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Strait of Hormuz क्या है? जिसके बंद होने से पेट्रोल-डीजल का रेट होगा डबल, भारत के लिए सबसे बड़ा झटका क्यों

Strait of Hormuz Importance: मध्य पूर्व में इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा सैन्य संघर्ष अब एक भीषण वैश्विक आर्थिक युद्ध में तब्दील हो चुका है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद करने के कड़े फैसले ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में 'सुनामी' ला दी है। यह महज 33 किलोमीटर संकरा समुद्री रास्ता दुनिया की 'ऊर्जा लाइफलाइन' है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20-25% हिस्सा गुजरता है।

इस नाकेबंदी ने न केवल खाड़ी देशों के निर्यात को ठप कर दिया है, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल की आशंका पैदा कर दी है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो भारत समेत पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था महंगाई और मंदी के गहरे भंवर में फंस सकती है। इस एक्सप्लेनर में समझिए क्यों यह छोटा सा जलमार्ग दुनिया की किस्मत तय करने की ताकत रखता है।

Strait of Hormuz Importance

Hormuz Strait importance: दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण 'ऑयल आर्टरी'

होर्मुज जलडमरूमध्य भौगोलिक रूप से ओमान और ईरान के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसकी रणनीतिक अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया का लगभग 20% से 25% कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इसकी सबसे कम चौड़ाई मात्र 33 किलोमीटर है, लेकिन जहाजों के आने-जाने के लिए सुरक्षित लेन सिर्फ 3 किलोमीटर चौड़ी है। यही कारण है कि इस छोटे से रास्ते पर नियंत्रण का मतलब वैश्विक ऊर्जा बाजार की नब्ज पर हाथ रखना है।

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Iran-Israel conflict: क्यों है यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़?

दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक, सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर अपने शिपमेंट के लिए इसी मार्ग पर पूरी तरह निर्भर हैं। प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद यहां से गुजरते हैं। इसके अलावा, कतर द्वारा निर्यात की जाने वाली दुनिया की अधिकांश एलएनजी (LNG) का रास्ता भी यही है। एशियाई अर्थव्यवस्थाएं, विशेषकर भारत, चीन और जापान, अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे गलियारे के माध्यम से पूरा करती हैं, जो इसे 'ग्लोबल एनर्जी लाइफलाइन' बनाता है।

मार्ग बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रहार

यदि ईरान इस मार्ग को पूरी तरह बाधित करता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति की चेन तत्काल टूट जाएगी। तेल की कमी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $120-$150 प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से हर चीज महंगी हो जाएगी। विकसित और विकासशील दोनों तरह के देशों में मुद्रास्फीति अनियंत्रित हो सकती है, जिससे शेयर बाजार धराशायी होंगे और दुनिया एक लंबी आर्थिक मंदी के भंवर में फंस सकती है।

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सैन्य चुनौती और जहाजों के लिए खतरे

होर्मुज स्ट्रेट का उथला पानी इसे सैन्य हमलों के लिए बेहद संवेदनशील बनाता है। ईरान के पास लंबी और कम दूरी की मिसाइलों का भंडार है, जो किनारे से ही जहाजों को निशाना बना सकती हैं। इसके अलावा, समुद्र में 'नेवल माइंस' बिछाने और छोटे पेट्रोल क्राफ्ट्स के जरिए जहाजों को अगवा करने का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसी स्थिति में, जहाजों का बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) इतना बढ़ जाता है कि कई कंपनियां इस रास्ते से माल भेजना ही बंद कर देती हैं, जिससे सप्लाई चेन ठप हो जाती है।

भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक संकट

भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80% आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का मतलब है भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी आग लगना, जिससे सीधे तौर पर खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक वस्तुएं महंगी हो जाएंगी। हालांकि भारत ने अपने 'स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' (SPR) बना रखे हैं, लेकिन वे केवल कुछ हफ्तों की आपूर्ति ही सुनिश्चित कर सकते हैं। यह संकट भारत के व्यापार घाटे को बढ़ा सकता है और रुपये की वैल्यू को ऐतिहासिक रूप से कम कर सकता है।

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