Who is Abhishek Kambli: कौन हैं भारतीय मूल के वकील अभिषेक कांबली? जो ट्रंप के निर्वासन फैसले का बचाव कर रहे

Who is Abhishek Kambli: अमेरिका में अवैध अप्रवासियों के निर्वासन को लेकर एक बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें भारतीय मूल के वकील अभिषेक कांबली प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1798 के विदेशी शत्रु अधिनियम (Alien Enemies Act) को लागू करने के अपने फैसले का बचाव करने के लिए अभिषेक कांबली को डिप्टी एसोसिएट अटॉर्नी जनरल के रूप में नियुक्त किया है। आखिर कौन हैं ये? आइए जानते हैं इनसे जुड़ी हर जानकारी...

Who is Abhishek Kambli

Who is Abhishek Kambli: अभिषेक कांबली कौन हैं?

अभिषेक कांबली का जन्म भारत में हुआ था, लेकिन जब वे तीन साल के थे, तब उनका परिवार अमेरिका चला गया। उनका बचपन नॉरवॉक, कनेक्टिकट में बीता।

उन्होंने 2006 में यूनिवर्सिटी ऑफ द आर्ट्स से ललित कला (Fine Arts) में स्नातक किया और कुछ समय तक मनोरंजन उद्योग में काम किया। बाद में, उन्होंने कानून की पढ़ाई करने का फैसला किया और नोट्रे डेम यूनिवर्सिटी से डॉक्टर ऑफ लॉ (Juris Doctor) की डिग्री हासिल की।

Abhishek Kambli Career: कानूनी करियर और सैन्य सेवा

कांबली ने 2013 में अमेरिकी वायु सेना के डायस एयर फ़ोर्स बेस में मुख्य अभियोजक के रूप में काम शुरू किया। 2014 में, उन्हें वायु सेना के शीर्ष अभियोजकों में से एक माना गया।

बाद में, उन्हें रक्षा वकील के रूप में पदोन्नत किया गया, जहां वे 4,000 से अधिक वायु सेना के सदस्यों के कानूनी मामलों को संभालते थे। उन्होंने ग्वांतानामो बे में सैन्य आयोगों के समक्ष 9/11 हमलों के आरोपी मुस्तफा अल-हौसावी का भी बचाव किया था।

ट्रंप प्रशासन और निर्वासन नीति में उनकी भूमिका

ट्रंप प्रशासन अवैध अप्रवासियों को निर्वासित करने के लिए 1798 के विदेशी शत्रु अधिनियम का उपयोग कर रहा है। इस कानून के तहत, राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वे गैर-नागरिकों को हिरासत में ले सकते हैं, स्थानांतरित कर सकते हैं या निर्वासित कर सकते हैं।

हाल ही में, ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के गिरोह ट्रेन डी अरागुआ से जुड़े सैकड़ों अप्रवासियों को निर्वासित किया, लेकिन एक संघीय न्यायाधीश जेम्स बोसबर्ग ने इस पर अस्थायी रोक लगा दी। अब, अभिषेक कांबली इस फैसले के खिलाफ ट्रंप प्रशासन का बचाव कर रहे हैं।

कांबली का कानूनी तर्क और न्यायाधीश से बहस

अदालत में, न्यायाधीश बोसबर्ग ने निर्वासन उड़ानों को रोकने का आदेश दिया था, लेकिन कांबली ने तर्क दिया कि ये उड़ानें पहले से ही अंतरराष्ट्रीय जल में थीं, इसलिए उन्हें वापस नहीं बुलाया जा सकता था। हालांकि, न्यायाधीश ने इस तर्क को अविश्वसनीय (Unconvincing) माना और ट्रंप के फैसले को चुनौती दी।

ट्रंप की प्रतिक्रिया और विवाद

इस कानूनी लड़ाई के बीच, ट्रंप ने न्यायाधीश बोसबर्ग की आलोचना करते हुए उन्हें 'अनिर्वाचित उपद्रवी और आंदोलनकारी' कहा। इस विवाद के कारण, अभिषेक कांबली पर सबकी नज़र है, क्योंकि वे ट्रंप प्रशासन के पक्ष को अदालत में मजबूती से रखने की कोशिश कर रहे हैं।

क्या है आगे की राह?

यह मामला कार्यपालिका (Executive) और न्यायपालिका (Judiciary) के बीच टकराव का एक बड़ा उदाहरण बन चुका है। अदालतों में इस मामले की सुनवाई जारी है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांबली ट्रंप प्रशासन का यह तर्क अदालत में सही साबित कर पाते हैं या नहीं।

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