Jaish al-Adl: पाकिस्तान से चलने वाला आतंकी संगठन जैश अल-अदल क्या है, जिसपर ईरान ने किया है हमला?

What is Jaish al-Adl: ईरान-पाकिस्तान सीमा पर सक्रिय सुन्नी चरमपंथी समूह जैश-अल-अदल का प्रभाव इस क्षेत्र पर बना हुआ है, जिसपर ईरान की तरफ से मिसाइल हमले किए गये हैं। हालांकि, अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है, कि ईरानी हमले में इस संगठन का कितना नुकसान हुआ है।

लेकिन, पाकिस्तान का दावा है, कि ईरानी हमले में दो बच्चे मारे गये हैं। जबकि, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ईरानी हमले के बाद पाकिस्तान की सेना सकते में है और वो नुकसान को कम करके बता रहा है, जैसा उसने भारत के हमले के बाद भी किया था, ताकि वो अपनी जनता को मुंह दिखा सके।

Jaish al-Adl

जैश अल-अदल क्या है?

जैश अल-अदल को अरबी में न्याय की सेना के रूप में अनुवादित किया जाता है, जिसे पहले जुंदाल्लाह के नाम से जाना जाता था, जिसका मतलब होता है, ईश्वर के सैनिकों का उत्तराधिकारी माना जाता है। ये संगठन भी दूसरे आतंकी संगठनों की तरह बम धमाके करने के लिए कुख्यात रहा है। साल 2000 में इस्लामिक गणराज्य ईरान के खिलाफ एक हिंसक विद्रोह को बढ़ाना शुरू किया, जिससे अशांत ईरान-पाकिस्तान की सीमावर्ती इलाकों में सालों तक मार काट होती रही।

2010 में स्थिति उस वक्त बदल गई, जब ईरान ने जुंदाल्लाह के नेता अब्दोलमलेक रिगी को मार डाला। अब्दोलमलेक रिगी का पकड़ा जाना और फिर मारा जाना, जिसमें दुबई से किर्गिस्तान जा रही एक उड़ान को नाटकीय ढंग से रोकना शामिल था, विद्रोही समूह के लिए एक महत्वपूर्ण झटका था।

जैश अल-अदल का हेडक्वार्टर पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में है और इसे ग्लोबर टेरेरिस्ट संगठन करार दिया गया है। इसके आतंकी अतीत में ईरानी पुलिस के कई जवानों का अपहरण कर चुके हैं

ऐसा दावा किया जाता है, कि भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव जब ईरान में अपना कारोबार कर रहे थे, तब इसी संगठन ने उनका अपहरण किया था और फिर उन्हें पाकिस्तानी सेना को सौंप दिया था, और पाकिस्तानी सेना ने उनपर जासूस का आरोप लगा दिया।

जैश अल-अदल का गठन

सीरिया में बशर अल-असद सरकार को ईरान का समर्थन हासिल है, जिसका बदला लेने के लिए आतंकवादी सलाहुद्दीन फारूकी ने साल 2012 में जुंदाल्लाह को नया नाम दिया जैश अल-अदल और नये सिरे से इस आतंकी संगठन ने अपना ऑपरेशन शुरू किया।

जैश अल-अदल सिस्तान-बलूचिस्तान से संचालित होता है, लेकिन तीन देशों में इसकी पकड़ है। ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान, पाकिस्तान के बलूचिस्तान और अफगानिस्तान। इस समूह को जातीय बलूच जनजातियों से समर्थन प्राप्त करता है, विशेष रूप से शिया-प्रभुत्व वाले ईरान में भेदभाव का सामना करने वाले अल्पसंख्यक सुन्नी मुसलमानों के असंतोष से इस संगठन को बल मिलता है।

ईरान में साल 2009 के बाद पांच बड़े धमाकों में जैश अल-अदल की भूमिका सामने आई है।

जैश अल-अदल ने अपहरण के साथ-साथ कई बमबारी, घात लगाक हमले करना और ईरानी सुरक्षा बलों पर कई हमलों की जिम्मेदारी ली है। ईरान संगठन को जैश अल-ज़ोलम का नाम देता है, जो अरबी में अन्याय की सेना को दर्शाता है और उस पर संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से समर्थन प्राप्त करने का आरोप लगाता है।

अक्टूबर 2013 में, जैश अल-अदल ने घात लगाकर हमला किया, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान सीमा के पास 14 ईरानी गार्डों की मौत हो गई थी। समूह ने सीरिया में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की भागीदारी की प्रतिक्रिया के रूप में अपने कार्यों को उचित ठहराया। जिसके बाद ईरान ने अपने सीमावर्ती शहर मिर्जावेह के पास इसके कई आतंकियों को फांसी पर लटका दिया।

फरवरी 2014 में, पांच ईरानी सैनिकों के अपहरण ने ईरान और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा दिया, जिससे तेहरान को सीमा पार छापेमारी पर विचार करना पड़ा।

यह समूह सीरिया की बशर अल-असद सरकार को शिया ईरानी सरकार के समर्थन की वजह से विरोध करता है। प्रमुख नेताओं में सलाहुद्दीन फारूकी और मुल्ला उमर शामिल हैं, जो पाकिस्तान के बलूचिस्तान में समूह के शिविर की कमान संभालते हैं। जुंदुल्लाह प्रमुख अब्दोलमालेक रिगी का चचेरा भाई अब्दुल सलाम रिगी, जैश अल-अदल के भीतर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।कभी भारत, कभी कतर, कभी US तो कभी TTP... पाकिस्तान कैसा न्यूक्लियर देश है, जिसे हर कोई मारता है लात?

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