रूस के रईसों ने आख़िर अपने अरबों डॉलर कहां छिपा रखे हैं?

पिछले कई दशकों में रूस के ओलिगार्क (रईस वर्ग) ने अरबों डॉलर की अवैध आय को विदेश भेजा है. ऐसा करके उन्होंने इसका पता लगाना मुश्किल बना दिया है.

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से दुनिया के कई देश इस 'डार्क मनी' को खोजने के लिए नए प्रतिबंधों और क़ानूनों का सहारा ले रहे हैं. उनके इस क़दम से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के क़रीबी इन ओलिगार्क लोगों को नुक़सान पहुंचने की संभावना है.

दुनिया में रूस की कितनी 'डार्क मनी' है?

अमेरिका के एक थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल के अनुसार, रूसी लोगों की विदेश में क़रीब 1,000 अरब डॉलर छिपी हुई 'डार्क मनी' होने का अनुमान है.

संस्था ने 2020 में जारी अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया कि इस राशि का एक-चौथाई हिस्सा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके क़रीबी सहयोगियों के पास है, जिन्हें 'ओलिगार्क' कहा जाता है.

उस रिपोर्ट में बताया गया, "रूस इस पैसे का इस्तेमाल जासूसी, चरमपंथ, औद्योगिक जासूसी, रिश्वतखोरी, राजनीतिक हेरफेर, दुष्प्रचार और कई अन्य कामों के लिए कर सकता है."

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अरबपति कारोबारी अर्काडी रोटेनबर्ग (दाएं) और उनके भाई बोरिस रोटेनबर्ग (बीच में) के साथ.
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, अरबपति कारोबारी अर्काडी रोटेनबर्ग (दाएं) और उनके भाई बोरिस रोटेनबर्ग (बीच में) के साथ.

कहां से आया ये काला धन

अमेरिका के ही एक अन्य थिंक टैंक 'नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी' का दावा है कि व्लादिमीर पुतिन ने ही अपने क़रीबियों को इस तरह का पैसा बनाने को प्रोत्साहित किया है.

संस्था के अनुसार, पुतिन ने अपने सहयोगियों को 'राज्य के बजट से चोरी करने, निजी कारोबारों से पैसे ऐंठने और लाभ कमाने वाले उद्यमों की ज़ब्ती की योजना बनाने' के लिए प्रोत्साहित किया.

यह संस्था कहती है कि इस तरीक़े से उन्होंने हज़ारों करोड़ों में चल रहे निजी कारोबारियों को तैयार किया है.

रूस के विपक्षी नेताओं बोरिस नेम्त्सोव और व्लादिमीर मिलोव का दावा है कि 2004 से 2007 के बीच तेल की दिग्गज कंपनी गज़प्रोम के पैसे से पुतिन के क़रीबी कारोबारियों को 60 अरब डॉलर ट्रांसफ़र किए गए.

इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ़ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ने जिस पेंडोरा पेपर्स को जारी किया था, उसके अनुसार व्लादिमीर पुतिन के क़रीबी कारोबारी बहुत अमीर हो गए हैं. इसका दावा है कि ये कारोबारी ख़ुद उनकी संपत्ति को इधर-उधर भेजने में मदद कर सकते हैं.

ब्रिटेन के नियंत्रण वाले द्वीप जैसे ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स भी रूसी धन की पसंदीदा मंज़िल है.
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ब्रिटेन के नियंत्रण वाले द्वीप जैसे ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स भी रूसी धन की पसंदीदा मंज़िल है.

आख़िर ये सब पैसा है कहां?

अतीत में इस पैसे का अधिकांश हिस्सा साइप्रस चला गया, क्योंकि वहां की कर प्रणाली अनुकूल थी. कइयों के लिए वो द्वीप 'भूमध्य सागर के मॉस्को' के रूप में जाना जाने लगा.

अटलांटिक काउंसिल के अनुसार, वहां केवल 2013 में रूस से 36 अरब डॉलर ट्रांसफर किए गए. इसमें से अधिकांश पैसा वहां शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के ज़रिए पहुंचा. इन शेल कंपनियों का उपयोग असल मालिकों को छिपाने के लिए किया जाता है.

हालांकि 2013 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ़ ने साइप्रस को शेल कंपनियों के हज़ारों बैंक खातों को बंद करने के लिए मना लिया था.

ब्रिटेन के नियंत्रण वाले द्वीपों जैसे ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स और केमैन आइलैंड्स भी रूसी धन की पसंदीदा मंज़िल हैं. इन्हीं पैसों में से कुछ को निवेश करने के लिए न्यूयॉर्क और लंदन जैसे प्रमुख वित्तीय शहरों में भेजा जाता है.

वहीं ग्लोबल विटनेस की एक रिपोर्ट बताती है कि 2018 में रूस के ओलिगार्क के पास ऐसी 'टैक्स हैवन' जगहों में क़रीब 45 अरब डॉलर पड़े हुए हैं.

