अमेरिका के दूध से क्यों डर रहा भारत? Non-Veg Milk ने फंसा दी दोनों देशों की डील
What is Non-Veg Milk? भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता (Trade Agreement) बीच में अटक गया है। और इसकी वजह दोनों देशों के बीच कृषि और डेयरी सेक्टर पर मतभेद है। दोनों देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक अगस्त की डेडलाइन से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना चाहते हैं। भारत-अमेरिका के बीच नॉन-वेज मिल्क का मुद्दा लगातार रोड़ा बनता जा रहा है।
भारत का साफ कहना है कि अगर अमेरिका से दूध या डेयरी प्रोडक्ट्स आयात होते हैं, तो यह पक्का होना चाहिए कि वो ऐसे गायों से आया हो जिन्हें कभी भी मांस या खून से बने फीड (आहार) नहीं दिए गए हों।

आखिर क्या है नॉन-वेज मिल्क?
भारतीय सरकार के अनुसार, गायों को मांस, हड्डी, खून या आंतरिक अंगों (Internal Organs) से बने आहार देना न सिर्फ धार्मिक रूप से अस्वीकार्य है, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा के मानकों के भी खिलाफ है। यही वजह है कि भारत सख्त पशु-चिकित्सा प्रमाणीकरण की मांग कर रहा है और इस शर्त को असंगत सीमा (Non-negotiable red line) बताया गया है।
अमेरिका में गायों को क्या खिलाया जाता है?
भारत की तुलना में अमेरिका में स्थिति बिल्कुल अलग है। वहां की गायों को प्रोटीन और फैट के लिए ऐसा चारा दिया जाता है जिसमें सूअर, मछली, मुर्गी, घोड़े, यहां तक कि कुत्ते और बिल्लियों के हिस्से तक शामिल हो सकते हैं। 2004 की Seattle Post-Intelligencer रिपोर्ट के मुताबिक, गायों को घोड़े और सूअर का खून और चर्बी (Tallow) तक दिया जाता है।
भारत को क्यों है आपत्ति?
भारत में डेयरी सिर्फ भोजन का सोर्स नहीं, बल्कि रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
- भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक और उपभोक्ता है।
- इस सेक्टर से 8 करोड़ से ज्यादा लोग सीधे जुड़े हैं।
- डेयरी सेक्टर देश की राष्ट्रीय सकल मूल्य वर्धन (GVA) में 2.5% से 3% तक का योगदान देता है- जिसकी कीमत 7.5 रुपए से 9 लाख करोड़ रुपए के बीच बैठती है।
दूध की कीमतों में 15% तक गिरावट आ सकती है
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत ने अमेरिकी डेयरी उत्पादों को आयात की अनुमति दी, तो दूध की कीमतों में 15% तक गिरावट आ सकती है। इससे भारतीय किसानों को सालाना ₹1.03 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है।
अमेरिका का क्या कहना है?
अमेरिका का तर्क है कि भारत की यह शर्तें 'अनावश्यक व्यापार बाधा (Unnecessary Trade Barrier)' हैं। उसने WTO में इसे चुनौती देते हुए कहा है कि भारत का रुख वैज्ञानिक नहीं, बल्कि धार्मिक आधार पर है।
भारत-अमेरिका के बीच दूध बना व्यापार की दीवार!
भारत और अमेरिका एक व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश में हैं, लेकिन "नॉन-वेज दूध' जैसा मुद्दा असली सिरदर्द बन गया है। यह सिर्फ डेयरी नहीं, बल्कि आस्था, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण भारत की रक्षा का सवाल बन गया है। अगले कुछ हफ्ते तय करेंगे कि क्या दोनों देश इस विवाद को सुलझा पाएंगे- या फिर ये डील हाथ से निकल जाएगी।
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