विदेशों से मिले कितनी कीमत तक के तोहफे खुद के पास रख सकते हैं पीएम मोदी, गिफ्ट्स रखने को लेकर क्या हैं नियम?
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और फर्स्ट लेडी जिल बाइडेन ने PM नरेंद्र मोदी के लिए व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर रखा। मोदी का अमेरिका दौरे का यह तीसरा दिन था। इस मौके पर पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच तोहफों का लेन-देन हुआ।
बाकी देशों के पीएम की तरह भारत के प्रधानमंत्री को भी हर साल विभिन्न मौके पर कई सारे गिफ्ट्स मिलते हैं। इसमें खिलाड़ियों, राजनेताओं और विभिन्न देशों के राजनायकों द्वारा दिए गए गिफ्ट भी शामिल होते हैं।

दो देशों के बीच तोहफों का लेन-देन काफी पुरानी परिपाटी है। इसे दो देशों के बीच आपसी संबंधों का प्रतीक माना जाता है। तोहफों के लेनदेन से रिश्ते मजबूत होते हैं।
विदेश मंत्रालय के गिफ्ट कमेटी के ब्योरे के अनुसार, अप्रैल 2021 से अप्रैल 2022 के बीच प्रधानमंत्री मोदी को विदेश यात्राओं के दौरान एवं अन्य माध्यमों से 30 से अधिक तोहफे मिले थे।
इस अवधि में पीएम मोदी ने डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन, अमेरिका, बांग्लादेश जैसे देशों की यात्रा की थी। इस दौरान पीएम मोदी को मिले तोहफे में सबसे कीमती उपहार लकड़ी, चांदी और सोने से निर्मित शतरंज का सेट था।
इसकी कीमत पांच लाख रुपये बताई गई। इसके अलावा उन्हें बर्तनों के चार सेट भी उपहार में मिला था, जिसकी कीमत 4.5 लाख रुपये थी।
भारत में तोहफे चुनने का काम साल 2005 से फॉरेन ऑफिस की गिफ्ट कमेटी करती है। इससे पहले ये जिम्मा मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स के अधिकारियों के पास था।
विदेशी अभिदाय विनियमन अधिनियम 2010 के अनुसार, जब किसी भारतीय प्रतिनिधिमंडल के किसी सदस्य को तोहफा मिलता है तो उसे तीस दिन की अवधि के भीतर संबंधित मंत्रालय या विभाग को ये सौंपना होता है।
अगर तोहफे की कीमत 5 हजार से कम हो तो इसे नेता अपने पास रख सकते हैं। हालांकि इससे अधिक कीमत के तोहफे भी नेता अपने पास रख सकते हैं लेकिन इसके लिए उन्हें सरकार से इसे असल मूल्य पर खरीदना होता है। ये नियम लगभग हर देश में है।
इसके पीछे की सोच ये है कि कोई भी देश किसी व्यक्ति को गिफ्ट नहीं देता, बल्कि उसके ओहदे को देता है। ये ओहदे असल में देश के होते हैं, यही वजह है कि उन्हें जमा कराने का नियम बनाया गया है।
हर तोहफे के डिक्लेरेशन के बाद भारतीय बाजार में अलग से उसकी कीमत तय की जाती है, जिसके बाद पूरी डिटेलिंग करके आइटम को ट्रेजर हाउस का हिस्सा बनाया जाता है। आगे उनका क्या करना है, ये मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स तय करता है।












Click it and Unblock the Notifications