भ्रष्टाचार रोकने के लिए काम करने वाली संस्था 'ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल' का दावा है कि ब्रिटेन में कम से कम दो अरब डॉलर की संपत्ति वित्तीय अपराधों के आरोपों का सामना करने वाले रूसियों या क्रेमलिन से जुड़े लोगों के पास है.

ऑर्गनाइज़्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट द्वारा 2014 में जारी 'रशियन लॉन्ड्रोमैट' नाम की एक रिपोर्ट में रूस की मनी लॉन्ड्रिंग की व्यापकता को उजागर किया गया था.

इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 2011 से 2014 के बीच रूस के 19 बैंकों ने 96 देशों की 5,140 कंपनियों के 21 अरब डॉलर धन को काला से सफ़ेद बनाया था.

आख़िर पैसे को छिपाया कैसे जाता है?

पैसे छिपाने का आम तरीक़ा शेल कंपनियां ही हैं. रूस के ओलिगार्क विदेशों में अपना धन छिपाने के लिए मुख्य रूप से शेल कंपनियों का ही सहारा लेते हैं.

अटलांटिक काउंसिल का कहना है, "ये ओलिगार्क धन को छिपाने और उसे लूटने के लिए क़ानूनी साधन तैयार करने के लिए दुनिया के सबसे बढ़िया वकीलों, ऑडिटरों, बैंकरों और लॉबिस्टों को नियुक्त करते हैं."

इस संस्था के अनुसार, "एक ओलिगार्क के पास ऑफ़शोर ज्यूरिसडिक्शन वाली कई ग़ुमनाम शेल कंपनियां होती हैं. इनके बीच उनके धन का प्रवाह बिजली जैसी गति से होता है."

इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ने 2016 में 'पनामा पेपर्स' प्रकाशित किया था. उसमें दिखाया गया था कि अकेले एक ही कंपनी ने रूसी ओलिगार्क लोगों के लिए 2,071 शेल कंपनियां बनाई थी.

दुनिया में रूस के सबसे मशहूर ओलिगार्क में से एक ब्रिटेन के रोमन अब्रामोविच हैं. वो चेल्सी फुटबॉल क्लब के मालिक हैं.
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दुनिया में रूस के सबसे मशहूर ओलिगार्क में से एक ब्रिटेन के रोमन अब्रामोविच हैं. वो चेल्सी फुटबॉल क्लब के मालिक हैं.

ओलिगार्क का पैसा खोजने के लिए क्या हो रहा है

यूक्रेन पर हमले के बाद, पश्चिमी देशों ने रूस के पैसे का पता लगाने के लिए कई उपायों का एलान किया है. रूस के ओलिगार्क लोगों के पैसों पर नकेल कसने के लिए अमेरिका 'क्लेप्टोकैप्चर' नाम का एक टास्क फोर्स बना रहा है.

इस टास्क फोर्स को वहां का जस्टिस डिपार्टमेंट संभालेगा. इसका काम ग़ैर क़ानूनी तरीक़ों से जुटाई गई संपत्ति को ज़ब्त करना होगा.

वहीं ब्रिटेन की सरकार ने अनएक्सप्लेन्ड वेल्थ ऑर्डर (यूडब्ल्यूओ) का उपयोग बढ़ाने का फ़ैसला लिया है. इससे लोगों को मजबूर किया जा सकता है कि वे साबित करें कि उन्होंने ब्रिटेन में संपत्ति ख़रीदने के लिए पैसे कहां से जुटाए. ऐसा न करने पर उनकी संपत्ति ज़ब्त की जा सकती है.

अकाउंट फ्रीजिंग ऑर्डर (एएफओ) के ज़रिए अदालतों को ताक़त मिली हुई कि य​दि संदेह हो कि कोई धन आपराधिक गतिविधियों से जुटाई गई है, तो उस धन को ज़ब्त करने का आदेश दिया जा सकता है.

सरकार ने इसके अलावा, आर्थिक अपराध क़ानून और विदेशी संस्थाओं के नियंत्रण वाली प्रॉपर्टी के लिए रजिस्टर बनाने को भी अपनी मंज़ूरी दे दी है.

ब्रिटेन ने 'गोल्डन वीज़ा योजना' को भी रद्द करने का एलान किया है. इसके तहत देश में बड़ा निवेश करने वाले विदेशी रईसों को वहां रहने का अधिकार दिया जाता था.

रूस के पैसे की एक और पसंदीदा जगह रहे माल्टा ने भी इसी तरह की अपनी 'गोल्डन पासपोर्ट' योजना ख़त्म कर दी है. साइप्रस और बुल्गारिया ने 2020 में अपनी यह योजना ख़त्म कर दी थी.

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