Trump New Green Card: क्या है ट्रम्प प्रशासन की नई ग्रीन कार्ड पॉलिसी, भारतीयों के लिए फिर बढ़ेंगी मुश्किलें?
Trump New Green Card Policy: व्हाइट हाउस के पास एक अफगान नागरिक द्वारा दो नेशनल गार्ड सैनिकों पर गोली चलाने की घटना के बाद अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। इसी के बाद ट्रंप प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है।
अमेरिकी सरकार ने साफ कहा है कि अब उन सभी देशों के लोगों के ग्रीन कार्ड की फिर से सख्त जांच की जाएगी, जिन्हें "चिंताजनक देश" माना जाता है। USCIS ने बताया कि यह नई नीति 27 नवंबर से तुरंत लागू हो गई है। आइए जानते हैं क्या है ग्रीन कार्ड पॉलिसी और भारतीय प्रवासियों पर इसका क्या असर होगा...

ट्रंप का ग्रीन कार्ड पॉलिसी क्या है?
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं (USCIS) के निदेशक जोसेफ एडलो ने बताया कि, राष्ट्रपति के निर्देश पर, मैंने चिंताजनक देशों से आए सभी विदेशी नागरिकों को जारी ग्रीन कार्ड की पूर्ण, सख्त दोबारा जांच शुरू करने का आदेश दिया है।
दरअसल, ग्रीन कार्ड, जिसे आधिकारिक रूप से पर्मानेंट रेजिडेंट कार्ड कहा जाता है, अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण इमिग्रेशन पहचान में से एक है। यह कार्ड किसी विदेशी नागरिक को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने का वैधानिक अधिकार प्रदान करता है।
ग्रीन कार्ड धारक को मिलने वाले प्रमुख अधिकार:
स्थायी निवास (Permanent Residency) - धारक अमेरिका में अनिश्चितकाल तक रह सकता है।
किसी भी क्षेत्र में रोजगार - ग्रीन कार्ड होने पर व्यक्ति को किसी भी नौकरी या उद्योग में काम करने की कानूनी अनुमति मिल जाती है, बिना अतिरिक्त वीज़ा की जरूरत के।
नागरिकता पाने का रास्ता (Path to Citizenship) - आमतौर पर 3 से 5 साल तक स्थायी निवास बनाए रखने के बाद व्यक्ति अमेरिका की नागरिकता (US Citizenship) के लिए आवेदन कर सकता है।
सरकारी सुरक्षा व लाभों तक पहुंच (Limited Benefits) - कई संघीय और राज्य स्तर की सेवाओं व सुरक्षा कार्यक्रमों का लाभ भी ग्रीन कार्ड धारक ले सकते हैं।
देश में स्वतंत्र आवाजाही - अमेरिका के भीतर कहीं भी रहने, काम करने या पढ़ने की पूरी स्वतंत्रता होती है।
क्या भारतीयों पर पड़ेगा असर?
नहीं...USCIS ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप प्रशासन की इस नई सख्त कार्रवाई का भारतीय ग्रीन कार्ड धारकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। नई नीति में केवल उन 19 देशों के आवेदकों की ग्रीन कार्ड जांच की जाएगी जिन्हें अमेरिका ने "उच्च जोखिम वाले" देशों की सूची में रखा है।
इसमें अफगानिस्तान, म्यांमार, बुरुंडी, चाड, कांगो, क्यूबा, इक्वेटोरियल गिनी, इरीट्रिया, हैती, ईरान, लाओस, लीबिया, सिएरा लियोन, सोमालिया, सूडान, टोगो, तुर्कमेनिस्तान, वेनेजुएला और यमन जैसे देश शामिल हैं। ये वही देश हैं जिन पर ट्रंप प्रशासन ने जून 2025 में जारी आदेश में यात्रा प्रतिबंध (Travel Ban) भी लगाया था।
क्यों लिया गया ये फैसला?
यह बड़ा निर्णय उस घटना के बाद आया है, जिसमें अफगान नागरिक रहमानुल्लाह लकनवाल ने 26 नवंबर को व्हाइट हाउस के करीब दो नेशनल गार्ड सैनिकों पर गोली चलाई। इस हमले में 20 वर्षीय यूएस आर्मी स्पेशलिस्ट सारा बेकस्ट्रोम की मौके पर मौत हो गई और 24 वर्षीय यूएस एयर फोर्स स्टाफ सार्जेंट एंड्रयू वोल्फ गंभीर रूप से घायल हो गए। लकनवाल वर्ष 2021 में अमेरिका पहुंचा था, जब बाइडेन प्रशासन अफगानिस्तान से अराजक सैन्य वापसी के बाद हजारों अफगानों को अमेरिका में पुनर्वासित कर रहा था। उसका शरण आवेदन (Asylum) ट्रंप के सत्ता में आते ही मंजूर हुआ।












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