यूक्रेन पर रूस के हमले के पीछे जानिए क्या है 'संत व्लादिमीर' की कहानी
कीव/मास्को, 25 फरवरी। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जिस तरह से यूक्रेन पर युद्ध का ऐलान किया उससे पूरी दुनिया सकते में आ गई। यूक्रेन पर रूस के हमले के पीछे कई वजहे हैं। अलग-अलग तरह के दावे किए जा रहे हैं, इन्ही में से एक दावा यह भी है कि पुतिन एक बार फिर से रूसी साम्राज्य या फिर सोवियत यूनियन को खड़ा करना चाहते हैं। वहीं एक अन्य दावे के अनुसार पुतिन एक बार फिर से रसियन ऑर्थोडॉक्स चर्च की स्थापित करना चाहते हैं। क्रिश्चियन पादरियों और एक्सपर्ट की मानें तो इस हमले की मूल वजह यूक्रेन के 4.5 करोड़ लोगों को इससे जोड़ना है। इन एक्सपर्ट का मानना है कि इसके पीछे व्लादिमीर पुतिन और उनका सरनेम व्लादिमीर I अहम है।

व्लादिमीर I का इतिहास
व्लादिमीर I की बात करें तो उनका जन्म हजारो साल पहले हुआ था और उन्होंने रूसी साम्राज्य की स्थापना की थी, उन्होंने ही रसियन ऑर्थोडॉक्स चर्च की भी स्थापना की थी। उन्हें रूस और यूक्रेन का संत यानि 'रस' का संत घोषित किया गया था। उन्होंने कीव पर शासन किया था। उस वक्त बाइजेंटाइन साम्राज्य के राजा बासिल II को मिलिट्री जनरल से धमकी मिल रही थी। इसी वजह से अपने साम्राज्य को बचाने के लिए उन्होंने व्लादिमीर 1 को संपर्क किया। लेकिन व्लादिमीर ने शर्त रखी कि अगर हम मदद करेंगे तो बाइजेंटाइन साम्राज्य अपनी एक बेटी को शादी के लिए देगा। लेकिन इसमे एक शर्त यह थी की बाइजेंटाइन साम्राज्य की लड़की से शादी के लिए व्लादिमीर को ईसाई धर्म में परिवर्तित होना पड़ेगा। जिसके बाद व्लादिमीर ने पूरे विद्रोह को कुचल दिया और विजयी होकर राजधानी कीव लौटा और बाइजेंटाइन राजकुमारी को अपनाया।

संत व्लादिमीर
कीव लौटने के बाद व्लादिमीर ने 988 में नागरिकों को निपर नदी के किनारे बड़े स्तर पर धर्म परिवर्तन के लिए लोगों को बुलाया। इसी के साथ ही रसियन ऑर्थोडॉक्स ईसाई की शुरुआत हुई और पवित्र रूसी मातृभूमि की शुरुआत हुई। हालांकि रूस में कम्युनिस्ट शासन आने तक इस विचारधारा को बल मिलता रहा। हालांकि बाद में 1917 में बोल्शेविक क्रांति के बाद सरकार को हटा दिया गया। फिर 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद जब एक बर फिर से व्लादिमीर पुतिन शासन का उदय हुआ। एक्सपर्ट का मानना है कि व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन को फिर से रूस में शामिल करके संत व्लादिमीर 2 बनना चाहते हैं।

पुतिन की मां थीं ईसाई
व्लादिमीर पुतिन की बात करें तो उनका जन्म पूर्व तानाशाह जोसेफ स्टालिन के परिवार में हुआ था। उनके पिता नास्तिक थे और मां ईसाई धर्म को मानने वाली थीं। पुतिन की मां ने गुपचुप धर्म परिवर्तन किया था। पुतिन खुद भी क्रॉस पहनते हैं। उनकी कुछ तस्वीरों में भी यह नजर आता है। माना जाता है कि पुतिन अपनी मां से काफी जुड़े थे। माना जाता है कि ऑर्थोडॉक्स चर्च ही पुतिन को फिर से ईसाई विश्वास की स्थापना के लिए प्रेरित कर रहा है।

पुरानी कहानी दोहरा रही है
धार्मिक इतिहासकार डायना बटलर का मानना है कि रूस पुरानी कहानी का नया रूप देख रहा है। दरअसल 2013 में जब पोप फ्रांसिस चर्च के मुखिया बने तो उन्होंने कहा था कि उन्होंने अपना नाम सेंट फ्रांसिस से लिया है जोकि गरीबी और शांति के प्रतीक थे। पोप फ्रांसिस गरीबों, कमजोर लोगों के लिए चर्च की स्थापना की बात करते थे। लेकिन ऑर्थोडॉक्स चर्च ने इसे अलग ही तरह से लिया। यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप और पुतिन को आने वाले समय में गोरे चरमवादी और किश्चियन राष्ट्रवादियों के बीच काफी लोकप्रियता मिली।

रसियन ऑर्थोडॉक्स चर्च को फिर से स्थापित करना
गौर करने वाली बात है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन की तारीफ की थी। उनके रुख को भी इस थ्योरी से जोड़कर देखा जा रहा है। 2013 में पुतिन ने अपने एक भाषण में कहा था कि कई यूरो-अटलांटिक देश अपनी जड़ों को पीछे छोड़ रहे हैं। ऐसे में साफ था कि पुतिन रसियन ऑर्थोडॉक्स चर्च में विश्वास रखते हैं और यही वजह है कि वह यूक्रेन के खिलाफ एक्शन के मोड में है। यूक्रेन के जरिए पुतिन एक बार फिर से रसियन ऑर्थोडॉक्स चर्च को स्थापित करना चाहते हैं।












Click it and Unblock the Notifications