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भारत के खिलाफ पश्चिमी मीडिया का प्रोपेगेंडा, मोदी सरकार के दो मंत्री कैसे कर रहे हैं बोलती बंद?

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अप्रैल महीने में अपने अमेरिका के दौरे के दौरान 2+2 मंत्री स्तर की वार्ता के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी पत्रकारों की बोलती बंद कर दी थी।

Hardeep Singh Puri CNN: यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही अलग अलग मुद्दों पर भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने वाली पश्चिमी देशों की मीडिया को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बाद अब पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी से करारा जवाब दिया है। यूक्रेन युद्ध के बाद से पहले जयशंकर ने भारत की तरफ से मोर्चा संभाल रखा था और अब पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी भी जयशंकर के सुर में सुर मिलाना शुरू कर दिया है। हरदीप सिंह पुरी ने अपने जवाब से अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन की प्रसिद्ध एंकर की बोलती बंद कर दी है। इस दौरान मंत्री पूरी ने सीएनएन की एंकर को बताया, कि वो कैसे भारत के खिलाफ गलत आंकड़े पेश कर रही हैं और प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश कर रही हैं।

हरदीप सिंह के तीखे तेवर

हरदीप सिंह के तीखे तेवर

अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन को दिए गये एक इंटरव्यू में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि, रूस से भारत के तेल खरीदने में कोई नैतिक संघर्ष नहीं है। उन्होंने सीएनएन को साफ तौर पर कहा कि, पूरी तरह से बिल्कुल नहीं, भारत किसी भी नैतिक संघर्ष की स्थिति में नहीं है। भारत के केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने कहा कि, 'हम भारत के एक अरब 30 करोड़ उपभोक्ताओं के प्रति अपना नैतिक कर्तव्य निभाते हैं।' हरदीप सिंह पूरी ने अपने इंटरव्यू के दौरान रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत की विशालकाय 1.3 अरब आबादी का हवाला दिया और उन्होंने कहा कि, 'मोदी सरकार रूस से तेल खरीदने को लेकर कोई भी दबाव महसूस नहीं करती है, हम कोई प्रेशर महसूस नहीं करते हैं। हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं।" उन्होंने इंटरव्यू के दौरान आगे कहा कि, "भारत अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय हित के अनुसार ही अपने फैसले करता है।" आपको बता दें कि, 24 फरवरी को यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका ने रूस के खिलाफ अत्यंत सख्त प्रतिबंध लगा रखे हैं, फिर भी भारत लगातार रूस से डिस्काउंट पर ऊर्जा का आयत कर रहा है।

सीएनएन का सवाल क्या था?

दरअसल, इंटरव्यू के दौरान सीएनएन की एंकर ने यूक्रेन युद्ध के दौरान रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत की नैतिकता पर सवाल उठाने की कोशिश की थी, जिसपर पेट्रोलियम मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि, 'भारत के लिए कोई नैतिक संघर्ष की बात नहीं है।' उन्होंने कहा कि, 'हम एक्स या वाई से नहीं खरीदते हैं। जो भी उपलब्ध है हम खरीद लेते हैं, और मैं खरीदारी नहीं करता। सरकार नहीं करती। तेल कंपनियां करती हैं।" सीएनएन की पत्रकार बेकी एंडरसन ने इस इंटरव्यू के इस महत्वपूर्ण हिस्से को ट्वीट किया है। वहीं, भारत के पेट्रोलियम मंत्री को इंटरव्यू के इस हिस्से में सीएनएन की एंकर को सही करते हुए भी देखा जा रहा है, जिसमें वो बोल रही हैं, कि रूस से 2 प्रतिशत तेल आयात भारत करता है। जिसपर हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि, 'मैं आपको सही करना चाह रहा हूं, कि भारत रूसी तेल का सिर्फ 0.2 प्रतिशत ही आयात करता है।' पुरी ने आगे कहा कि, "इसके अलावा यूरोप जितना एक शाम को रूस से तेल खरीदता है, उसका एक तिहाई ही भारत आयात करता है।'

इराक से सबसे ज्यादा तेल आयात

इराक से सबसे ज्यादा तेल आयात

इसके साथ ही भारत के केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सीएनएन एंकर की बोलती बंद करते हुए कहा कि, पिछले महीने भी भारत ने सबसे ज्यादा रूस से नहीं, बल्कि इराक से तेल खरीदा है। पुरी ने कहा कि, रूस अब जाकर भारत को तेल बेचने के मामले में चौथे या पांचवें पॉजीशन पर आया है और मोदी सरकार पर इस बात कोई प्रेशर नहीं है। भारत के केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि, भारत सरकार की पूरी कोशिश इस बात को लेकर है, कि भारत में लोगों की जरूरतों को पूरा किया जाए, और तेल की कीमतों में केोई इजाफा ना हो। उन्होंने दोटूक कहा कि, भारत अपनी जरूरतों और अपने हितों पर ध्यान दे रहा है, लिहाजा रूसी तेल खरीदने से भारत को किसी तरह का कोई अफसोस नहीं है। आपको बता दें कि, रूस अब भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश बन चुका है, जबकि इराक पहले नंबर पर बना हुआ है और सऊदी अरब अब तीसरे स्थान पर चला गया है।

सऊदी ने किया था परेशान

सऊदी ने किया था परेशान

आपको बता दें कि, पिछले साल सऊदी अरब दूसरा देश था, जो सबसे ज्यादा तेल भारत को बेचता था, लेकिन पिछले साल सऊदी अरब ने तेल उत्पादन में कटौती कर भारत को काफी परेशान किया था और पिछले साल से ही भारत ने सऊदी अरब से तेल खरीदने की जगह वैकल्पिक व्यवस्थाओं की तरफ ध्यान देना शुरू कर दिया था। पिछसे ,साल भारत ने बार बार सऊदी अरब से तेल प्रोडक्शन बढ़ाने का आग्रह किया था, ताकि भारत में तेल की कीमत को कम किया जा सके, लेकिन सऊदी अरब ने ऐसा करने से मनाकर दिया था, लिहाजा अब भारत का कहना है, कि अब वो अपने हितों से समझौता नहीं करेगा।

जयशंकर ने भी दिया था करारा जवाब

जयशंकर ने भी दिया था करारा जवाब

आपको बता दें कि, इससे पहले भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अप्रैल महीने में अपने अमेरिका के दौरे के दौरान 2+2 मंत्री स्तर की वार्ता के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी पत्रकारों की बोलती बंद कर दी थी। एस जयशंकर ने उस दौरान कहा था, कि रूस से भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से तेल का आयात करता है। लेकिन अगर इस आयात को देखें तो हम जितना एक महीने में आयात करते हैं उतना यूरोप हर रोज रूस से आयात करता है। उस दौरान एस जयशंकर ने कहा था कि, "अगर आप भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद की बात करते हैं तो मैं कहना चाहूंगा आपको यूरोप पर अपना ध्यान देना चाहिए। हम ईंधन की सुरक्षा के लिए कुछ हिस्सा तेल का आयात करते हैं, लेकिन अगर एक महीने के आंकड़े पर नजर डालें तो हम जितना तेल एक महीने में खरीदते हैं उतना तो यूरोप हर दोपहर को खरीद लेता है"।

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