महामारी घोषित इबोला, डब्ल्यूएचओ ने इंटरनेशनल इमरजेंसी करार दिया

इस मुद्दे पर डब्ल्यूएचओ की आपात समिति की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है, 'इबोला को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैलने से रोकने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
समिति में इस बात को लेकर आम राय है कि इबोला बीमारी के सामने आने के बाद की स्थिति हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (पीएचईआईसी) जैसी है।' दुनिया के इतिहास में इबोला वायरस का यह अब तक का सबसे बड़ा प्रकोप बताया जा रहा है। अमेरिका से लेकर चीन तक इसका डर फैला है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, इबोला का पहला मामला मार्च में सामने आया था. इस बीमारी से अब तक 1,711 लोग प्रभावित हुए हैं। गिनी, लाइबेरिया, नाइजीरिया, सियरा लियोन में इस बीमारी से 932 लोगों की मौत हो गई है।
इस बीमारी का विषाणु संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ के संपर्क में आने से फैलता है।
शुक्रवार को ऐसी खबरें आई थीं कि भारत में भी इस बीमारी के लक्षण देखने को मिले हैं। इस पर केंद्रिय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने जवाब दिया है कि भारत इबोला से निबटने को पूरी तरह से तैयार है।
सबसे खास बात यह है कि अभी तक इबोला के इलाज को लेकर कोई भी दवा न तो बाजार में मौजूद है और न ही इसे अभी तक ईजाद किया जा सका है।
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस पूरे मसले पर कहा है कि इबोला वायरस के इलाज के लिए बनाई गई दवा पर वह अभी कुछ नहीं कह सकते हैं। ओबामा के मुताबिक यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि अमेरिका के वैज्ञानिकों ने इसके इलाज का हल तलाश लिया है।












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