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Strait of Hormuz पर संकट! ट्रंप बने जहाजों का ‘सुरक्षा कवच’, हॉर्मुज को लेकर क्यों थम सकती है दुनिया की सांस?

Middle East Strait of Hormuz: ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध अब वैश्विक ऊर्जा संकट में तब्दील होता दिख रहा है। मिडिल ईस्ट (Middle East) में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ' व्यापारिक नसों' में से एक यानी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है।

इसे देखते हुए ट्रंप ने कहा है कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिकी नौसेना (US Navy) अब व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा देकर इस रास्ते से पार कराएगी। ट्रंप के इस बयान का असर तुरंत बाजार पर दिखा और तेल की बढ़ती कीमतों में कुछ हद तक ब्रेक लगा।

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इन सबके बीच लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य? कहां स्थिति है और इसके बंद होने से ट्रंप की हेकड़ी क्यों निकल गई है? यहां विस्तार से और आसान भाषा में स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज के व्यापारिक महत्तव के बारे में बताया गया है....

Strait of Hormuz को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?

ईरान की धमकियों और उसके ड्रोन हमलों के डर से तेल कंपनियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से अपने टैंकर भेजना बंद कर दिए हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, अगर आवश्यक हुआ तो अमेरिकी नौसेना जल्द से जल्द हॉर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों को एस्कॉर्ट करना शुरू करेगी। अमेरिका किसी भी कीमत पर दुनिया को ऊर्जा की मुक्त आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।

What Is Strait of Hormuz: क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य?

सबसे पहले आपको बता दें के होर्मुज जलडमरूमध्य समुद्री व्यापार के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'चोकपॉइंट'है। यह एक संकरा समुद्री रास्ता है जो फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान है, जबकि दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सीमाएं हैं। यह रास्ता लगभग 167 किमी लंबा है, लेकिन इसकी सबसे संकरी जगह केवल 33 किमी (21 मील) चौड़ी है।

इसमें जहाजों के आने-जाने के लिए केवल 2-2 मील के दो संकरे शिपिंग लेन ही गहरे और सुरक्षित हैं। अगर हॉर्मुज बाधित होता है, तो ग्लोबल ऑयल मार्केट में हड़कंप, शेयर बाजारों में अस्थिरता आएगी और एशिया, यूरोप और अमेरिका में ईंधन महंगा होगा। जिसका सीधा असर दुनिया के व्यापार पर पडे़गा

Strait of Hormuz Importance: दुनिया के तेल आपूर्ति और व्यापार के लिए कितना अहम है यह रास्ता?

होर्मुज केवल पानी का एक रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है। तेल की सप्लाई के लिए यह डोर ऑफ हेवेन है। दुनिया के कुल तेल खपत का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल यहां से निकलता है। दुनिया की एक-तिहाई तरल प्राकृतिक गैस (LNG) इसी संकरे रास्ते से होकर बाजारों तक पहुंचती है।

कतर जैसे बड़े गैस निर्यातक पूरी तरह इसी मार्ग पर निर्भर हैं। यह रास्ता भारत के लिए भी काफी अहम है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 50-60% कच्चा तेल खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई से मंगाता है, जो इसी रास्ते से होकर भारत पहुंचता है।

Strait of Hormuz के रास्ते जाने से क्यों डर रहे हैं शिपिंग और ऑयल कंपनियां?

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी टकराव के कारण शिपिंग कंपनियां हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से अपने तेल और गैस टैंकर भेजने से बच रही हैं। उन्हें आशंका है कि जहाजों पर हमले हो सकते हैं। इसका सीधा असर यह पड़ा है कि टैंकर ट्रैफिक में तेज गिरावट आई है, तेल की सप्लाई घटी है, कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हॉर्मुज़ लंबे समय तक बंद या असुरक्षित रहा, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

Strait of Hormuz को लेकर क्या है इंश्योरेंस पॉलिसि, विशेषज्ञों का क्या कहना है?

तेल टैंकरों के रुकने की बड़ी वजह 'बीमा' Insurance पॉलिसि भी है। युद्ध के कारण इंश्योरेंस कंपनियों ने इस रास्ते से जाने वाले जहाजों का रिस्क कवर बंद कर दिया था या प्रीमियम की दरें 10 गुना बढ़ा दी थीं। ट्रंप ने अमेरिकी एजेंसी (DFC) को निर्देश दिया है कि वह सभी शिपिंग कंपनियों को 'पॉलिटिकल रिस्क इंश्योरेंस' और फाइनेंशियल गारंटी दे। कई मीडिया रिपोर्टस की मानें तो ट्रंप ने इस समीकरण से वित्तीय जोखिम को बाहर निकाल दिया है। अब देखना यह है कि कौन सी कंपनी पहली बार इस सुरक्षा घेरे में रास्ता पार करने का साहस दिखाती है।

हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है जब अमेरिका टैंकरों को सुरक्षा दे रहा है। 1980 के दशक में 'टैंकर युद्ध' (Iran-Iraq War) के दौरान भी अमेरिकी नौसेना ने इसी तरह जहाजों को सुरक्षा कवच प्रदान किया था। हालांकि, उस समय और आज की स्थिति में बड़ा अंतर यह है कि अब ईरान के पास आधुनिक मिसाइलें और घातक आत्मघाती ड्रोन हैं, जो किसी भी 'एस्कॉर्ट' ऑपरेशन को खतरनाक बना सकते हैं।

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