरक्षा करने के लिए अमेरिका को मदद बढ़ानी होगी। उन्होंने कहा कि, अगर उन्हें भारत में अमेरिका का दूत नियुक्त किया जाता है, तो वो भारत को मिलने वाली अमेरिकी मदद को दोगुना कर देंगे।

कौन हैं माइकल गार्सेटी?

कौन हैं माइकल गार्सेटी?

50 साल के हो चुके माइकल गार्सेटी इस वक्त लॉस एंजिलिस के मेयर हैं और वो राष्ट्रपति बाइडेन के बेहद करीबी हैं। अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन्होंने बाइडेन के पक्ष में काफी चुनाव प्रचार किया था और अब उन्हें इसका फल मिलता दिख रहा है। माइकल गार्सेटी को शुरू से ही भारत में काफी दिलचस्पी रही है और साल 1992 में उन्होंने भारतीय भाषा हिंदी और भारत की संस्कृति और भारत के धर्म के विषय पर ग्रेजुएशन किया है। ये वो दौर था, जब शीत युद्ध की वजह से भारत और अमेरिका के रिश्तों के बीच में काफी दरार आ गई थी। उस वक्त भारत और अमेरिका के बीच सिर्फ 2 अरब डॉलर का व्यापार हो गया था और दोनों देशों के बीच सैन्य संबंध नहीं के बराबर था। स्थिति ये थी, कि अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साक्षेदारी की बात को 'जोक' समझा जाता है।

संबंध सुधरे और बने नये हालात

संबंध सुधरे और बने नये हालात

अमेरिका और रूस के बीच शीत युद्ध की समाप्ति के बाद धीरे धीरे एक बार फिर से अमेरिक और भारत के बीच का रिश्ता पटरी पर लौटने लगा। अपनी दावेदारी पर बोलते हुए माइकल गार्सेटी ने कहा कि, ''आज के दौर में भारत और अमेरिका की रणनीतिक साक्षेदारी की प्रकृति मौलिक हो चुकी है और दोनों देशों के बीच मजबूती का संबंध हो, ये दोनों ही देशों की भलाई में है''। उन्होंने कहा कि, ''आज से 20 साल पहले, जब जो बाइडेन 'इस्टीम्ड कमेटी' के चेयरमैन थे, उस वक्त उन्होंने अमेरिका-भारत संबंधों की एक नई और महत्वाकांक्षी दृष्टि का आह्वान किया था। लिहाजा, माइकल गार्सेटी ने डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी को धन्यवाद देते हुए कहा कि, उनकी वजह से आज भारत और अमेरिका एक मजबूत सहयोगी बन पाए हैं''।

नौकरी और व्यापार पर बात

नौकरी और व्यापार पर बात

माइकल गार्सेटी ने अमेरिकी सांसदों से अपनी दावेदारी पर इंटरव्यू के दौरान कहा कि, ''कोविड महामारी की वजह से कई चुनौतियां आ गई हैं, बावजूद इसके मुझे उम्मीद है कि, मैं भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा पाऊंगा''। उन्होंने कहा कि, ''मैं भारत और अमेरिका के बीच की साझेदारी को चैंपियन बनाने का इरादा रखता हूं, जो बाजार तक पहुंचने की कोशिश के दौरान आने वाली बाधाओं को दूर करना चाहूंगा और दोनों देशों के बीच निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देना चाहूंगा, ताकि अमेरिका और भारतीय लोगों के लिए नौकरी के नये अवसर बने''।

'कठिन पड़ोसियों के बीच घिरा है भारत'

'कठिन पड़ोसियों के बीच घिरा है भारत'

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के नई दिल्ली में अगले दूत के लिए उम्मीदवार एरिक माइकल गार्सेटी ने मंगलवार को अमेरिकी सांसदों से कहा कि वह "भारत को अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखने, अपनी संप्रभुता की रक्षा करने और अपनी क्षमता को मजबूत करने के लिए अमेरिका के प्रयासों को दोगुना कर देंगे।" माइकल गार्सेटी का ये बयान चीन और पाकिस्तान को लेकर देखा जा रहा है। पिछले दो सालों से भारत और चीन के बीच का सीमा विवाद काफी बढ़ चुका है और पिछले साल दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़प भी हो चुकी है। वहीं, पाकिस्तान के साथ आजादी के बाद से भी भारत का तनावपूर्ण रिश्ता रहा है, लिहाजा भारत लगातार अपनी सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

भारत को लेकर 'नये दूत' के विचार

भारत को लेकर 'नये दूत' के विचार

भारत में अमेरिकी राजदूत के लिए अपनी पुष्टिकरण सुनवाई के दौरान गार्सेटी ने कहा कि, "भारत एक कठिन पड़ोस में स्थित है। अगर मेरे नाम की पुष्टि हो जाती है, तो मैं भारत की सीमाओं को सुरक्षित रखनेस, भारत की संप्रभुता की रक्षा करने और भारत के खिलाफ आक्रमण रोकने के लिए जारी अमेरिकी प्रयासों को दोगुना करने का इरादा रखता हूं''।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई

गार्सेटी ने अमेरिकी सांसदों के सामने अपने 'इंटरव्यू' के दौरान इस बात पर जोर दिया कि, आतंकवाद को रोकने के लिए, आतंकवाद के खिलाफ समन्वय बनाने के लिए, नेविगेशन को मजबूत करने के लिए वो भारत के साथ सूचवनाएं साझा करने पर जोर देंगे। गार्सेटी ने कहा कि, उन्होंने अमेरिकी नौसेना के साथ काम करते हुए भारतीय नौसेना के अधिकारियों के साथ काफी करीब से काम किया है, लिहाजा वो समुद्री सुरक्षा में भारत की प्रमुखता से मदद कर सकते हैं।

भारत के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

भारत के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

गार्सेटी ने कहा कि, उनकी कोशिश भारत के साथ डिफेंस सेक्टर में टेक्नोलॉजी की बिक्री पर होगी, ताकि हमारी टेक्नोलॉजी के माध्यम से भारत अपनी क्षमताओं को विकसित कर सके। गार्सेटी ने कहा कि, अगर उनके नाम की पुष्टि हो जाती है, तो वो एजेंडा-2030 के जरिए इंटरनेशनल सोलर एलायंस के लिए भारत के साथ मिलकर काम करना चाहेंगे, ताकि ग्रीन एनर्जी के सेक्टर में दोनों देश विकास कर सके। उन्होंने कहा कि, "भारत के साथ हमारी साझेदारी का आधार मानव संबंध हैं जो हमारे राष्ट्रों को जोड़ता है, जो हमारे देश को मजबूत करने वाले चार मिलियन मजबूत भारतीय-अमेरिकी प्रवासी हैं और लगभग दो लाख भारतीय छात्र और दसियों हजार भारतीय प्रोफेशनल्स हैं, जो हमारी अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं"।

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