US Election 2024: रेड, ब्लू और पर्पल स्टेट्स क्या हैं? स्विंग स्टेट ही क्यों चुनते हैं अमेरिका का राष्ट्रपति
अमेरिका में 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव है। अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए टक्कर मुख्यतः दो दलों रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच होती है। इस बार कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुकाबला है। रिब्लिकन पार्टी को डोनाल्ड ट्रंप लीड कर रहे हैं जबकि डेमोक्रेट्स की ओर से कमला हैरिस रेस में हैं।
अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव न सिर्फ इस देश के लिए, बल्कि पुरी दुनिया के लिए एक अहम चुनाव माना जाता है, क्योंकि इस देश के राष्ट्रपति को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति के तौर पर देखा जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतना आसान नहीं है। जीत हासिल करने के लिए पार्टियां एड़ी-चोटी की ताकत लगा देती हैं।
इस चुनाव पर सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की नजर रहती है। लिहाजा, हम अमेरिकी चुनाव को लेकर अपने पाठकों के लिए स्पेशल सीरिज चला रहे हैं। इसमें हम अमेरिकी चुनाव से संबंधित महत्वपूर्ण और दिलचस्प जानकारियां आपसे शेयर कर रहे हैं।
आज इस सीरिज के इस भाग में हम आपको अमेरिकी चुनाव से जुड़े रेड स्टेट, ब्लू स्टेट, स्विंग स्टेट के बारे में बताने जा रहे हैं।
रेड स्टेट
रिपब्लिकन पार्टी के प्रभाव वाले राज्यों को रेड स्टेट कहा जाता है। इस पार्टी के झंडे का रंग लाल है ऐसे में इन राज्यों को रेड स्टेट कहा जाता है। ये राज्य मुख्य रूप से देश के दक्षिण, मध्यपश्चिम और मैदानी क्षेत्रों में स्थित हैं। ये राज्य अपनी रूढ़िवादी राजनीतिक रुझान के लिए जाने जाते हैं।
इन रेड स्टेट्स में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कम करों जैसे सिद्धांतों पर जोर दिया जाता है। इन राज्यों में राजनीतिक परिदृश्य अक्सर पर्याप्त ग्रामीण आबादी द्वारा आकार दिया जाता है, जो उनके दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को प्रभावित करता है। वर्तमान में अमेरिका में 18 रेड स्टेट हैं। टेक्सास, अलाबामा, साउथ कैरोलिना, मोंटाना, मिसौरी आदि राज्य रेड स्टेट कहे जाते हैं।
ब्लू स्टेट्स
जिन राज्यों में डेमोक्रेटिक पार्टी का प्रभाव अधिक होता है, उन्हें ब्लू स्टेट कहा जाता है। डेमोक्रेटिक पार्टी के फ्लैग में ब्लू यानी नीला रंग है। ये राज्य आम तौर पर उदारवादी माने जाते हैं और पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य जैसे मुद्दों का समर्थन करते हैं। कैलिफोर्निया, मेन, कोलाराडो, डेलावेयर, न्यूयॉर्क जैसे राज्य ब्लू स्टेट कहे जाते हैं।
वे राज्य जो रेड या ब्लू नहीं होते उन्हें पर्पल स्टेट कहा जाता है। दरअसल रेड और ब्लू के मिलाने पर जो रंग बनता है उसे पर्पल कहा जाता है। इसलिए इन्हें पर्पल रंग से चिन्हित किया जाता है। इसे स्विंग स्टेट्स भी कहा जाता है। नाम से ही जाहिर होता है कि ऐसे राज्य जहां वोटर्स का मूड बदलने की संभावना होती है, वे स्विंग स्टेट्स कहलाते हैं। इन राज्यों को बैटल ग्राउंड भी कहा जाता है दरअसल अमेरिका चुनाव की असल लड़ाई इन्हीं राज्यों में लड़ी जाती है।
अमेरिका में चुनाव जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार के लिए सबसे बड़ी चुनौती 'स्विंग स्टेट्स' में जीत दर्ज करना होता है। ये ऐसे राज्य हैं जिन्होंने रिपब्लिकन हो या डेमोक्रेट, किसी एक के पक्ष में मतदान का ट्रेंड नहीं रखा। चुनावी लिहाज से इसके मायने कि यहां कोई भी जीत सकता है।
हालांकि स्विंग स्टेट की पहचान की कोई सार्वभौमिक परिभाषा नहीं है, लेकिन उनकी विशेषता यह है कि वोट का अंतर कम होता है और अलग-अलग राजनीतिक दल समय के साथ जीतते हैं। स्विंग-स्टेट का नक्शा प्रत्येक चुनाव चक्र के साथ बदलता रहता है। ये स्थायी नहीं रहता। यदि ये स्थाई हुआ तो ये रेड या ब्लू स्टेट में बदल सकते हैं।

1992 से 30 राज्यों ने कम से कम एक बार पिछले चुनाव के विपरीत पार्टी के उम्मीदवार के लिए मतदान किया है। ऐसे में कहा जा सकता है कि अमेरिका में कम से कम 20 राज्य ऐसे हैं जो 30 सालों से भी अधिक समय तक रेड या ब्लू स्टेट रहे हैं।
इनमें से 13 राज्य ऐसे हैं जहां 1988 के बाद से सिर्फ रिपब्लिक पार्टी को ही वोट जाता रहा है। वहीं सिर्फ 7 राज्य ऐसे हैं जहां इतने सालों से सिर्फ डेमोक्रेटिक पार्टी को वोट मिलता है।
सबसे अधिक इन्हीं राज्यों में प्रचार
वर्तमान में एरिज़ोना, जॉर्जिया, मिशिगन, पेंसिल्वेनिया, फ्लोरिडा, नेवादा और विस्कॉन्सिन आदि राज्यों को स्विंग स्टेट्स में रखा जा सकता है। स्विंग स्टेट में किसी भी दल के प्रति लगातार निष्ठा बनी नहीं रहती है। ऐसे में इन राज्यों में नतीजे चुनाव में जीत और हार के बीच निर्णायक कारक होते हैं। यही वजह है कि दोनों ही पार्टियां चुनाव जीतने के लिए सबसे अधिक मेहनत इन्हीं राज्यों में करती हैं।
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